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छोटा सिक्का: सब बता रहे दूसरे का दोष

Tue, 16 Jul 2019 10:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2019 10:06 PM IST
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one rupees small coin: people upset
गोलाबाजार में स्थित एक दूकान पर रखा सिक्का। - फोटो : KHALILABAD
एक का छोटा सिक्का : दुकानदार दे रहे बैंकों को दोष, बैंक अफसर बता रहे खुद को निर्दोष
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- बाजारों में एक रुपये का छोटा सिक्का नहीं ले रहे व्यपारी
- सिक्कों के बढ़ते बोझ से परेशान हैं आम लोग
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। मांगलिक अवसरों पर एक रुपये का सिक्का ही शगुन की रकम को शुभ बनाता है। परंतु कुछ दिनों से बाजार में फैलाए गए भ्रम के चलते एक रुपये का छोटा सिक्का आम आदमी के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। दुकानदार इसे चलन से बाहर बताकर लेने से मना कर रहे हैं। वहीं बैंक अफसर इसे दुकानदारों की ही मनमानी करार दे रहे हैं। व्यापारियों व बैंक अफसरों की इस कहानी में आम आदमी इस कदर उलझा है कि उसके घर सिक्कों का बोझ बढ़ता जा रहा है।
नोटबंदी के बाद बाजार में सिक्कों की भरमार हो गई है। यह सिक्के अधिकतर बैंकों ने ही ग्राहकों को नोट के बदले दिए थे लेकिन अब वहीं सिक्के लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। पहले एक व दो रुपये के सिक्कों को लेकर आनाकानी हो रही थी और अब एक रुपये के नए सिक्के (छोटा सिक्का) को चलन से ही बाहर बताया जाने लगा है। स्थिति यह है कि एक रुपये का छोटा सिक्का लीगल टेंडर होने के बाद भी मार्केट में चलन से बाहर हो गया है। दुकानदार छोटे सिक्के लेने से मना कर रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि सिक्कों को लेकर केवल भ्रम फैलाया जा रहा है। बैंक अफसरों व बड़े दुकानदारों की आनाकानी के बीच आम लोग पिस रहे हैं और एक रुपये के छोटे सिक्के लेकर इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हो रही है। क्योंकि महज अफवाह के चलते ही उनका सिक्का बाजार में खोटा बताया जा रहा है।
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इनकी भी सुनिए
सब्जी विक्रेता ओमप्रकाश ने कहा कि जब बैंक ही एक रुपये के छोटे सिक्के लेने से मना कर रहे हैं तो हम लोग क्या करें। अब बड़े व्यापारी भी एक रुपये के छोटे सिक्के नहीं ले रहे हैं। पान विक्रेता महेंद्र ने कहा कि एक रुपये का छोटा सिक्का कोई बड़ा व्यापारी लेता ही नहीं है। उन लोगों को सामान लेने में दिक्कत होती है। इसलिए वे लोग भी सिक्का नहीं ले रहे हैं। वहीं सब्जी खरीदने आए रमेश का कहना है कि अक्सर ही दुकानों पर सिक्कों को लेकर कहासुनी होती है। दुकानदार पहले तो एक रुपये का पुराना सिक्का नहीं ले रहे थे। बाद में एक रुपये के छोटे सिक्कों को चलन से बाहर बताया जाने लगा। अनिल पांडेय भी छोटे सिक्कों की इस समस्या से परेशान हैं। कहते हैं कि कई बार बाजार से ही छोटे सिक्के मिल जाते हैं लेकिन वापस दुकानदार को देने पर मना कर दिया जाता है। फिलहाल सिक्कों की इस कहानी ने सबको संकट में डाल रखा है।
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बैंक प्रबंधक बोले--
इंडियन ओवरसीज बैंक की शाखा खलीलाबाद के शाखा प्रबंधक जयशंकर प्रसाद का कहना है कि उनकी शाखा में सिक्के लिए जा रहे हैं। उनके खातेदार अपने खाते में सिक्का जमा भी करते हैं। उनके पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है।

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स्टेट बैंक की मेन ब्रांच के शाखा प्रबंधक अजय रंजन का कहना है कि सिक्का जमा करने में कोई दिक्कत नहीं है। अगर कोई बैंक को दोष दे रहा है तो वह गलत है। लोग अपने खाते में सिक्का जमा कर सकते हैं।
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