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25 वर्ष पहले भी 22 नाव सवारों को लील गई थी घाघरा की धारा

Sun, 13 Oct 2019 10:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2019 10:42 PM IST
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one dead body
घाघरा नदी मैं लापता हुए लोगों की तलाश करती एनडीआरएफ की टीम व स्थानीय पुलिस। - फोटो : KHALILABAD
25 वर्ष पहले भी 22 नाव सवारों को लील गई थी घाघरा
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धनघटा। रामबाग घाट के पास घाघरा में शनिवार को छोटी नाव पलटने की घटना ने 25 साल पुराने हुए नाव हादसे के जख्म को हरा कर दिया। उस हादसे में नारायनपुर गांव के रहने वाले 22 लोगों की घाघरा में डूबने से मौत हो गई थी। जबकि चार लोगों की जान बची थी। छोटी नाव पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो रही है। ऐसे में इन घटनाओं से लोगों को सबक लेनी चाहिए।
दरअसल, घाघरा नदी में छोटी नाव पर सवार होकर खेती के लिए नदी के तटवर्ती गांव के लोगों का इस पार से उस पार आना-जाना मजबूरी है। यह अलग बात है कि नाव की क्षमता को नजरअंदाज कर उसमें लोग सवार हो जाते है। शनिवार को जब नाव पलटी तो उसमें सवार 14 लोग तो तैर कर जान बचा लिए, लेकिन चार महिलाएं डूब गई। इस हादसे ने 25 साल पूर्व हुए नाव हादसे के जख्म को लोगों के जेहन में ताजा कर दिया। 22 अक्तूबर 1994 को इसी तरह नारायनपुर गांव के 26 लोग डोगी नाव पर सवार होकर खेती के काम से उस पार जा रहे थे। तभी बीच धारा में नाव अनियंत्रित होकर पलट गई थी। उसमें 18 वर्षीय कल्पनाथ व 16 वर्षीय कमली ने जान की बाजी लगाकर खुद को बचाते हुए चार लोगों की जान बचाई थी। जबकि 22 लोगों की डूबने से मौत हो गई थी। नारायनपुर निवासी कपिलदेव, रामरेखा, सुमेर, गागरगाड़ निवासी वीरेंद्र , सुरेश, रामप्रीत , हरीराम ने बताया कि शनिवार की घटना से 25 वर्ष पहले हुआ हादसे की याद ताजा कर दिया है। इन लोगो का कहना था कि जिस तरह की गलती उस समय नाव पर अधिक लोगों की सवारी करके की गई, वही गलती चपरापूर्वी व बालमपुर के लोगो ने दोहरा दी। जिस नाव की क्षमता आठ से दस लोगों को बैठाने की है। उस नाव पर जब उससे दोगुने लोग सवार होंगे तो हादसा होने की पूरी गुंजाइश होगी। इन दोनों घटनाओं से अब लोगों को सबक लेनी चाहिए और क्षमता के हिसाब से ही नाव पर सवार होना चाहिए।
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चपरा पूर्वी गांव में मातम, चार घरों में नहीं जला चूल्हा
- लापता महिलाओं की सलामती के लिए लोग ईश्वर से कर रहे थे दुंआ
- कविता का शव मिला तो रो पडा पूरा गांव
अयाज अहमद/ परमात्मा यादव
पौली/ रोशया बाजार। रामबाग घाट पर घाघरा नदी में नाव पलटने से डूबी चारों महिलाओं के परिजन सकते में रहे। चपरा पूर्वी गांव की रहने वाली चारों महिलाओं के घरों पर दो दिनों से चूल्हा नहीं जला। पिता जहां अपनी बेटियों, पति जहां पत्नी को ,वहीं मासूम बच्चों की निगाहें अपनी मां को तलाश रही थी। गांव में जैसे ही कविता का शव मिलने की सूचना पहुंची कोहराम मच गया।
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शनिवार की सुबह धान की कटाई करने के लिए जब माया, रेखा, रुमा और कविता अपने घर से निकली तो किसी को यह अहसास नही था कि उनसे यह आखिरी मुलाकात होगी। रोजाना की भांति शाम तक घर लौट आने के उम्मीद में सभी दिनचर्या के काम में लगे थे। लेकिन होनी को कौन रोक सकता है। मात्र आधे घंटे बाद जब नदी में नाव डूबने की सूचना पहुंची तो रोते बिलखते परिजन के साथ गांव के लोग घाघरा नदी के किनारे पहुंच गए। पता चला 18 लोगों में से 14 तैर कर अपनी जान बचाने में सफल रहे हैं जबकि माया, रेखा, रूमा और कविता का कुछ पता नहीं चल रहा था।

देर शाम को एनडीआरएफ टीम के विक्रम सिंह ने बताया कि कविता केे शव को बरामद कर लिया गया। शेष तीन की तलाश की जा रही है। अंधेरा होने के कारण तलाश बंद कर देना पड़ा है। अब सोमवार की सुबह से फिर तलाशी अभियान चलाया जाएगा।
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