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Sant Kabir Nagar News: अब अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद हो गया, कल आइए
Fri, 03 Mar 2023 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 03 Mar 2023 11:36 PM IST
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जिला अस्पताल में दस बजे के करीब अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लगी मरीजो की भीड़।संवाद
रेडियोलॉजिस्ट मरीजों को देते हैं धड़ल्ले से जवाब
- सुबह आठ से दोपहर दो के बजाय 11 बजे तक ही हो रहा अल्ट्रासाउंड
- शिकायत पर सीएमएस की जांच में गैरहाजिर मिले कर्मी, वेतन रोका
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड विभाग की मानमानी एक फिर शुरू हो गई है। तीन घंटे में ही अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद कर दिया जा रहा है, जिससे उसके बाद आने वाले मरीज परेशान हो रहे हैं। मरीजों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीएमएस ने 11.30 बजे अल्ट्रासाउंड विभाग का निरीक्षण किया तो रेडियोलाॅजिस्ट नदारद मिले। जिस पर उन्होंने रेडियोलाॅजिस्ट का वेतन रोक दिया है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1100 से 1200 मरीज इलाज के लिए आते हैंं। इसमें करीब 100 से 120 मरीजों का अल्ट्रासाउंड भी होता है। अल्ट्रासाउंड का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक निर्धारित है। चिकित्सक बीमारी के अनुरूप अल्ट्रासाउंड लिखते हैं, अगर मरीज 11 बजे के बाद अल्ट्रासाउंड कराने जाता है तो उसे सेंटर पर जवाब मिलता है कि अल्ट्रासाउंड बंद हो गया है, अब कल सुबह आठ बजे आइए। शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे महुली निवासी विजय कांदू, राजेश, सीमा देवी का कहना था कि वह 10 बजे अस्पताल आए थे। पेट में दर्द था तो चिकित्सक को दिखाया, उन्होंने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा है। जब अल्ट्रासाउंड कराने आए तो बंद मिला। यही हाल अन्य मरीजों का भी था, वह भी बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही लौट गए। अल्ट्रासाउंड करने वाले रेडियोलाॅजिस्ट सुबह कभी आठ बजे आते हैं तो कभी 8.30 बजे और 11 बजते-बजते अल्ट्रासाउंड कर चले जाते हैं। वह ढाई से तीन घंटे में 30 से 32 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड करते हैं, जबकि उन्हें दो बजे तक अल्ट्रासाउंड करना होता है। इसकी शिकायत शुक्रवार को मरीजों ने सीएमएस से की तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड सेंटर का निरीक्षण किया, जहां पर रेडियोलाॅजिस्ट अनुपस्थित मिले।
रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी को दो बजे तक अल्ट्रासाउंड विभाग में रहना चाहिए, लेकिन वह नहीं बैठ रहे हैं, इससे मरीजों को परेशानी हो रही है, इस संबंध में उन्हें कई बार चेतावनी दी गई थी, पर उन्होंने उसे नजर अंदाज कर दिया। इसलिए उनका वेतन रोक दिया गया है, अगर आदत में सुधार नहीं लाते हैं तो निदेशालय को सूचना भेज दी जाएगी।
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- डॉ. ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस
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- सुबह आठ से दोपहर दो के बजाय 11 बजे तक ही हो रहा अल्ट्रासाउंड
- शिकायत पर सीएमएस की जांच में गैरहाजिर मिले कर्मी, वेतन रोका
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड विभाग की मानमानी एक फिर शुरू हो गई है। तीन घंटे में ही अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद कर दिया जा रहा है, जिससे उसके बाद आने वाले मरीज परेशान हो रहे हैं। मरीजों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीएमएस ने 11.30 बजे अल्ट्रासाउंड विभाग का निरीक्षण किया तो रेडियोलाॅजिस्ट नदारद मिले। जिस पर उन्होंने रेडियोलाॅजिस्ट का वेतन रोक दिया है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1100 से 1200 मरीज इलाज के लिए आते हैंं। इसमें करीब 100 से 120 मरीजों का अल्ट्रासाउंड भी होता है। अल्ट्रासाउंड का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक निर्धारित है। चिकित्सक बीमारी के अनुरूप अल्ट्रासाउंड लिखते हैं, अगर मरीज 11 बजे के बाद अल्ट्रासाउंड कराने जाता है तो उसे सेंटर पर जवाब मिलता है कि अल्ट्रासाउंड बंद हो गया है, अब कल सुबह आठ बजे आइए। शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे महुली निवासी विजय कांदू, राजेश, सीमा देवी का कहना था कि वह 10 बजे अस्पताल आए थे। पेट में दर्द था तो चिकित्सक को दिखाया, उन्होंने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा है। जब अल्ट्रासाउंड कराने आए तो बंद मिला। यही हाल अन्य मरीजों का भी था, वह भी बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही लौट गए। अल्ट्रासाउंड करने वाले रेडियोलाॅजिस्ट सुबह कभी आठ बजे आते हैं तो कभी 8.30 बजे और 11 बजते-बजते अल्ट्रासाउंड कर चले जाते हैं। वह ढाई से तीन घंटे में 30 से 32 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड करते हैं, जबकि उन्हें दो बजे तक अल्ट्रासाउंड करना होता है। इसकी शिकायत शुक्रवार को मरीजों ने सीएमएस से की तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड सेंटर का निरीक्षण किया, जहां पर रेडियोलाॅजिस्ट अनुपस्थित मिले।
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रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी को दो बजे तक अल्ट्रासाउंड विभाग में रहना चाहिए, लेकिन वह नहीं बैठ रहे हैं, इससे मरीजों को परेशानी हो रही है, इस संबंध में उन्हें कई बार चेतावनी दी गई थी, पर उन्होंने उसे नजर अंदाज कर दिया। इसलिए उनका वेतन रोक दिया गया है, अगर आदत में सुधार नहीं लाते हैं तो निदेशालय को सूचना भेज दी जाएगी।
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- डॉ. ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस