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Sant Kabir Nagar News: अब स्वच्छता के साथ हरित गतिविधियों पर भी तय होगी स्कूलों की रेटिंग
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संतकबीरनगर। जिले के सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों की रेटिंग अब केवल साफ-सफाई के आधार पर नहीं होगी। विद्यालय की स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों की स्वच्छ आदतों को भी रेटिंग का आधार बनाया जाएगा।
शासन ने स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचबीआर) 2026-27 की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत जिले के सभी विद्यालयों को पोर्टल पर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में करीब 2,500 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें लगभग सवा दो लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
एसएचबीआर के तहत विद्यालयों की व्यवस्थाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का विभिन्न स्तरों पर आकलन किया जाएगा। इसके लिए विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों को एसएचबीआर पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद निर्धारित चरणों में ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाएगा। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्रमाण पत्र, मान्यता और प्रोत्साहन के रूप में अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
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डीआईओएस उपेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को एसएचबीआर पोर्टल पर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
छह प्रमुख श्रेणियों में होगा मूल्यांकन
विद्यालयों की व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय गतिविधियों को परखने के लिए छह प्रमुख श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता, वर्षा जल संचयन की व्यवस्था और पानी बचाने के लिए विद्यालय की ओर से किए जा रहे प्रयास शामिल हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए अलग, स्वच्छ और आसानी से उपलब्ध शौचालय की व्यवस्था भी देखी जाएगी। शौचालयों में डस्टबिन, साबुन और हाथ धोने की सुविधा के साथ विद्यार्थियों में नियमित रूप से हाथ धोने की आदत को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है। विद्यालय परिसर की स्वच्छता, गीले और सूखे कचरे को अलग करने की व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को भी रेटिंग में शामिल किया जाएगा।
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शासन ने स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचबीआर) 2026-27 की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत जिले के सभी विद्यालयों को पोर्टल पर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में करीब 2,500 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें लगभग सवा दो लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
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एसएचबीआर के तहत विद्यालयों की व्यवस्थाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का विभिन्न स्तरों पर आकलन किया जाएगा। इसके लिए विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों को एसएचबीआर पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद निर्धारित चरणों में ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाएगा। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्रमाण पत्र, मान्यता और प्रोत्साहन के रूप में अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
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डीआईओएस उपेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को एसएचबीआर पोर्टल पर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
छह प्रमुख श्रेणियों में होगा मूल्यांकन
विद्यालयों की व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय गतिविधियों को परखने के लिए छह प्रमुख श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता, वर्षा जल संचयन की व्यवस्था और पानी बचाने के लिए विद्यालय की ओर से किए जा रहे प्रयास शामिल हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए अलग, स्वच्छ और आसानी से उपलब्ध शौचालय की व्यवस्था भी देखी जाएगी। शौचालयों में डस्टबिन, साबुन और हाथ धोने की सुविधा के साथ विद्यार्थियों में नियमित रूप से हाथ धोने की आदत को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है। विद्यालय परिसर की स्वच्छता, गीले और सूखे कचरे को अलग करने की व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को भी रेटिंग में शामिल किया जाएगा।