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Sant Kabir Nagar News: सीएचसी सेमरियावां में ब्लड जांच की व्यवस्था नहीं, मरीज परेशान
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- निजी पैथालॉजी सेंटर पर महंगे दामों में मरीजों को करानी पड़ रही जांच
- पांच माह से सीबीसी रीजेंट नहीं, तो एक माह से मशीन खराब बताकर मरीजों को जांच के लिए बाहर भेजा जा रहा है
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। गांव-गांव स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा तो जरूर किया जा रहा है, लेकिन बदहाल अस्पतालों में न तो मरीजों को सही इलाज मिलता है और न ही अस्पतालों में जरूरी जांच सुविधाएं ही हैं। सीएचसी सेमरियावां में पैथोलॉजी जांच की सुविधा लड़खड़ा गई है। पैथलॉजी लैब सेंटर मरीजों को जांच सुविधाएं देने में नाकाम साबित हो रहा है।
30 शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां पर इलाज के लिए जनपद के सेमरियावां ब्लॉक के साथ ही आंशिक रूप से बघौली, बेलहर कला, सांथा, बस्ती जनपद के साऊंघाट, रुधौली ब्लाॅक के
गांवों के लोग आते हैं। इस हॉस्पिटल पर पांच लाख से अधिक जनसंख्या इलाज के लिए आश्रित है। प्रतिदिन 500-600 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस समय मौसम बदलाव से जुकाम बुखार व वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इलाज के लिए डाक्टरों के जरिए मरीजों को सीबीसी (कंप्लीट खून गणना) जांच कराने की सलाह देते हैं। सीएचसी सेमरियावां में छह माह से सीबीसी (कंप्लीट खून गणना) जांच नही हो रही है। मई के शुरू में ही जांच मशीन में रीजेंट (जांच केमिकल्स) खत्म हो गया। पांच माह बाद रीजेंट आया, तो जांच मशीन ख़राब बताई जा रही है। वहीं ब्लड शुगर, एलपीटी, केपीटी, यूरिक एसिड जांच के लिए उपलब्ध
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सेमीआटोलाइजर जांच मशीन साल भर बाद क्रियाशील हुई तो मशीन सही जांच रीडिंग नही बता पा रही है। छह माह से पैथालोजी लैब में खून जांच नही हो पा रही है। मरीज मोहम्मद वसीम खान, अबूजर चौधरी, आजम चौधरी, प्रदीप कुमार, विष्णु कुमार आदि ने बताया कि पैथालॉजी लैब बेकार साबित हो रहा है। जांच के लिए सीएचसी में मशीन खराब कहकर वापस लौटा दिया जा रहा है। मरीजों को खून जांच के लिए बाहर पैथालॉजी में जाना पड़ता है।। जिससे जेब ढीली करनी पड़ती है। गरीब मरीज बाहर निजी लैब में जांच कराने में सक्षम नहीं है। वहीं प्राइवेट लैब वाले मनमानी रकम वसूलते हैं।
सीबीसी मशीन खराब है। मशीन को ठीक करने के इंजीनियर को अस्पताल कर्मचारियों के जरिए रोज फोन किया जा रहा है, लेकिन इंजीनियर नही आ रहे हैं। इंजीनियर बुधवार को आने को बोले हैं, फिर नही आए तो सीएमओ को पत्र इंनीनियर की कार्यशैली बताई जाएगी।
-डाॅक्टर सुरेश चंद्र, अधीक्षक, सीएचसी सेमरियावां
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- पांच माह से सीबीसी रीजेंट नहीं, तो एक माह से मशीन खराब बताकर मरीजों को जांच के लिए बाहर भेजा जा रहा है
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। गांव-गांव स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा तो जरूर किया जा रहा है, लेकिन बदहाल अस्पतालों में न तो मरीजों को सही इलाज मिलता है और न ही अस्पतालों में जरूरी जांच सुविधाएं ही हैं। सीएचसी सेमरियावां में पैथोलॉजी जांच की सुविधा लड़खड़ा गई है। पैथलॉजी लैब सेंटर मरीजों को जांच सुविधाएं देने में नाकाम साबित हो रहा है।
30 शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां पर इलाज के लिए जनपद के सेमरियावां ब्लॉक के साथ ही आंशिक रूप से बघौली, बेलहर कला, सांथा, बस्ती जनपद के साऊंघाट, रुधौली ब्लाॅक के
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गांवों के लोग आते हैं। इस हॉस्पिटल पर पांच लाख से अधिक जनसंख्या इलाज के लिए आश्रित है। प्रतिदिन 500-600 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस समय मौसम बदलाव से जुकाम बुखार व वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इलाज के लिए डाक्टरों के जरिए मरीजों को सीबीसी (कंप्लीट खून गणना) जांच कराने की सलाह देते हैं। सीएचसी सेमरियावां में छह माह से सीबीसी (कंप्लीट खून गणना) जांच नही हो रही है। मई के शुरू में ही जांच मशीन में रीजेंट (जांच केमिकल्स) खत्म हो गया। पांच माह बाद रीजेंट आया, तो जांच मशीन ख़राब बताई जा रही है। वहीं ब्लड शुगर, एलपीटी, केपीटी, यूरिक एसिड जांच के लिए उपलब्ध
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सेमीआटोलाइजर जांच मशीन साल भर बाद क्रियाशील हुई तो मशीन सही जांच रीडिंग नही बता पा रही है। छह माह से पैथालोजी लैब में खून जांच नही हो पा रही है। मरीज मोहम्मद वसीम खान, अबूजर चौधरी, आजम चौधरी, प्रदीप कुमार, विष्णु कुमार आदि ने बताया कि पैथालॉजी लैब बेकार साबित हो रहा है। जांच के लिए सीएचसी में मशीन खराब कहकर वापस लौटा दिया जा रहा है। मरीजों को खून जांच के लिए बाहर पैथालॉजी में जाना पड़ता है।। जिससे जेब ढीली करनी पड़ती है। गरीब मरीज बाहर निजी लैब में जांच कराने में सक्षम नहीं है। वहीं प्राइवेट लैब वाले मनमानी रकम वसूलते हैं।
सीबीसी मशीन खराब है। मशीन को ठीक करने के इंजीनियर को अस्पताल कर्मचारियों के जरिए रोज फोन किया जा रहा है, लेकिन इंजीनियर नही आ रहे हैं। इंजीनियर बुधवार को आने को बोले हैं, फिर नही आए तो सीएमओ को पत्र इंनीनियर की कार्यशैली बताई जाएगी।
-डाॅक्टर सुरेश चंद्र, अधीक्षक, सीएचसी सेमरियावां