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Sant Kabir Nagar News: दीवानी न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत 13 को
Sat, 29 Nov 2025 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 29 Nov 2025 11:48 PM IST
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संतकबीरनगर। दीवानी न्यायालय परिसर में 13 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। जिला जज मोहन लाल विश्वकर्मा ने बताया कि लोक अदालत में किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराया जा सकता है। पक्षकार स्वयं उपस्थित होकर प्रार्थना पत्र दे सकता है। इसमें सुलह योग्य फौजदारी मामले, दीवानी व भरण पोषण वाद निस्तारित किए जाएंगे।
जिला जज ने बताया कि मोटर अधिनियम वाद, स्टांप वाद/पंजीयन वाद, चकबंदी वाद, श्रम वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद और उपभोक्ता फोरम वाद भी लोक अदालत में निस्तारित किए जा सकेंगे। किराएदारी वाद, चेक बाउंस से संबंधित मामले, बैंक लोन, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र से संबंधित मामले, कराधान प्रकरण, बिजली चोरी से संबंधित शमनीय वाद निस्तारित कराए जा सकते है।
उन्होंने बताया कि वन अधिनियम के मामले, पुलिस अधिनियम के अंतर्गत शमनीय वाद, स्थायी लोक अदालत के मामले, गृह कर, जल कर, बाट माप अधिनियम के मामले, नगर पालिका-नगर निगम संबंधी मामले एवं स्थानीय विधियों के अंतर्गत सुलह योग्य वाद निस्तारित कराए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त वैवाहिक एवं पारिवारिक मामलों का भी निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर किया जा सकता है। जिला जज ने बताया कि ऐसे पारिवारिक मामले, जो किसी न्यायालय में लंबित नहीं हैं, वे प्री-लिटिगेशन स्तर पर पक्षकार प्रार्थना पत्र देकर सुलह समझौते के माध्यम से निस्तारित करा सकता है। इसका आदेश सिविल न्यायालय की डिक्री के समान होगा। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क किया जा सकता है।
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जिला जज ने बताया कि मोटर अधिनियम वाद, स्टांप वाद/पंजीयन वाद, चकबंदी वाद, श्रम वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद और उपभोक्ता फोरम वाद भी लोक अदालत में निस्तारित किए जा सकेंगे। किराएदारी वाद, चेक बाउंस से संबंधित मामले, बैंक लोन, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र से संबंधित मामले, कराधान प्रकरण, बिजली चोरी से संबंधित शमनीय वाद निस्तारित कराए जा सकते है।
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उन्होंने बताया कि वन अधिनियम के मामले, पुलिस अधिनियम के अंतर्गत शमनीय वाद, स्थायी लोक अदालत के मामले, गृह कर, जल कर, बाट माप अधिनियम के मामले, नगर पालिका-नगर निगम संबंधी मामले एवं स्थानीय विधियों के अंतर्गत सुलह योग्य वाद निस्तारित कराए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त वैवाहिक एवं पारिवारिक मामलों का भी निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर किया जा सकता है। जिला जज ने बताया कि ऐसे पारिवारिक मामले, जो किसी न्यायालय में लंबित नहीं हैं, वे प्री-लिटिगेशन स्तर पर पक्षकार प्रार्थना पत्र देकर सुलह समझौते के माध्यम से निस्तारित करा सकता है। इसका आदेश सिविल न्यायालय की डिक्री के समान होगा। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क किया जा सकता है।
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