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आपूर्ति विभाग में जारी है नाम काटने और जोडने का खेल
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आपूर्ति विभाग में जारी है नाम काटने और जोड़ने का खेल
- बिना ग्राम प्रधान के प्रस्ताव के ही काट दिए जा रहे पात्रों के नाम
- राशन कार्ड कटने से बढ़ रही गांवों में तल्खी, गरमा रही राजनीति
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। सरकार द्वारा गरीबों को सस्ते दर पर खाद्यान उपलब्ध करने के लिए योजनाएं चलाई गई हैं। इसके लिए सरकारी दुकानों के माध्यम से कार्ड धारकों को सस्ते दर पर गेहूं और चावल भी मुहैया कराने की योजना संचालित है। लेकिन तीनों तहसीलों में आपूर्ति विभाग के जिम्मेदार के नाक के नीचे ही पात्रों के नाम काटने और अपात्रों के नाम जोड़ने का खेल जारी है। आलम यह है कि बिना ग्राम प्रधान के प्रस्ताव के ही नाम काट दिए जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला सोमवार को जिला आपूर्ति कार्यालय पर आया।
जिले के बखिरा कस्बे के जगदंबा पुत्र शिवशंकर ठेला चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। वर्ष 2007 में अंत्योदय कार्ड बना हुआ था। अचानक दिसंबर से उन्हें खाद्यान मिलना बंद हो गया। उनके द्वारा स्थानीय स्तर पर पता किया गया तो कुछ भी जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद पीड़ित ने ग्राम प्रधान का दरवाजा खटखटाया। ग्राम प्रधान सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित आपूर्ति कार्यालय में पहुंचकर इसकी जानकारी ली। ग्राम प्रधान ने जिला आपूर्ति अधिकारी को बताया कि जगदंबा बेहद गरीब है और इसके नाम को काटने या किसी अन्य के नाम को जोड़ने के संबंध में कोई प्रस्ताव ग्राम पंचायत स्तर से नहीं आया है। इसके बाद जब जिम्मेदारों ने इस बात की जानकारी अपने कार्यालय से लेनी चाही तो इसकी जानकारी भी नहीं मिल सकी। इसके अलावा धनघटा तहसील क्षेत्र के बसवारीगांव, तामा, बहराडाड़ी, पौली, शिवापार, नाथनगर के अलावा करीब तीन दर्जन गांव के लोग इस मामले से पीड़ित हैं। लाभार्थी को पता ही नहीं और उसका नाम सूची से काट दिया जा रहा है। क्षेत्र के राम हरख, दीनानाथ, दयाराम, ममता देवी, पार्वती देवी आदि का कहना है कि तहसील पर बैठकर कर्मचारियों द्वारा किसी का भी नाम काट दिया जा रहा है। राशनकार्ड धारकों का नाम कटने या नए नाम जुड़ने को लेकर गांव में माहौल गरमा रहा है। कई जगह लोग प्रधानों पर वोट की राजनीति का आरोप लगाते हुए नाम काटने या जोड़ने की तोहमत मढ़ रहे हैं। इस तरह के मामले तहसील दिवसों में भी खूब पहुंच रहे हैं।
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डीएम भी जता चुके हैं नाराजगी
राशनकार्ड धारकों का नाम काटने या जोड़ने का यह मामला कई महीने से चल रहा है। तहसील दिवसों में अक्सर इस तरह की शिकायतें आती रहती हैं। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद हुई विभागीय समीक्षा में डीएम ने इस पर नाराजगी जताई थी। इसके अलावा जिन 40 हजार कार्ड धारकों के नाम में त्रुटि थी उसे भी अतिशीघ्र ठीक कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद शिकायतें खत्म नहीं हो रही हैं।
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ग्राम पंचायत व ब्लॉक के प्रस्ताव पर होती है कार्रवाई
जिलापूर्ति अधिकारी शशिकांत का कहना है कि राशनकार्ड सूची से नाम काटने या जोड़ने का कार्य सीधे उनके कार्यालय से नहीं होता है। ग्राम पंचायत स्तर से प्रस्ताव ब्लॉक को जाता है और वहां से प्रमाणित होकर उनके कार्यालय पहुंचता है। इस प्रक्रिया के तहत आए नाम ही काटे या जोड़े जाते हैं। बखिरा ग्राम पंचायत के जिस लाभार्थी का नाम कटा है उसकी जांच कराई जा रही है। अगर उनके दफ्तर का कोई कर्मचारी दोषी पाया गया तो कार्रवाई होगी।
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- बिना ग्राम प्रधान के प्रस्ताव के ही काट दिए जा रहे पात्रों के नाम
- राशन कार्ड कटने से बढ़ रही गांवों में तल्खी, गरमा रही राजनीति
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। सरकार द्वारा गरीबों को सस्ते दर पर खाद्यान उपलब्ध करने के लिए योजनाएं चलाई गई हैं। इसके लिए सरकारी दुकानों के माध्यम से कार्ड धारकों को सस्ते दर पर गेहूं और चावल भी मुहैया कराने की योजना संचालित है। लेकिन तीनों तहसीलों में आपूर्ति विभाग के जिम्मेदार के नाक के नीचे ही पात्रों के नाम काटने और अपात्रों के नाम जोड़ने का खेल जारी है। आलम यह है कि बिना ग्राम प्रधान के प्रस्ताव के ही नाम काट दिए जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला सोमवार को जिला आपूर्ति कार्यालय पर आया।
जिले के बखिरा कस्बे के जगदंबा पुत्र शिवशंकर ठेला चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। वर्ष 2007 में अंत्योदय कार्ड बना हुआ था। अचानक दिसंबर से उन्हें खाद्यान मिलना बंद हो गया। उनके द्वारा स्थानीय स्तर पर पता किया गया तो कुछ भी जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद पीड़ित ने ग्राम प्रधान का दरवाजा खटखटाया। ग्राम प्रधान सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित आपूर्ति कार्यालय में पहुंचकर इसकी जानकारी ली। ग्राम प्रधान ने जिला आपूर्ति अधिकारी को बताया कि जगदंबा बेहद गरीब है और इसके नाम को काटने या किसी अन्य के नाम को जोड़ने के संबंध में कोई प्रस्ताव ग्राम पंचायत स्तर से नहीं आया है। इसके बाद जब जिम्मेदारों ने इस बात की जानकारी अपने कार्यालय से लेनी चाही तो इसकी जानकारी भी नहीं मिल सकी। इसके अलावा धनघटा तहसील क्षेत्र के बसवारीगांव, तामा, बहराडाड़ी, पौली, शिवापार, नाथनगर के अलावा करीब तीन दर्जन गांव के लोग इस मामले से पीड़ित हैं। लाभार्थी को पता ही नहीं और उसका नाम सूची से काट दिया जा रहा है। क्षेत्र के राम हरख, दीनानाथ, दयाराम, ममता देवी, पार्वती देवी आदि का कहना है कि तहसील पर बैठकर कर्मचारियों द्वारा किसी का भी नाम काट दिया जा रहा है। राशनकार्ड धारकों का नाम कटने या नए नाम जुड़ने को लेकर गांव में माहौल गरमा रहा है। कई जगह लोग प्रधानों पर वोट की राजनीति का आरोप लगाते हुए नाम काटने या जोड़ने की तोहमत मढ़ रहे हैं। इस तरह के मामले तहसील दिवसों में भी खूब पहुंच रहे हैं।
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डीएम भी जता चुके हैं नाराजगी
राशनकार्ड धारकों का नाम काटने या जोड़ने का यह मामला कई महीने से चल रहा है। तहसील दिवसों में अक्सर इस तरह की शिकायतें आती रहती हैं। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद हुई विभागीय समीक्षा में डीएम ने इस पर नाराजगी जताई थी। इसके अलावा जिन 40 हजार कार्ड धारकों के नाम में त्रुटि थी उसे भी अतिशीघ्र ठीक कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद शिकायतें खत्म नहीं हो रही हैं।
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ग्राम पंचायत व ब्लॉक के प्रस्ताव पर होती है कार्रवाई
जिलापूर्ति अधिकारी शशिकांत का कहना है कि राशनकार्ड सूची से नाम काटने या जोड़ने का कार्य सीधे उनके कार्यालय से नहीं होता है। ग्राम पंचायत स्तर से प्रस्ताव ब्लॉक को जाता है और वहां से प्रमाणित होकर उनके कार्यालय पहुंचता है। इस प्रक्रिया के तहत आए नाम ही काटे या जोड़े जाते हैं। बखिरा ग्राम पंचायत के जिस लाभार्थी का नाम कटा है उसकी जांच कराई जा रही है। अगर उनके दफ्तर का कोई कर्मचारी दोषी पाया गया तो कार्रवाई होगी।