{"_id":"69fe1e1a79c4aebe6609c603","slug":"monkeys-create-panic-in-santha-villagers-upset-khalilabad-news-c-209-1-kld1026-150235-2026-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: सांथा में बंदरों का आतंक, ग्रामीण परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: सांथा में बंदरों का आतंक, ग्रामीण परेशान
विज्ञापन
सांथा में छत पर घूमते बंदर। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सांथा। विकासखंड क्षेत्र के कई गांवों में बंदरों का आतंक है। घरों की छतों पर दौड़ रहे बंदर किसी पर भी हमला कर देते हैं। लोग बंदरों से परेशान हो रहे हैं। एक बंदर मासूम को काटकर घायल भी कर चुका है। इन्हें पकड़ने के लिए पैसा भी खर्च हुआ, लेकिन बंदरों का आतंक कम नहीं हुआ। बंदरों के नाम पर फर्म ने पैसा ले लिया था। डीपीआरओ की जांच में इसकी पुष्टि हुई थी।
विकासखंड में बंदरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र के सांथा, धोबहा, गंनवरिया गांवों में बंदरों का आतंक है। बंदरों को पकड़ने के लिए विकासखंड के ग्राम पंचायत धोबहा में 60 हजार रुपये 19 जून 2025 को जारी हुआ। उसके बाद एक-दो बंदरों को पकड़कर विभाग और फर्म ने भुगतान ले लिया।
इसके बाद डीपीआरओ मनोज कुमार यादव ने मौके पर जांच की थी। इसमें अनियमितता मिली थी, लेकिन उसके बाद मामला डंडे बस्ते में चला गया। बंदरों ने फिर आतंक मचाना शुरू कर दिया है। ग्रामीण गोपाल मध्देशिया ने कहा कि अगर पिछली बार बंदरों को पकड़कर जंगल में ले जाकर छोड़ा गया होता तो आज यह हालत नहीं बनती।
विज्ञापन
अजय कुमार ने कहा कि सरकार बंदरों को पकड़वाने के लिए ग्राम पंचायत को बजट तो दे रही, लेकिन इसका बंदरबांट हो रहा।
-- -- -
बंदरों को पकड़ने के लिए गणेशा फर्म ने अपने फर्म पर भुगतान लिया था, यह गंभीर मामला है। एडीओ पंचायत से बात कर अभियान चलाकर बंदरों को पकड़वाया जाएगा।
-मनोज कुमार यादव, डीपीआरओ
विज्ञापन
विकासखंड में बंदरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र के सांथा, धोबहा, गंनवरिया गांवों में बंदरों का आतंक है। बंदरों को पकड़ने के लिए विकासखंड के ग्राम पंचायत धोबहा में 60 हजार रुपये 19 जून 2025 को जारी हुआ। उसके बाद एक-दो बंदरों को पकड़कर विभाग और फर्म ने भुगतान ले लिया।
विज्ञापन
इसके बाद डीपीआरओ मनोज कुमार यादव ने मौके पर जांच की थी। इसमें अनियमितता मिली थी, लेकिन उसके बाद मामला डंडे बस्ते में चला गया। बंदरों ने फिर आतंक मचाना शुरू कर दिया है। ग्रामीण गोपाल मध्देशिया ने कहा कि अगर पिछली बार बंदरों को पकड़कर जंगल में ले जाकर छोड़ा गया होता तो आज यह हालत नहीं बनती।
विज्ञापन
अजय कुमार ने कहा कि सरकार बंदरों को पकड़वाने के लिए ग्राम पंचायत को बजट तो दे रही, लेकिन इसका बंदरबांट हो रहा।
बंदरों को पकड़ने के लिए गणेशा फर्म ने अपने फर्म पर भुगतान लिया था, यह गंभीर मामला है। एडीओ पंचायत से बात कर अभियान चलाकर बंदरों को पकड़वाया जाएगा।
-मनोज कुमार यादव, डीपीआरओ