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बिना काम के खाते में पहुंची मनरेगा मजदूरी
अमर उजाला ब्यूरो/ संतकबीरनगर
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:27 PM IST
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ब्लॉक कोआर्डिनेटर नीलम शर्मा ने बताया कि उनके नेतृत्व में छह सदस्यी सोशल आडिट टीम पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गुरुवार को ब्लॉक क्षेत्र के पिड़ारी पूर्वी ग्राम पंचायत में पहुंचकर सोशल ऑडिट किया।
आडिट के दौरान ग्राम पंचायत सचिव और पूर्व प्रधान उपस्थित नही हुए तथा बर्तमान ग्राम प्रधान रामपाल कुछ समय के लिए आकर चले गए। अभिलेख भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।
ब्लॉक से मिले अभिलेख से वह जांच कार्य शुरू की तो वर्ष 2014-15 में दो परियोजनाओं पर कार्य होने की ग्रामीणों ने पुष्टि किया।
कोआर्डिनेटर और आडिट टीम के बालेंदु यादव, सुधीर दूबे, रीना, धनश्याम आदि ने बताया कि मजदूरों से मजदूरी के बारे में पूछ ताछ करने तथा मास्टररोल संख्या 10761 से मिलान करने पर गांव के जॉबकार्ड धारक देवेंद्र कुमार को छह दिन की मजदूरी 852 रुपये तथा मास्टरोल संख्या 10764 में 11 दिन की मजदूरी 1562 का भुगतान उनके खाता संख्या 31660915267 में फरेंदिया नहर से रामदास के खेत तक सम्पर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य करने का दिया गया है।
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जानकारी लेने पर जाब कार्ड धारक देवेन्द्र की पत्नी नीतू ने बताया कि वह या उनके परिवार का कोई सदस्य काम पर नहीं जाता है। ग्राम प्रधान खाते में पैसा भेजवा देते है तथा खाते से पैसा निकाल कर देने पर ग्राम प्रधान उन्हें कमीशन के रूप में 300 रुपये दिया है।
कोआर्डिनेटर और उनकी टीम के सदस्यों ने आगे बताया कि बर्ष 2014-15 में आठ अनुसूचित जाति के लोगों को इंदिरा आवास दिया गया है। इंदिरा आवास की स्थलीय जांच किया गया तो सभी आवास अधूरे मिले।
पुछने पर इंदिरा आवास के लाभार्थी रामललित पुत्र गनपत और लालमती पत्नी रामगरीब ने बताया कि आवास की दोनों किस्त उन्हें मिल चुकी है, लेकिन आवास का पैसा आने पर ग्राम प्रधान रामपाल के जरिए दोनों लाभार्थियों से 17-17 हजार रूपये ले लिया गया।
ऐसे में आवास निर्माण कैसे हो? लाभार्थी रामदरश पुत्र हरिवंश और जगदीश पुत्र केदार ने बताया कि उन्हें प्रथम किस्त के रूप में 35 हजार रूपये मिला था। जिसमें से गांव के ही दिनेश नाम के व्यक्ति के जरिए बीस- बीस हजार रूपये ले लिया गया है।
कुछ इसी तरह की बात जासमती पत्नी बहादुर ने बताया कि उनसे भी 15 हजार रुपये ले लिया गया है। कोआर्डिनेटर ने बताया कि जांच रिपोर्ट को उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
फिलहाल यह स्थित मात्र एक गांव की नहीं है। अगर गहनता से जांच किया जाए तो बड़े पैमाने पर इस तरह की बात का खुलासा हो सकता है।
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आडिट के दौरान ग्राम पंचायत सचिव और पूर्व प्रधान उपस्थित नही हुए तथा बर्तमान ग्राम प्रधान रामपाल कुछ समय के लिए आकर चले गए। अभिलेख भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।
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ब्लॉक से मिले अभिलेख से वह जांच कार्य शुरू की तो वर्ष 2014-15 में दो परियोजनाओं पर कार्य होने की ग्रामीणों ने पुष्टि किया।
कोआर्डिनेटर और आडिट टीम के बालेंदु यादव, सुधीर दूबे, रीना, धनश्याम आदि ने बताया कि मजदूरों से मजदूरी के बारे में पूछ ताछ करने तथा मास्टररोल संख्या 10761 से मिलान करने पर गांव के जॉबकार्ड धारक देवेंद्र कुमार को छह दिन की मजदूरी 852 रुपये तथा मास्टरोल संख्या 10764 में 11 दिन की मजदूरी 1562 का भुगतान उनके खाता संख्या 31660915267 में फरेंदिया नहर से रामदास के खेत तक सम्पर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य करने का दिया गया है।
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जानकारी लेने पर जाब कार्ड धारक देवेन्द्र की पत्नी नीतू ने बताया कि वह या उनके परिवार का कोई सदस्य काम पर नहीं जाता है। ग्राम प्रधान खाते में पैसा भेजवा देते है तथा खाते से पैसा निकाल कर देने पर ग्राम प्रधान उन्हें कमीशन के रूप में 300 रुपये दिया है।
कोआर्डिनेटर और उनकी टीम के सदस्यों ने आगे बताया कि बर्ष 2014-15 में आठ अनुसूचित जाति के लोगों को इंदिरा आवास दिया गया है। इंदिरा आवास की स्थलीय जांच किया गया तो सभी आवास अधूरे मिले।
पुछने पर इंदिरा आवास के लाभार्थी रामललित पुत्र गनपत और लालमती पत्नी रामगरीब ने बताया कि आवास की दोनों किस्त उन्हें मिल चुकी है, लेकिन आवास का पैसा आने पर ग्राम प्रधान रामपाल के जरिए दोनों लाभार्थियों से 17-17 हजार रूपये ले लिया गया।
ऐसे में आवास निर्माण कैसे हो? लाभार्थी रामदरश पुत्र हरिवंश और जगदीश पुत्र केदार ने बताया कि उन्हें प्रथम किस्त के रूप में 35 हजार रूपये मिला था। जिसमें से गांव के ही दिनेश नाम के व्यक्ति के जरिए बीस- बीस हजार रूपये ले लिया गया है।
कुछ इसी तरह की बात जासमती पत्नी बहादुर ने बताया कि उनसे भी 15 हजार रुपये ले लिया गया है। कोआर्डिनेटर ने बताया कि जांच रिपोर्ट को उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
फिलहाल यह स्थित मात्र एक गांव की नहीं है। अगर गहनता से जांच किया जाए तो बड़े पैमाने पर इस तरह की बात का खुलासा हो सकता है।