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मेंहदावल को पालिका का दर्जा मिले
Sant Kabir Nagar
Updated Tue, 04 Oct 2016 11:49 PM IST
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तहसील गेट पर संतकबीर विकास मंच ने सांकेतिक धरना दिया।
- फोटो : अमर उजाला
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नगर पंचायत मेंहदावल को नगरपालिका का दर्जा देने और विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के खात्मे की मांग को लेकर संतकबीर विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। तहसील गेट पर आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भी भागीदारी की।
मंच के संयोजक दारा सिंह ने कहा कि 138 वर्ष पुरानी नगर पंचायत मेंहदावल राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है। इसके बाद की नगर पंचायत गोरखपुर आज नगर निगम का रूप ले चुकी है। जनप्रतिनिधियों की निरंकुशता व प्रशासन की उदासीनता के कारण क्षेत्रीय लोग सड़क पर उतरने को बाध्य हैं। नगर पंचायत के विकास के लिए लगभग अब तक 40 करोड़ रुपये आ चुका है, पर विकास कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
इससे पहले हस्ताक्षर अभियान में 25 हजार नगरवासियों ने योगदान दिया था और आज अनशन में भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। इस आंदोलन के बाद भी नगर पालिका बनाने की कवायद नही शुरू हुई तो अगले चरण में आमरण अनशन किया जाएगा। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित तीन सूत्रीय मांग पत्र उपजिलाधिकारी रामजीवन को दिया गया। जिसमें मेंहदावल को नगरपालिका घोषित करने, नगर पंचायत द्वारा चार वर्षों में कराए गए विकास कार्यों की टीएसी जांच, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से तहसील गेट तक बन रहे सड़क को नगर पंचायत की जगह लोक निर्माण विभाग द्वारा कराने की मांग शामिल है।
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अध्यक्षता पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रामनयन निषाद व संचालन पंडित रविशंकर मिश्र ने की। इस दौरान भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष अजीत सिंह, पूर्व नगर अध्यक्ष अरुण सिंह, एडवोकेट अजय शाही, छात्र नेता राजेश तिवारी, मोनू पांडेय, इमान करीम अंसारी, प्रमुख प्रतिनिधि फूलचन्द्र चौधरी, शिवमूरत तिवारी, अबरार अहमद, योगेन्द्र सिंह, मो. आरिफ अंसारी, सभासद पूरन सिंह, देवराज सिंह, अमरेन्द्र सिंह टिन्कू, मनीष सिंह मन्नू, आलोक सिंह, विनोद सिंह, शिवापति त्रिपाठी, शिवनाथ अग्रहरी, नरेन्द्र कुमार अरोरा, मनीष गुप्ता आदि मौजूद रहे ।
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मंच के संयोजक दारा सिंह ने कहा कि 138 वर्ष पुरानी नगर पंचायत मेंहदावल राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है। इसके बाद की नगर पंचायत गोरखपुर आज नगर निगम का रूप ले चुकी है। जनप्रतिनिधियों की निरंकुशता व प्रशासन की उदासीनता के कारण क्षेत्रीय लोग सड़क पर उतरने को बाध्य हैं। नगर पंचायत के विकास के लिए लगभग अब तक 40 करोड़ रुपये आ चुका है, पर विकास कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
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इससे पहले हस्ताक्षर अभियान में 25 हजार नगरवासियों ने योगदान दिया था और आज अनशन में भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। इस आंदोलन के बाद भी नगर पालिका बनाने की कवायद नही शुरू हुई तो अगले चरण में आमरण अनशन किया जाएगा। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित तीन सूत्रीय मांग पत्र उपजिलाधिकारी रामजीवन को दिया गया। जिसमें मेंहदावल को नगरपालिका घोषित करने, नगर पंचायत द्वारा चार वर्षों में कराए गए विकास कार्यों की टीएसी जांच, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से तहसील गेट तक बन रहे सड़क को नगर पंचायत की जगह लोक निर्माण विभाग द्वारा कराने की मांग शामिल है।
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अध्यक्षता पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रामनयन निषाद व संचालन पंडित रविशंकर मिश्र ने की। इस दौरान भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष अजीत सिंह, पूर्व नगर अध्यक्ष अरुण सिंह, एडवोकेट अजय शाही, छात्र नेता राजेश तिवारी, मोनू पांडेय, इमान करीम अंसारी, प्रमुख प्रतिनिधि फूलचन्द्र चौधरी, शिवमूरत तिवारी, अबरार अहमद, योगेन्द्र सिंह, मो. आरिफ अंसारी, सभासद पूरन सिंह, देवराज सिंह, अमरेन्द्र सिंह टिन्कू, मनीष सिंह मन्नू, आलोक सिंह, विनोद सिंह, शिवापति त्रिपाठी, शिवनाथ अग्रहरी, नरेन्द्र कुमार अरोरा, मनीष गुप्ता आदि मौजूद रहे ।