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Sant Kabir Nagar News: मेडिकल काॅलेज बना न ही ट्राॅमा सेंटर, रेफर हो रहे गंभीर मरीज
Wed, 16 Apr 2025 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 16 Apr 2025 11:33 PM IST
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जिला अस्पताल यहीं बनना था मेडिकल कॉलेज
संतकबीरनगर। जिले में मेडिकल काॅलेज व ट्राॅमा सेंटर बनाने की घोषणा वर्ष 2021 में ही हुई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्य नहीं शुरू नहीं हुआ है। प्रशासन ने इसके लिए जिला अस्पताल परिसर का प्रस्ताव दिया है।
यहां ओपीडी होगी, जबकि क्लास और हॉस्टल के लिए जंगल ऊन में जमीन चिह्नित की गई है, लेकिन शासन से स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए गोरखपुर या लखनऊ जाना मजबूरी है। वर्ष 2021 जिले में दौर पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए मेडिकल कॉलेज लिए जमीन की तलाश शुरू की।
करीब दो साल तक जमीन की तलाश होती रही। इस दौरान कभी मगहर सूत मिल काे चिह्नित किया गया, तो कभी बनकटवा के पास जमीन देखी गई, लेकिन बात नहीं बन सकी। इसके बाद से प्रशासन ने जिला अस्पताल को ही मेडिकल कॉलेज के रूप में परिवर्तित करने की योजना तैयार की।
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इसके साथ ही जंगलऊन में करीब 12 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जहां एकेडमिक भवन, हॉस्टल और आवासीय परिसर बनाए बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया, लेकिन अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में जिले के दूर दराज से आने वाले गंभीर मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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यहां ओपीडी होगी, जबकि क्लास और हॉस्टल के लिए जंगल ऊन में जमीन चिह्नित की गई है, लेकिन शासन से स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए गोरखपुर या लखनऊ जाना मजबूरी है। वर्ष 2021 जिले में दौर पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए मेडिकल कॉलेज लिए जमीन की तलाश शुरू की।
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करीब दो साल तक जमीन की तलाश होती रही। इस दौरान कभी मगहर सूत मिल काे चिह्नित किया गया, तो कभी बनकटवा के पास जमीन देखी गई, लेकिन बात नहीं बन सकी। इसके बाद से प्रशासन ने जिला अस्पताल को ही मेडिकल कॉलेज के रूप में परिवर्तित करने की योजना तैयार की।
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इसके साथ ही जंगलऊन में करीब 12 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जहां एकेडमिक भवन, हॉस्टल और आवासीय परिसर बनाए बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया, लेकिन अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में जिले के दूर दराज से आने वाले गंभीर मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।