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Sant Kabir Nagar News: इलाज के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिखा सकीं मौलाना की पत्नी

Thu, 22 May 2025 10:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Thu, 22 May 2025 10:53 PM IST
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Maulana's wife could not show any documents for treatment
संतकबीरनगर। दोहरी नागरिकता हासिल करके ब्रिटेन में रहने वाले चरमपंथी मौलाना शमसुल होदा की पत्नी के ऊपर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। इसके बावजूद वह अर्थराइटिस के इलाज के लिए लंदन जाना चाहती थीं।
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जब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अनुमति नहीं दी तो उन्होंने पुनरीक्षण के लिए सत्र न्यायाधीश के यहां वाद दाखिल किया। सत्र न्यायाधीश ने भी इस पुनरीक्षण याचिका को निरस्त कर दिया। आरोपी की पत्नी चिकित्सक का कोई पर्चा या लंदन जाकर इलाज कराने के लिए कोई ठोस दस्तावेज नहीं दिखा सकीं। दुधारा थानाक्षेत्र के देवरिया लाल निवासी मौलाना शमसुल होदा ने 2013 में इंग्लैंड की नागरिकता हासिल कर ली। वहां की नागरिकता के साथ वह आजमगढ़ के एक मदरसे में बतौर सरकारी शिक्षक के रूप में नौकरी करते रहे और सैलरी लेते रहे। साल 2017 में उन्होंने वीआरएस ले लिया और पेंशन भी लेने लगे। कूटरचित दस्तावेज से जमीन खरीदने और चरमपंथी संगठन से जुड़ा मामला सामने आने के बाद उनकी पेंशन बंद कर केस दर्ज किया गया। उनकी संपत्ति को भी सरकारी संपत्ति बताकर सील कर दिया गया।
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इस मामले के बाद आरोपी की पत्नी सकलैन खातून ने अर्थराइटिस की बीमारी का हवाला देते हुए लंदन जाने की अनुमति मांगी थी। पांच फरवरी 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसे खारिज कर दिया। अनुमति खारिज होने के बाद उन्होंने सत्र न्यायाधीश के यहां पुनरीक्षण याचिका लगाई।
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सत्र न्यायाधीश महेंद्र प्रसाद चौधरी ने उनके खिलाफ केस दर्ज होना पाया। साथ ही अबरार अहमद नाम के एक व्यक्ति की ओर से जारी ऑस्टियो अर्थराइटिस से पीड़ित होने का प्रमाण पत्र में न तो चिकित्सक की कोई डिग्री मिली और न ही कोई पर्चा या परामर्श पत्र मिला। इसके बाद उन्होंने विचारण में यह पाया कि मुकदमे से बचने के लिए तथा विदेश जाकर वापस न आने के लिए ही स्वीकृति चाहती हैं।
मौलाना शमसुल होदा की जब्त हो चुकी हैं सारी संपत्तियां : मौलाना शमसुल होदा खान ने 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बाद शहर के रजानगर मीट मंडी के पास कई जमीनें खरीदी थीं। वर्ष 2014 में एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के नाम से 640 वर्गमीटर भूमि का बैनामा भी कराया था।

मौलाना पर आरोप है कि वर्ष 2017 में 189.75 वर्गमीटर, 2018 में अलग-अलग 192.84 वर्गमीटर व 208.27 वर्ग मीटर जमीन अपनी असली पहचान छिपाकर रजिस्ट्री कराई थी। सहसरांव गांव निवासी अब्दुल करीम खां के प्रत्यावेदन पर सुनवाई करते हुए डीएम कोर्ट ने 12 फरवरी को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद ऐसी सभी संपत्तियों से शमसुल व अन्य का नाम खारिज कर राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। डीएम कोर्ट के आदेश के बाद 29 मार्च 2024 को मोतीनगर मोहल्ले में पहुंचकर खाली जमीन पर सरकारी बोर्ड लगाकर कब्जे में लिया।
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