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महंगाई की मार: जेब पर भारी पड़ा सिलेंडर का खर्चा, लकड़ी पर खाना बनाना मजबूरी

Wed, 03 Aug 2022 10:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 03 Aug 2022 10:31 AM IST
सार

धनघटा क्षेत्र के गायघाट गांव निवासी प्रमिला और सुभावती बताती हैं कि वर्ष 2017-18 में जब गैस सिलेंडर और चूल्हा मिला था, उस समय रसोई गैस की कीमत 689 रुपये प्रति सिलेंडर था। उसके बाद रसोई गैस की कीमत बढ़ने लगी और 800 रुपये तक पहुंच गया। तभी से सिलेंडर में गैस भरवाना बंद कर दिया और लकड़ी तथा उपला से चूल्हे पर खाना पकाने लगीं।

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Cylinder cost heavy on pocket compulsion to cook food on wood
लकड़ी से चूल्हे पर खाना पकाती उज्ज्वला योजना की लाभार्थी।संवाद - फोटो : KHALILABAD

विस्तार

रसोई गैस सिलेंडर के दामों की महंगाई से उज्ज्वला योजना की लाभार्थियों के घरों के गैंस चूल्हे बुझ गए हैं। महिलाएं लकड़ी और उपले से मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना रही हैं। खाना बनाने में आसानी और धुएं से बचाव का सपना संजोए महिलाओं के अरमान बिखर गए हैं। लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि महंगाई से गैंस सिलेंडर भरवा पाना उनकी हैसियत में नहीं है।    
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वर्ष 2014 में शासन ने उज्ज्वला योजना की शुरुआत की। इसमें गरीब महिलाओं को निशुल्क गैस सिलेंडर, चूल्हा, रेगुलेटर, पाइप आदि वितरित किया गया। शासन की मंशा थी कि गरीब परिवार की महिलाओं को भोजन पकाने में लकड़ी जुटाने से मुक्ति मिले, वहीं धुंधा से भी निजात मिले। जिला पूर्ति विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक 1,26,024 गरीब परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत निशुल्क गैंस सिलेंडर का वितरण किया गया है।
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धनघटा क्षेत्र के गायघाट गांव निवासी प्रमिला और सुभावती बताती हैं कि वर्ष 2017-18 में जब गैस सिलेंडर और चूल्हा मिला था, उस समय रसोई गैस की कीमत 689 रुपये प्रति सिलेंडर था। उसके बाद रसोई गैस की कीमत बढ़ने लगी और 800 रुपये तक पहुंच गया। तभी से सिलेंडर में गैस भरवाना बंद कर दिया और लकड़ी तथा उपला से चूल्हे पर खाना पकाने लगीं।
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रामपुर गांव की उज्ज्वला योजना की लाभार्थी शांति, कलावती, पूजा और आरती बताती हैं कि सरकार ने जब गैस सिलेंडर और चूल्हा दिया था तो लगा था कि अब कभी भी लकड़ी और उपला से खाना पकाने की नौबत नहीं आएगी। धुएं से छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन उम्मीद ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई। महंगाई की मार की वजह से दो साल से गैस सिलेंडर भराना बंद कर दिया। तभी से लकड़ी और उपला के सहारे चूल्हे पर खाना पका रही हूं।


जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने कहा कि धुएं से सांस संबंधी बीमारी होने का खतरा है। इससे खांसी आती है और आंख लाल हो जाती है। नाक से भी पानी गिरता है। लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने पर आंख संबंधी बीमारी होने की आशंका रहती है।
 
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