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27 एकड़ में फैला गांधी आश्रम बदहाल

Mon, 23 Aug 2021 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 11:24 PM IST
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maghar gandhi ashram in bad condition
मगहर में बदहाल पड़ा गाँधी आश्रम।संवाद - फोटो : KHALILABAD
27 एकड़ में फैला गांधी आश्रम बदहाल
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छपाई, रंगाई, कताई, पेराई आदि विभाग बंद होने से बेकार हो गए हुनरमंद हाथ
कभी 900 लोग करते थे काम, अब सिर्फ 28 कर्मचारी ही बचे
मगहर। खादी वस्त्र नहीं विचार है। यह वाक्य अक्सर कार्यक्रमों में सुनाई देता है। सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली के ठीक सामने 27 एकड़ में फैला क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम बदहाल स्थित में है। यह कभी गुलजार हुआ करता था, लेकिन उपेक्षा की वजह से यहां छपाई, रंगाई, कताई, पेराई आदि विभाग बंद होने से यह परिसर अब वीरान पड़ा हुआ है। कभी यहां 900 कर्मचारी काम करते थे, वर्तमान में 28 की ही संख्या बताई जा रही है। यदि सरकार इस ओर ध्यान दे तो यहां लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा।
मगहर कस्बा ही नहीं समूचा जिला बुनकर बहुल होने की वजह से यहां लोगों को गांधी के विचार के अलावा रोजगार के अवसर भी प्राप्त हों, इसके लिए वर्ष 1955 में क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम की स्थापना की गई। इस गांधी आश्रम में अकाउंट का कार्य देख रहे सुभाष चंद पांडेय बताते हैं कि वर्ष 1990 तक इस संस्था में 900 कर्मचारी कार्य करते थे। यह सेंटर यूपी का तीसरा क्षेत्रीय संचालन केंद्र हुआ करता था। काफी समय तक बहराइच, बस्ती, लखनऊ, गोंडा, गोरखपुर, देवरिया जिले के गांधी आश्रमों का संचालन यहां से हुआ करता था। गांधी आश्रम के कर्मचारी वीरेंद्र दूबे ने बताया कि यहां से सूत कातने वाली महिलाएं रूई ले जाकर घर से सूत कातकर ले आती थीं। जिन्हें आस-पास के बुनकर सूत ले जाकर कपड़ा बुनकर दे जाया करते थे। जिसकी यहां रंगाई व छपाई हुआ करती थी। यहां साबुन, अगरबत्ती भी बनता था। कोल्हू के द्वारा बैलों के माध्यम से शुद्ध सरसों का तेल पेरा जाता था, जो अब पूरी तरह बंद हो चुके हैं। वर्तमान में कार्यालय के माध्यम से परिसर में गिरे पेड़ों की लकड़ियों को चीरकर चौकी, स्टूल, मेज आदि को बनवाकर उसकी थोड़ी बहुत आमदनी से कुछ कर्मचरियों की आजीविका चल रही है। इसके बावजूद कामगार हाथ गांधी आश्रम स्थित विभिन्न विभाग के बंद होने से बेकार से हो गए हैं। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है। कर्मचारी दर-दर भटकने को विवश हैं। (संवाद)
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गांधी आश्रम के उत्पाद की बड़ी मांग थी
गांधी आश्रम के कर्मचारी भृगुनाथ मौर्य ने बताया कि आश्रम में कबीर ब्रांड का कपड़ा धोने का साबुन, अर्चना ब्रांड की अगरबत्ती, नीम सोप के नाम से नहाने वाला साबुन का उत्पाद होता था। इसके अलावा यहां के तौलिये की मांग पूरे भारत में थी। सिलाई इंचार्ज शंकर यादव ने बताया कि यहां सिलाई बंद होने से बहुत लोग बेरोजगार हो गए। कर्मचारी इंद्रेश कुमार ने बताया कि यहां के कपड़े अन्य उत्पाद कश्मीर भेजकर वहां से ऊनी कपड़ा आता था। यहां का कपड़ा पश्चिम बंगाल जाता था, जहां से सिल्क का कपड़ा आयात किया जाता था।
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पूरा परिसर कभी रहता था गुलजार
नगर के अलकेश गुप्त, अवधेश सिंह, त्रिलोकी वर्मा, अहमद आलम, सभासद सिबतैन मुस्तफा, मुजीबुल्लाह आदि का कहना है कि जब गांधी आश्रम चालू था तो चौबीस घंटे चहल-पहल व पूरा परिसर गुलजार हुआ करता था। यहां के बने उत्पाद को खरीदने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे, लेकिन आज यह गांधी आश्रम बंद व सुनसान पड़ा हुआ है। सरकार को इसकी सुध लेनी चाहिए।

मंत्री पद को लेकर गांधी आश्रम दो खेमों में बंटा
पूर्वांचल की कभी पहचान हुआ करता था मगहर का गांधी आश्रम। वर्तमान में बंद होने से यहां लोगों का आना-जाना ठप हो गया है। वहीं, मंत्री पद के दो लोगों के आपसी विवाद के कारण थोड़ा-बहुत जो विकास होना था, वह पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। एक खेमा जहां राम आशीष शर्मा को अपना मंत्री मानता है, वहीं, दूसरा खेमा रमेश मिश्र को अपना मंत्री बताता है। कर्मचारी राममूरत ने कहा कि वह संस्था के प्रबंध कार्यकारिणी सदस्य हैं, वह राम अशीष शर्मा को गांधी आश्रम का मंत्री मानते हैं। जबकि दूसरे पक्ष के सुभाष का कहना है कि प्रबंध कारिणी द्वारा बनाए गए मंत्री रमेश मिश्रा ही वास्तविक मंत्री हैं। आपसी तालमेल से ही गांधी आश्रम की धूमिल होती छवि को बचाने के साथ ही इसे तरक्की की पटरी पर लाया जा सकता है।
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