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Sant Kabir Nagar News: ब्रिटिश मौलाना के मदरसे का भवन भी सरकारी घोषित

Thu, 27 Aug 2026 11:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 11:51 PM IST
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Building of British Maulana's madrasa also declared government property.
मदरसे को ध्वस्त करता बुलडोजर। फाइल फोटो
दिवाकर शुक्ला
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संतकबीरनगर। ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद मौलाना शमशुल हुदा खान द्वारा खलीलाबाद में जमीन खरीदकर शैक्षिक संस्था के नाम बैनामा कराने के मामले में एसडीएम न्यायालय ने 14 अगस्त को ही फैसला सुनाया दिया था। उपजिलाधिकारी हृदयराम त्रिपाठी की अदालत ने पारित अंतिम आदेश में गाटा संख्या 154 की 0.064 हेक्टेयर (640 वर्गमीटर) जमीन का बैनामा शून्य घोषित कर दिया।
इतना ही नहीं, इस जमीन पर बनी संरचना और निर्माण को भी राज्य सरकार में सभी भारों से मुक्त सरकारी संपत्ति के रूप में निहित करने का आदेश दिया। जमीन का यह मामला ग्राम खलीलाबाद, तप्पा दक्षिण हवेली, परगना मगहर पूरब, तहसील खलीलाबाद से जुड़ा है। न्यायालय के आदेश के अनुसार 0.064 हेक्टेयर भूमि का विक्रय विलेख दो सितंबर 2014 को कुल्लियतुल बनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के पक्ष में कराया गया था। इसमें तौसीफ रजा खान प्रबंधक और शमशुल हुदा खान सरपरस्त थे।
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एसडीएम कोर्ट ने अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर माना कि शमशुल हुदा खान 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर चुके थे। न्यायालय के सामने उनका ब्रिटिश पासपोर्ट और ब्रिटिश नागरिकता संबंधी प्रमाणपत्र प्रस्तुत हुआ। इसके बावजूद करीब नौ महीने बाद 2 सितंबर 2014 को उनकी सरपरस्ती वाली शैक्षिक संस्था के पक्ष में जमीन का बैनामा कराया गया।
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अदालत के मुताबिक जमीन का बैनामा कराने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार या भारत सरकार से लिखित पूर्व अनुमति लिए जाने का कोई साक्ष्य पत्रावली में नहीं मिला। न्यायालय ने इसे उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 154-क तथा वर्तमान उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 90 के प्रावधानों का उल्लंघन माना।
बैनामा ही नहीं, नामांतरण भी सवालों के घेरे में : अभिलेखों के अनुसार बैनामे के आधार पर 3 नवंबर 2014 को शैक्षिक संस्था के पक्ष में नामांतरण आदेश भी पारित कराया गया। बाद में संबंधित तथ्य सामने आने पर तत्कालीन नामांतरण आदेश और नामांतरण प्रसूचना को विधि विरुद्ध मानते हुए निरस्त किया गया। इसके बाद हल्का लेखपाल ने 26 मई 2026 को जमीन को राज्य सरकार में निहित किए जाने के लिए रिपोर्ट एसडीएम को भेजी। इसी आधार पर 29 मई 2026 को धारा 104/105 के तहत वाद दर्ज हुआ।
पहले भी सरकारी घोषित करने का आदेश हुआ था : इस जमीन को लेकर पहले भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हो चुकी थी। रिकॉर्ड के अनुसार जिलाधिकारी ने 12 फरवरी 2024 और बाद में 14 नवंबर 2025 को जमीन को राज्य सरकार में निहित करने संबंधी आदेश पारित किए थे। इसके खिलाफ मामला आयुक्त बस्ती मंडल तक पहुंचा। बाद में उच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 के आदेश में पूर्व आदेशों को क्षेत्राधिकार के आधार पर निरस्त करते हुए राजस्व नियमावली के तहत नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बाद एसडीएम कोर्ट में धारा 104/105 के तहत मौजूदा कार्यवाही हुई।
अदालत ने कहा- बिक्री की तारीख से ही राज्य सरकार की हुई जमीन : एसडीएम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 104 के तहत ऐसा अंतरण शून्य है और धारा 105 के परिणामस्वरूप संबंधित संपत्ति राज्य सरकार में निहित हो जाती है। अदालत ने माना कि विवादित बैनामा 2 सितंबर 2014 से ही शून्य था और उसी तारीख से जमीन पर विक्रेता और क्रेता का हित, अधिकार एवं स्वामित्व समाप्त हो गया।
मदरसा भवन भी सरकारी संपत्ति में शामिल : फैसले का सबसे अहम हिस्सा जमीन पर बने भवन से जुड़ा है। अदालत ने केवल 640 वर्गमीटर जमीन को ही सरकारी संपत्ति घोषित नहीं किया, बल्कि आदेश में इस जमीन पर मौजूद समस्त संरचना/निर्माण को भी राज्य सरकार में निहित करने की बात कही है। यानी जिस जमीन पर शैक्षिक संस्था का भवन बना है, वह निर्माण भी आदेश के दायरे में है। हालांकि आदेश में सीधे तौर पर बुलडोजर चलाने या भवन गिराने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। आदेश का तत्काल प्रभाव जमीन और उस पर स्थित निर्माण को सरकारी संपत्ति के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने से जुड़ा है। आगे कब्जा लेने या अन्य कार्रवाई के लिए सक्षम राजस्व प्रशासन को नियमानुसार कदम उठाने होंगे।

राजस्व अभिलेखों में नाम हटाने का आदेश : अंतिम आदेश में एसडीएम ने खतौनी फसली 1427-1432 के खाता संख्या 1836 में गाटा संख्या 154 मि. के 0.064 हेक्टेयर हिस्से से कुल्लियतुल बनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी का नाम हटाने का निर्देश दिया है। जमीन और उस पर स्थित समस्त निर्माण को राज्य सरकार में सरकारी संपत्ति के रूप में निहित करते हुए आदेश की प्रति अनुपालन के लिए तहसीलदार खलीलाबाद को भेजने को कहा गया है। संवाद
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