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इस वर्ष नहीं होगा मगहर महोत्सव
Sant Kabir Nagar
Updated Mon, 20 Mar 2017 11:39 PM IST
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- फोटो : amarujala
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मगहर महोत्सव इस वर्ष नहीं होगा। कारण कि चुनाव के चलते इस वर्ष समय से आयोजन नहीं हो पाया। प्रशासन द्वारा चुनाव के बाद अनुमति मांगने पर पर्यटन निदेशक नवनीत सहगल ने महोत्सव के लिए आवंटित 27. 50 लाख रुपये वापस मांगे हैं।
वर्ष 1987 से सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली मगहर पर प्रत्येक वर्ष 12 से 18 जनवरी के बीच महोत्सव का आयोजन होता है। इसमें में सरकारी विभागों की प्रदर्शनी और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाले विविध कार्यक्रमों के आयोजन के साथ सांस्कृतिक मेला भी लगता है। वर्ष 1997 में जनपद का सृजन हुआ था। उसी के बाद से प्रत्येक वर्ष पर्यटन विभाग महोत्सव के आयोजन के लिए 25 लाख रुपये डीएम की अध्यक्षता वाली महोत्सव समिति के खाते में भेजता है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में महोत्सव को आयोजित कराए जाने के लिए पूर्व में तत्कालीन डीएम सुरेश कुमार की अध्यक्षता में बैठकें र्हुइं थी। दो जनवरी 2017 को पर्यटन विभाग ने महोत्सव के लिए 27.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से महोत्सव समिति के खाते भेज दी थी। 30 दिसंबर 2016 को तत्कालील डीएम सुरेश कुमार ने विधानसभा चुनाव में अफसरों की व्यस्तता और शांति व्यवस्था के लिए पुलिस फोर्स की अनुलब्धता का हवाला देते हुए चुनाव संपन्न होने तक महोत्सव को स्थगित कर दिया था। चार मार्च को वर्तमान डीएम रमाकांत पांडेय ने प्रदेश के महानिदेशक पर्यटन को पत्र भेज कर अप्रैल के तीसरे सप्ताह से महोत्सव कराए जाने की अनुमति मांगी थी।
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वहीं महोत्सव समिति की बैठक में सदस्यों ने सर्वसम्मति से 17 अप्रैल से 23 अप्रैल तक महोत्सव कराए जाने का निर्णय लिया था। प्रभारी डीएम एसएन शुक्ल ने बताया कि महानिदेशक पर्यटन नवनीत सहगल की ओर 17 मार्च को डीएम को भेजे गए पत्र में कहा है कि महोत्सव का आयोजन इस वित्तीय वर्ष में कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। महोत्सव समिति के खाते में उपलब्ध कराई धनराशि को राजकीय कोष में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। ऐसी दशा में इस बार महोत्सव का आयोजन नहीं होगा।
तीन साल से अटका है कलाकारों का पैसा ः वर्ष 2014 में मगहर महोत्सव का बजट समय से खाते में नहीं पहुंच पाने से लैप्स हो गया था। तत्कालीन डीएम की तरफ से पर्यटन विभाग को पत्राचार करके बजट मांगा गया,लेकिन बजट नहीं मिल पाया। जिसकी वजह से कलाकारों ,टेंट, स्मारिका, भोजन व्यवस्था आदि की रकम का भुगतान नहीं हो पाया है। अक्सर समिति की बैठकों में यह मुद्दा उठता रहा है,लेकिन बजट का आवंटन नहीं होने से कलाकारों तक का भुगतान नहीं हो पाया। महोत्सव समिति से जुड़े अवधेश सिंह, नुरुज्जमा अंसारी, त्रिलोकीनाथ वर्मा बताते है कि पहले तो महोत्सव चंदे के पैसे से होता था,लेकिन जनपद सृजन के बाद से शासन ने 25 लाख स्वीकृत कर दिया था और पर्यटन विभाग पैसा देता है। वर्ष 2012 में चुनाव के चलते ही तत्कालीन डीएम दिनकर प्रकाश दूबे ने महोत्सव कार्यक्रम को स्थगित कर दिया था, लेकिन बाद में मार्च महीने में करा दिया था। वर्ष 2014 में मंच तैयार नहीं होने से तत्कालीन डीएम डॉक्टर इंद्रवीर सिंह ने टाल दिया ,लेकिन फरवरी में करा दिया था। ऐसा पहली बार हो रहा है कि महोत्सव का आयोजन नहीं होगा। जिससे यहां के लोगों में निराशा है।
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वर्ष 1987 से सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली मगहर पर प्रत्येक वर्ष 12 से 18 जनवरी के बीच महोत्सव का आयोजन होता है। इसमें में सरकारी विभागों की प्रदर्शनी और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाले विविध कार्यक्रमों के आयोजन के साथ सांस्कृतिक मेला भी लगता है। वर्ष 1997 में जनपद का सृजन हुआ था। उसी के बाद से प्रत्येक वर्ष पर्यटन विभाग महोत्सव के आयोजन के लिए 25 लाख रुपये डीएम की अध्यक्षता वाली महोत्सव समिति के खाते में भेजता है।
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वित्तीय वर्ष 2016-17 में महोत्सव को आयोजित कराए जाने के लिए पूर्व में तत्कालीन डीएम सुरेश कुमार की अध्यक्षता में बैठकें र्हुइं थी। दो जनवरी 2017 को पर्यटन विभाग ने महोत्सव के लिए 27.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से महोत्सव समिति के खाते भेज दी थी। 30 दिसंबर 2016 को तत्कालील डीएम सुरेश कुमार ने विधानसभा चुनाव में अफसरों की व्यस्तता और शांति व्यवस्था के लिए पुलिस फोर्स की अनुलब्धता का हवाला देते हुए चुनाव संपन्न होने तक महोत्सव को स्थगित कर दिया था। चार मार्च को वर्तमान डीएम रमाकांत पांडेय ने प्रदेश के महानिदेशक पर्यटन को पत्र भेज कर अप्रैल के तीसरे सप्ताह से महोत्सव कराए जाने की अनुमति मांगी थी।
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वहीं महोत्सव समिति की बैठक में सदस्यों ने सर्वसम्मति से 17 अप्रैल से 23 अप्रैल तक महोत्सव कराए जाने का निर्णय लिया था। प्रभारी डीएम एसएन शुक्ल ने बताया कि महानिदेशक पर्यटन नवनीत सहगल की ओर 17 मार्च को डीएम को भेजे गए पत्र में कहा है कि महोत्सव का आयोजन इस वित्तीय वर्ष में कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। महोत्सव समिति के खाते में उपलब्ध कराई धनराशि को राजकीय कोष में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। ऐसी दशा में इस बार महोत्सव का आयोजन नहीं होगा।
तीन साल से अटका है कलाकारों का पैसा ः वर्ष 2014 में मगहर महोत्सव का बजट समय से खाते में नहीं पहुंच पाने से लैप्स हो गया था। तत्कालीन डीएम की तरफ से पर्यटन विभाग को पत्राचार करके बजट मांगा गया,लेकिन बजट नहीं मिल पाया। जिसकी वजह से कलाकारों ,टेंट, स्मारिका, भोजन व्यवस्था आदि की रकम का भुगतान नहीं हो पाया है। अक्सर समिति की बैठकों में यह मुद्दा उठता रहा है,लेकिन बजट का आवंटन नहीं होने से कलाकारों तक का भुगतान नहीं हो पाया। महोत्सव समिति से जुड़े अवधेश सिंह, नुरुज्जमा अंसारी, त्रिलोकीनाथ वर्मा बताते है कि पहले तो महोत्सव चंदे के पैसे से होता था,लेकिन जनपद सृजन के बाद से शासन ने 25 लाख स्वीकृत कर दिया था और पर्यटन विभाग पैसा देता है। वर्ष 2012 में चुनाव के चलते ही तत्कालीन डीएम दिनकर प्रकाश दूबे ने महोत्सव कार्यक्रम को स्थगित कर दिया था, लेकिन बाद में मार्च महीने में करा दिया था। वर्ष 2014 में मंच तैयार नहीं होने से तत्कालीन डीएम डॉक्टर इंद्रवीर सिंह ने टाल दिया ,लेकिन फरवरी में करा दिया था। ऐसा पहली बार हो रहा है कि महोत्सव का आयोजन नहीं होगा। जिससे यहां के लोगों में निराशा है।