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Sant Kabir Nagar News: नौका की सवारी कर पधारेंगी मां जगतजननी जगदंबे
Thu, 03 Oct 2024 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 03 Oct 2024 12:53 AM IST
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- पूरे नौ दिन का नवरात्र व्रत
-काफी दशक बाद बना नवरात्र पर कई दुर्लभ संजोग
-चतुर्थी तिथि 2 दिन ,महा अष्टमी महानवमी एक ही दिन
-कन्या पूजन एवं हवन पूजन 11 अक्तूबर को
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शारदीय नवरात्र की शुरुआत तीन अक्तूबर दिन बृहस्पतिवार से हो रही है, नवरात्र का पर्व मां दुर्गा के भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। नवरात्र के नौ दिन मां भगवती के नौ रूपों की पूजा की जाती है। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार इस बार मां जगत जननी जगदंबे नौका की सवारी कर पृथ्वी मंडल पर भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पधार रही है। जो बड़ा दुर्लभ अद्भुत संजोग वाला महायोग बन रहा है। जो पूरे जनमानस के लिए कल्याणकारी साबित होगा। जबकि इस बार माता मुर्गे की सवारी करके वापस जाएंगी।
हिंदू धर्म में मां दुर्गा के मुर्गे पर सवार होकर विदा होना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसा मानता है कि इससे देश दुनिया पर बुरा असर पड़ता है, मुर्गे पर विदा होने से देश को प्राकृतिक आपदाओं शक और कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। लोगों के बीच कलह भर सकता है और तबाही की स्थिति होने की संभावना बनती है यह अशुभ और कष्ट का प्रतीक माना जाता है। कहते हैं कि देश दुनिया पर बुरा असर पड़ने से लड़ाई-झगड़ा बढ़ेंगे और आपसी मतभेद पैदा होगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि शारदीय नवरात्र पर कई दुर्लभ संजोग बन रहे हैं जो बड़ा अद्भुत और दुर्लभ है। हस्त नक्षत्र जयद योग के साथ नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है, जो नौ दिनों तक चलेगा इस बार कि नवरात्र पूरे नव दिन का है जो काफी दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण है।
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आचार्य योगेश पांडेय ने कहा कि शारदीय नवरात्र अश्वनी शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है इस समय आदि महाशक्ति भगवती दुर्गा के नौ रूपों का क्रमश महोत्सव के साथ पूजन अर्चन करने के लिए तथा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम रावण के युद्ध से न्यास पर अन्याय के विजय का पखवाड़ा है। नवरात्र के रूप में मनाते हुए प्रतिपदा को घर-घर में कलश स्थापित करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि अपनी शक्ति समर्थ के अनुरूप अन्य रूप से पूजन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ अनुष्ठान करने का शास्त्र विधान है।
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शुभ योग में करें कलश स्थापना
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने कहा कि शारदीय नवरात्र का कलश स्थापना प्रतिपदा तिथि बृहस्पतिवार तीन अक्तूबर को सुबह से दोपहर बाद में 3:21 तक किसी भी समय किया जा सकता है। क्योंकि प्रतिपदा तिथि दो अक्तूबर को रात्रि के 11 बजकर 9 मिनट पर ही लग जाने से कलश स्थापन सुबह से प्रारंभ हो रहा है। रात 12 बजे के अंदर नवरात्र लगने के कारण से मां भगवती जगत जननी जगदंबे नाव कि सवारी से पृथ्वी मंडल पर पधार रही है। कहा कि नौका की सवारी से मां जग जननी का पृथ्वी मंडल पर पधारना विशेष शुभ फलकारी एवं सौभाग्य कारी है
पूरे नौ दिनों तक चलेगा व्रत एवं पूजा-अर्चन
आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान राम द्वारा की गई शक्ति पूजा पर आधारित सप्तमी तिथि में पूजा पंडाल में देवी प्रतिमाओं की स्थापना 9 अक्तूबर बुधवार को षष्ठी तिथि स्थिति दिन प्राप्त 7:41 के उपरांत सप्तमी तिथि एवं मूल नक्षत्र में शास्त्र विधान से कर ली जाएगी। रात्रि कालीन अष्टमी तिथि की पूजा 10 अक्तूबर बृहस्पतिवार को महा निशा में की जाएगी। महा अष्टमी एवं महानवमी दोनों के व्रत का मन 11 अक्तूबर शुक्रवार को होगा। पूजा पंडाल में संधि पूजन 11 अक्तूबर शुक्रवार को प्राप्त 6:31 से 7:21 तक के बीच में की जाएगी ।
कन्या पूजन एवं हवन मुहूर्त
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि नवरात्र संबंधित 9 दिनों से चला आ रहा दुर्गा सप्तमी के पाठ के समापन एवं 9 दिनों के व्रत के समापन संबंधी हवन पूजन 11 अक्तूबर को सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के अंदर किसी भी समय किया जाना शास्त्र विधान है। वही कन्या पूजन के लिए भी यही मुहूर्त विधान है।
नवरात्र व्रत पारण मुहूर्त
आचार्य योगेश पांडेय ने बताया कि पूर्ण नवरात्र व्रत की पारण निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार से 12 अक्तूबर शनिवार को सुबह किया जाएगा जो शास्त्र विधान से उत्तम फलकारी रहेगा।