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Sant Kabir Nagar News: भागवत कथा श्रवण से मनुष्य का होता हे कल्याण
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उतरावल में श्रीमद्भागवत महापुराण का दूसरा दिन
तिघरा। विकासखंड बघौली के उतरावल में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन डाॅ. धरणीधर महाराज ने कहा कथा में शुकदेवजी के जन्म का वृतांत का विस्तार से वर्णन किया गया। माता कुंती के जीवन का भी उदाहरण दिया और कहा कि माता कुंती एकमात्र ऐसी भक्त हैं जिन्होंने भगवान से वरदान मांगते हुए कहा था, भगवान अगर मैं सुख में रहूंगी तो आपको भूल जाऊंगी, लेकिन दुख में आप सदा मेरे साथ रहेंगे।
इसीलिए हर परिस्थिति में प्राणी को भगवत भजन का आश्रय नहीं छोड़ना चाहिए। कथा प्रवक्ता आचार्य धरणीधर महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि आप सब पर ठाकुर जी की कृपा है। इसकी वजह से आप आज कथा का आनंद ले रहे है। श्रीमद्भगवत कथा का रसपान कर पा रहे हैं क्योंकि जिन्हें गोविंद प्रदान करते हैं जितना प्रदान करते है उसे उतना ही मिलता है।
कथा में यह भी बताया की अगर आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते हैं, कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आए, कुछ सीखने के उद्देश्य से, कुछ पाने के उद्देश्य से आएं, तो ये भागवत कथा जरूर आपको कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ देगी।
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कहा मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा ध्यान सांसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है। मानव जीवन का उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति शाश्वत है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो हमारे लिए इससे प्रभु से बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है।
इस अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम राय शशि कला राय मधुसूदन राय रमेश राय नरेंद्र राय सुरेश पाण्डेय राजेंद्र राय राजू राय आलोक राय विपिन राय आदि मौजूद रहे।
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तिघरा। विकासखंड बघौली के उतरावल में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन डाॅ. धरणीधर महाराज ने कहा कथा में शुकदेवजी के जन्म का वृतांत का विस्तार से वर्णन किया गया। माता कुंती के जीवन का भी उदाहरण दिया और कहा कि माता कुंती एकमात्र ऐसी भक्त हैं जिन्होंने भगवान से वरदान मांगते हुए कहा था, भगवान अगर मैं सुख में रहूंगी तो आपको भूल जाऊंगी, लेकिन दुख में आप सदा मेरे साथ रहेंगे।
इसीलिए हर परिस्थिति में प्राणी को भगवत भजन का आश्रय नहीं छोड़ना चाहिए। कथा प्रवक्ता आचार्य धरणीधर महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि आप सब पर ठाकुर जी की कृपा है। इसकी वजह से आप आज कथा का आनंद ले रहे है। श्रीमद्भगवत कथा का रसपान कर पा रहे हैं क्योंकि जिन्हें गोविंद प्रदान करते हैं जितना प्रदान करते है उसे उतना ही मिलता है।
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कथा में यह भी बताया की अगर आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते हैं, कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आए, कुछ सीखने के उद्देश्य से, कुछ पाने के उद्देश्य से आएं, तो ये भागवत कथा जरूर आपको कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ देगी।
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कहा मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा ध्यान सांसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है। मानव जीवन का उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति शाश्वत है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो हमारे लिए इससे प्रभु से बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है।
इस अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम राय शशि कला राय मधुसूदन राय रमेश राय नरेंद्र राय सुरेश पाण्डेय राजेंद्र राय राजू राय आलोक राय विपिन राय आदि मौजूद रहे।