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संत कबीर नगर: बीतने को है साल, चार गांवों के मजदूरों को नहीं मिला रोजगार
Sat, 18 Feb 2023 06:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 18 Feb 2023 06:40 PM IST
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विकास खंड हैंसर बाजार में मनरेगा योजना का हाल बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। गांव से पलायन को रोकने के लिए रोजगार परक मनरेगा योजना का विकास खंड हैंसर बाजार में बुरा हाल है। वित्तीय वर्ष 2022-23 बीतने को है, लेकिन चार ग्राम पंचायतों के 3017 जॉब कार्ड धारकों को रोजगार नहीं मिल सका।
विकास खंड हैंसर के धनघटा में 684 जॉब कार्ड धारक मजदूर हैं, लेकिन इस ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत न तो कच्चा कार्य हुआ और न ही पक्का। जॉब कार्ड धारक सावित्री, रामरूप, लुटावन, नन्हे लाल आदि का कहना है कि मनरेगा योजना के तहत कार्य करने के लिए ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी से कई बार कहा गया, लेकिन गांव के विवाद में फंसे प्रधान विकास कार्य की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
गांव में रोजगार न मिलने के कारण लुधियाना, दिल्ली जाकर मजदूरी करना मजबूरी हो गई है। ग्राम पंचायत हैंसर बाजार में 683 जॉब कार्ड धारक हैं, लेकिन इस गांव के भी जॉब कार्ड धारकों को मनरेगा के तहत काम करने का अवसर नहीं मिल सका है। जॉब कार्ड धारक रामकुमार, प्रहलाद, गुंजन, फूलमती देवी आदि का कहना है कि ग्राम पंचायत हैंसर बाजार ब्लॉक मुख्यालय का गांव है, लेकिन इस गांव में विकास कार्यों की तरफ अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। मनरेगा में काम करने के लिए ग्राम प्रधान से लगायत ब्लॉक मुख्यालय तक पहुंच कर मांग की गई, लेकिन रोजगार नहीं मिल सका।
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ग्राम पंचायत नटवा बर में 1003 जॉब कार्ड धारक हैं। अनुसूचित जाति बहुल वाले इस गांव के अधिकतर लोग मेहनत-मजदूरी कर ही भरण-पोषण करते हैं। चालू वित्तीय वर्ष में इस गांव के जॉब कार्ड धारकों को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिल सका। जॉब कार्ड धारक राममिलन, नन्हे लाल, कुसलावती, सुभद्रा आदि का कहना है कि ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान से ही यह गांव राजनीति का अखाड़ा बन गया। गांव में कराए गए विकास कार्य में अनियमितता उजागर होने के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित भी हुए।
गांव वालों का कहना है की दो पक्षों के लड़ाई में गांव का विकास कार्य ठप है। मनरेगा जैसी योजना भी इस गांव में दम तोड़ दी है। यहां के मजदूर वर्ग के लोग पलायन करने को विवश हैं। ग्राम पंचायत सोनाडी में 647 जॉब कार्ड धारक हैं। इस गांव में भी जॉब कार्ड धारकों को चालू वित्तीय वर्ष में रोजगार नहीं मिल सका है। इस संबंध में एपीओ ऋषि सिंह ने बताया कि ऐसा नहीं है कि इन गांव में मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारकों को रोजगार न मिला हो। पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही इस संबंध में कुछ बता सकते हैं। मनरेगा में मांग आधारित योजना है। मजदूरों ने काम नहीं मांगा होगा, इसी लिए काम नहीं पाए होंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। गांव से पलायन को रोकने के लिए रोजगार परक मनरेगा योजना का विकास खंड हैंसर बाजार में बुरा हाल है। वित्तीय वर्ष 2022-23 बीतने को है, लेकिन चार ग्राम पंचायतों के 3017 जॉब कार्ड धारकों को रोजगार नहीं मिल सका।
विकास खंड हैंसर के धनघटा में 684 जॉब कार्ड धारक मजदूर हैं, लेकिन इस ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत न तो कच्चा कार्य हुआ और न ही पक्का। जॉब कार्ड धारक सावित्री, रामरूप, लुटावन, नन्हे लाल आदि का कहना है कि मनरेगा योजना के तहत कार्य करने के लिए ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी से कई बार कहा गया, लेकिन गांव के विवाद में फंसे प्रधान विकास कार्य की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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गांव में रोजगार न मिलने के कारण लुधियाना, दिल्ली जाकर मजदूरी करना मजबूरी हो गई है। ग्राम पंचायत हैंसर बाजार में 683 जॉब कार्ड धारक हैं, लेकिन इस गांव के भी जॉब कार्ड धारकों को मनरेगा के तहत काम करने का अवसर नहीं मिल सका है। जॉब कार्ड धारक रामकुमार, प्रहलाद, गुंजन, फूलमती देवी आदि का कहना है कि ग्राम पंचायत हैंसर बाजार ब्लॉक मुख्यालय का गांव है, लेकिन इस गांव में विकास कार्यों की तरफ अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। मनरेगा में काम करने के लिए ग्राम प्रधान से लगायत ब्लॉक मुख्यालय तक पहुंच कर मांग की गई, लेकिन रोजगार नहीं मिल सका।
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ग्राम पंचायत नटवा बर में 1003 जॉब कार्ड धारक हैं। अनुसूचित जाति बहुल वाले इस गांव के अधिकतर लोग मेहनत-मजदूरी कर ही भरण-पोषण करते हैं। चालू वित्तीय वर्ष में इस गांव के जॉब कार्ड धारकों को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिल सका। जॉब कार्ड धारक राममिलन, नन्हे लाल, कुसलावती, सुभद्रा आदि का कहना है कि ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान से ही यह गांव राजनीति का अखाड़ा बन गया। गांव में कराए गए विकास कार्य में अनियमितता उजागर होने के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित भी हुए।
गांव वालों का कहना है की दो पक्षों के लड़ाई में गांव का विकास कार्य ठप है। मनरेगा जैसी योजना भी इस गांव में दम तोड़ दी है। यहां के मजदूर वर्ग के लोग पलायन करने को विवश हैं। ग्राम पंचायत सोनाडी में 647 जॉब कार्ड धारक हैं। इस गांव में भी जॉब कार्ड धारकों को चालू वित्तीय वर्ष में रोजगार नहीं मिल सका है। इस संबंध में एपीओ ऋषि सिंह ने बताया कि ऐसा नहीं है कि इन गांव में मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारकों को रोजगार न मिला हो। पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही इस संबंध में कुछ बता सकते हैं। मनरेगा में मांग आधारित योजना है। मजदूरों ने काम नहीं मांगा होगा, इसी लिए काम नहीं पाए होंगे।