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Sant Kabir Nagar News: कोपिया व तामा का होगा पर्यटन विकास, किए गए चिह्नित
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संतकबीरनगर। जनपद में पर्यटन विकास की संभावनाओं को देखते हुए ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन की दृष्टि से उन्नत एवं समृद्धि बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत जिले में दो गांवों कोपिया और तामा को ग्रामीण पर्यटन विकास के लिए चिह्नित किया गया है। इसके साथ ही जिन गांवों की पहचान हथकरघा, हस्तशिल्प और इसी तरह की अन्य कलाओं से है, उन्हें भी विकसित किया जाएगा।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी विकास नारायण ने बताया कि कोपिया गांव का पुरातात्विक महत्व है। यहां प्राचीन कांच निर्माण के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जबकि तामा गांव में भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। जहां वर्ष भर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। किवदंतियों के अनुसार, यह वह पवित्र स्थल है जहां पांडवों की माता कुंती ने कभी पूजा-अर्चना की थी।
यह भी माना जाता है कि गौतम बुद्ध का मुंडन संस्कार भी इसी स्थान पर हुआ। इस स्थल के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र को एक आध्यात्मिक गलियारे के रूप में विकसित करने के लिए एक वृहद पर्यटन विकास की घोषणा की है। पर्यटन विभाग की राज्य सेक्टर अंतर्गत 2041.49 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
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जिले में पर्यटन नीति-2022 के अंतर्गत अब तक लगभग 22 नई पर्यटन इकाइयों जैसे-होटल, कन्वेंशन सेंटर, मार्गस्थ सुविधा केंद्र आदि का पंजीकरण किया जा चुका है। इन इकाइयों में कुल मिलाकर लगभग 58495.00 लाख रुपये का निवेश किया जाना प्रस्तावित है। पर्यटन विभाग स्थानीय संस्कृति और कलाओं को उजागर करने और उनका उत्सव मनाने के लिए लगभग हर जिले में महोत्सव जैसे कार्यक्रम सक्रिय रूप से आयोजित कर रहा है। ये पहल पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करने में मदद करती है, साथ ही उन लोगों को आजीविका भी प्रदान करती है जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और बनाए रखते हैं।
वर्ष 2017 से अब तक पर्यटन विभाग ने 34 प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 3175.68 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। वर्तमान में कुल 26 परियोजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं, शेष आठ प्रगतिशील हैं।
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जिला पर्यटन विकास अधिकारी विकास नारायण ने बताया कि कोपिया गांव का पुरातात्विक महत्व है। यहां प्राचीन कांच निर्माण के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जबकि तामा गांव में भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। जहां वर्ष भर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। किवदंतियों के अनुसार, यह वह पवित्र स्थल है जहां पांडवों की माता कुंती ने कभी पूजा-अर्चना की थी।
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यह भी माना जाता है कि गौतम बुद्ध का मुंडन संस्कार भी इसी स्थान पर हुआ। इस स्थल के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र को एक आध्यात्मिक गलियारे के रूप में विकसित करने के लिए एक वृहद पर्यटन विकास की घोषणा की है। पर्यटन विभाग की राज्य सेक्टर अंतर्गत 2041.49 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
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जिले में पर्यटन नीति-2022 के अंतर्गत अब तक लगभग 22 नई पर्यटन इकाइयों जैसे-होटल, कन्वेंशन सेंटर, मार्गस्थ सुविधा केंद्र आदि का पंजीकरण किया जा चुका है। इन इकाइयों में कुल मिलाकर लगभग 58495.00 लाख रुपये का निवेश किया जाना प्रस्तावित है। पर्यटन विभाग स्थानीय संस्कृति और कलाओं को उजागर करने और उनका उत्सव मनाने के लिए लगभग हर जिले में महोत्सव जैसे कार्यक्रम सक्रिय रूप से आयोजित कर रहा है। ये पहल पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करने में मदद करती है, साथ ही उन लोगों को आजीविका भी प्रदान करती है जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और बनाए रखते हैं।
वर्ष 2017 से अब तक पर्यटन विभाग ने 34 प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 3175.68 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। वर्तमान में कुल 26 परियोजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं, शेष आठ प्रगतिशील हैं।