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Sant Kabir Nagar: खतौनी में मर चुके खेलई परिवार रजिस्टर में जिंदा, प्रमाणपत्र बनवाते-बनवाते चली गई जान

Sat, 19 Nov 2022 03:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 19 Nov 2022 03:42 PM IST
सार

कोड़रा गांव निवासी फेरई की मौत वर्ष 2016 में हो गई थी। फेरई की मौत के बाद उनके छोटे भाई खेलई को मृतक दिखाकर राजस्व विभाग ने खेलई की जमीन मृतक फेरई की पत्नी व बेटे के नाम से वरासत कर दिया। खेलई को जब इसकी जानकारी हुई तो अपनी संपत्ति अपने नाम कराने के लिए खुद को जिंदा साबित करते हुए राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के दरवाजे का चक्कर काटने लगे।

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Khelai dead in Khatauni is alive in the family register
खेलई की फाइल फोटो । - फोटो : KHALILABAD

विस्तार

खतौनी में खुद को जिंदा साबित कर संपत्ति वापस पाने के प्रयास में बुधवार को धनघटा तहसील परिसर में दम तोड़ चुके खेलई अब भी परिवार रजिस्टर में जिंदा हैं। बगैर परिवार रजिस्टर की नकल लिए उनकी जमीन को भतीजों के नाम से वरासत करने पर राजस्व विभाग पर सवाल उठने लगे हैं। निष्पक्ष जांच हो तो मरने-जीने के खेल में कई अधिकारी-कर्मचारी नपेंगे।
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कोड़रा गांव निवासी फेरई की मौत वर्ष 2016 में हो गई थी। फेरई की मौत के बाद उनके छोटे भाई खेलई को मृतक दिखाकर राजस्व विभाग ने खेलई की जमीन मृतक फेरई की पत्नी व बेटे के नाम से वरासत कर दिया। खेलई को जब इसकी जानकारी हुई तो अपनी संपत्ति अपने नाम कराने के लिए खुद को जिंदा साबित करते हुए राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के दरवाजे का चक्कर काटने लगे।
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खेलई के पुत्र पन्ने लाल का कहना है कि वर्ष 2017 से पिता खुद को जिंदा साबित करते हुए गई हुई संपत्ति को पाने के प्रयास में संपूर्ण समाधान दिवस, समाधान दिवस समेत अन्य जगहों पर लगातार प्रार्थनापत्र दे ही रहे थे। वाद भी दाखिल किया था, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उनके हर फरियाद को अनसुना कर देते थे। सीओ चकबंदी की कोर्ट में बयान देने के लिए बुधवार को तहसील में आए और बयान देने के पहले उनकी मौत हो गई।
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पन्नेलाल का कहना है कि पिता अब भी परिवार रजिस्टर में जिंदा है। परिवार रजिस्टर में बड़े पिता फेरई को ही मृतक दर्शाया गया है। राजस्व विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लेखपाल बगैर मृत प्रमाणपत्र लिए वरासत नहीं करते हैं। अधिवक्ता प्रेम नारायण मिश्र का कहना है कि वरासत बगैर मृत प्रमाणपत्र लिए नहीं की जा सकती है, लेकिन लेखपाल और तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए कोई भी नियम कानून मायने नहीं रखता है।

ग्राम पंचायत कोडरा के ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि खेलई पुत्र बालकिशुन का नाम परिवार रजिस्टर में जिंदा के रूप में दर्ज है। जबकि उनके भाई फेरई का मृत प्रमाणपत्र बन चुका है।
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कोट
पूरे प्रकरण की जांच करने के लिए कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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खेलई के प्रकरण में उनके वारिशों को मंगलवार को सीओ चकबंदी धनघटा ने कार्यालय बुलाया है। वारिशों से प्रार्थनापत्र लेकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-रमेश चंद्रा, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी
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