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Sant Kabir Nagar News: ठंड में नियंत्रित रखें रक्तचाप...लकवा का खतरा
Sat, 15 Nov 2025 01:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 15 Nov 2025 01:06 AM IST
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जिला चिकित्सालय में मरीजों को देखते हुए डॉ मॉज फारुखी । संवाद
- फोटो : प्रवाचिका महेश्वरी श्रीजी।
संतकबीरनगर। ठंड के मौसम में रक्तचाप पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। रक्तचाप नियंत्रित नहीं रहेगा तो लकवे की आशंका बढ़ जाती है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ठंड बढ़ने के साथ ही यह खतरा बढ़ता ही जाएगा।
यह कहना है जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ मॉज फारुखी का। उन्होंने कहा कि हर साल ठंड में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या गर्मियों की अपेक्षा काफी बढ़ जाती है। एक अनुमान के अनुसार यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। इस बीमारी में दिमाग की नसों में ब्लाक का जमाव हो जाता है। ब्लड का प्रवाह नहीं होने से रक्त नालिका से जुड़े शरीर के अन्य भाग काम करना बंद कर देते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार ब्रेन स्ट्रोक का ठंड से सीधा संबंध है। सर्दियों में ब्लड गाढ़ा हो जाता है। शरीर को गर्म रखने के लिए रक्तचाप भी बढ़ जाता है, वहीं ठंड के मौसम में लोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा कैलोरी युक्त भोजन लेने लगते हैं। इससे कालेस्ट्राल काफी तेजी से बढ़ता है। यह बीमारी अक्सर 50 से ऊपर उम्र वालों को ही ज्यादा होती है। ब्रेन स्ट्रोक होने की स्थिति में व्यक्ति के शरीर के किसी भाग में अचानक कमजोरी, तुतलाना, बेहोशी या कम दिखाई देने आदि के लक्षण नजर जाते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। सर्दियों में इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वे अपने कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण रखें। इसके साथ-साथ तनाव मुक्त जीवन जीने की सलाह दी जाती है। तनाव का भी असर ब्रेन स्ट्रोक पर पड़ता है।
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खून जमने से फटती है नस
डॉ फारुखी ने बताया कि तेज सर्दी से एक्सपोजर होने पर ब्लड में कार्टीसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे खून जमने लगता है। ठंड से सिकुड़ी नसों में गाढ़े खून का प्रेशर बढ़ने पर फट जाता हैं। इससे व्यक्ति को पैरालिसिस हो जाता है। यही कार्टीसोल हार्मोन सर्दियों में शरीर के तापमान को बढ़ाकर रखने में मददगार होता है।
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बचाव के उपाय
- बाहर निकलने से पहले माथे और शरीर को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह से ढंके।
- मॉर्निक वॉक के दौरान शरीर से पसीना निकलने पर गर्म कपड़ों को शरीर से अलग करें।
- दो-दो सप्ताह के अंतर से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।
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सर्दी की शुरुआत में ज्यादा खतरा
चिकित्सक का कहना है कि लोगों के जाड़े में ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम में जरूरी बदलाव होने से लकवे का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज, हृदय रोग, मिर्गी और ब्लड प्रेशर कम अथवा ज्यादा होने की स्थिति आती है। इसके चलते खतरा अधिक होता है।
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यह कहना है जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ मॉज फारुखी का। उन्होंने कहा कि हर साल ठंड में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या गर्मियों की अपेक्षा काफी बढ़ जाती है। एक अनुमान के अनुसार यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। इस बीमारी में दिमाग की नसों में ब्लाक का जमाव हो जाता है। ब्लड का प्रवाह नहीं होने से रक्त नालिका से जुड़े शरीर के अन्य भाग काम करना बंद कर देते हैं।
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डॉक्टरों के अनुसार ब्रेन स्ट्रोक का ठंड से सीधा संबंध है। सर्दियों में ब्लड गाढ़ा हो जाता है। शरीर को गर्म रखने के लिए रक्तचाप भी बढ़ जाता है, वहीं ठंड के मौसम में लोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा कैलोरी युक्त भोजन लेने लगते हैं। इससे कालेस्ट्राल काफी तेजी से बढ़ता है। यह बीमारी अक्सर 50 से ऊपर उम्र वालों को ही ज्यादा होती है। ब्रेन स्ट्रोक होने की स्थिति में व्यक्ति के शरीर के किसी भाग में अचानक कमजोरी, तुतलाना, बेहोशी या कम दिखाई देने आदि के लक्षण नजर जाते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। सर्दियों में इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वे अपने कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण रखें। इसके साथ-साथ तनाव मुक्त जीवन जीने की सलाह दी जाती है। तनाव का भी असर ब्रेन स्ट्रोक पर पड़ता है।
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खून जमने से फटती है नस
डॉ फारुखी ने बताया कि तेज सर्दी से एक्सपोजर होने पर ब्लड में कार्टीसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे खून जमने लगता है। ठंड से सिकुड़ी नसों में गाढ़े खून का प्रेशर बढ़ने पर फट जाता हैं। इससे व्यक्ति को पैरालिसिस हो जाता है। यही कार्टीसोल हार्मोन सर्दियों में शरीर के तापमान को बढ़ाकर रखने में मददगार होता है।
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बचाव के उपाय
- बाहर निकलने से पहले माथे और शरीर को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह से ढंके।
- मॉर्निक वॉक के दौरान शरीर से पसीना निकलने पर गर्म कपड़ों को शरीर से अलग करें।
- दो-दो सप्ताह के अंतर से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।
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सर्दी की शुरुआत में ज्यादा खतरा
चिकित्सक का कहना है कि लोगों के जाड़े में ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम में जरूरी बदलाव होने से लकवे का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज, हृदय रोग, मिर्गी और ब्लड प्रेशर कम अथवा ज्यादा होने की स्थिति आती है। इसके चलते खतरा अधिक होता है।