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50 घरों पर मंडरा रहा कटान का खतरा

Tue, 05 Jul 2022 10:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jul 2022 10:42 PM IST
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50 घरों पर मंडरा रहा कटान का खतरा
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मकान से मात्र चार मीटर की दूरी पर है घाघरा की धारा
जान जोखिम में डाल कर अपने घरों में रह रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी गांव के लिए घाघरा नदी अभिशाप बन गई है। तीन दिनों के भीतर कटान करके नदी ने नौ लोगों के मकान को अपने में समाहित कर लिया है। वही मंगलवार को नदी की कटान के पास 50 लोगों का आशियाना आ गया है, लेकिन जान जोखिम में डालकर अभी भी लोग अपने मकानों में निवास कर रहे हैं।

एमबीडी बांध और घाघरा नदी के मध्य बसे गायघाट दक्षिणी गांव पर नदी का प्रकोप पिछले वर्ष ही शुरू हो गया। पहले खेती उसके बाद 34 लोगों के मकान को पिछले वर्ष नदी ने समाहित कर लिया था। तभी से गांव से सटकर नदी का धारा प्रवाहित हो रही है। इस वर्ष नदी ने फिर कटान शुरू की तो नौ लोगों के मकान समाहित हो गए। ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू ने बताया कि राम दुलारे, गजेंद्र, धर्मेंद्र, अशोक, मनोज, विनोद, बिंद्रावन, बदन, लालती, किशन, अंबिका, सरस्वती, सर्वजीत, अमरजीत, मिट्ठू, राधेश्याम, राम वृक्ष, राममिलन, अनिल, टनकू, बिंदु, रंगीलाल, जयप्रकाश, रमेश समेत 50 लोगों का मकान कभी भी कट सकता है। किसी के मकान से चार मीटर दूरी पर तो किसी के मकान से आठ मीटर की दूरी पर नदी की धारा बह रही है। प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू का कहना है कि मंगलवार की सुबह से नदी की कटान स्थिर है। अबकी बार नदी की कटान शुरू हुई तो 50 मकान नदी की धारा में समाहित हो जाएंगे। गांव को खाली करने का फरमान तो प्रशासन बार-बार जारी कर रहा है, लेकिन कहीं पर रहने और खाने की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। प्रधान ने बताया कि जुलाई माह में ही नदी कटान इस तरह कर रही है तो आगे चलकर किस तरह की कहर बरपाएगी, इसकी कल्पना करके होश उड़ जा रहे हैं। 200 से अधिक घर वाले गांव गायघाट दक्षिणी का अस्तित्वविहीन होना लगभग तय है। प्रशासन बांध के उत्तर लोगों के बसने के लिए जमीन उपलब्ध करा दे तो पूरा गांव आज ही खाली हो जाएगा, लेकिन जिनका मकान पिछले वर्ष कट गया था, उन्हें रहने की जमीन आज तक प्रशासन ने मुहैया नहीं कराया तो 200 से अधिक परिवार के रहने की व्यवस्था कैसे और कहां करेगा। इस संबंध में तहसीलदार रतनेश तिवारी का कहना है कि राजस्व कर्मी वहां रहकर लोगों की मदद करने के साथ उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था कर रहे हैं।
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