{"_id":"5c16a075bdec225b5e536dc9","slug":"kanha-animal-ashram-empty-due-to-lack-of-funds","type":"story","status":"publish","title_hn":"धन की कमी से कान्हा पशु आश्रम खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धन की कमी से कान्हा पशु आश्रम खाली
Mon, 17 Dec 2018 12:29 AM IST
राकेश पांडेय
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:29 AM IST
विज्ञापन
धन की कमी से कान्हा पशु आश्रम खाली
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मगहर(संतकबीरनगर)। छुट्टा पशुओं की देखभाल के लिए कस्बे में बना कान्हा पशु आश्रम बजट के अभाव में संचालित नहीं हो पा रहा है। इसके चलते छुट्टा पशु कस्बे समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भटक कर लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। खेत में फसल चौपट होने से किसान परेशान हैं तो राहगीर मुख्य सड़क पर पशुओं के चलते हादसे की आशंका से सहमे रहते हैं।
मगहर कस्बा तथा ग्रामीण क्षेत्र के तमाम पशु पालक दुधारू पशुओं को दिन में खुला छोड़ देते हैं। इसके अलावा गाय के बछड़ों को भी लोग उपयोगी नहीं होने के चलते छोड़ देते हैं। ये पशु दिन भर कस्बे की सड़कों पर भटकते रहते हैं। चारा-पानी की तलाश में दुकानों के आगे खड़े रहते हैं। दोपहर में पशुओं का झुंड मुख्य सड़क पर ही बैठ जाता है। इससे राहगीरों का दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में भी लोग छुट्टा पशुओं से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि पशुओं का झुंड खेत में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। गेहूं की खेतों की रखवाली करना पड़ रहा है। झुंड में आने वाले पशुओं को खदेड़ने के लिए लोग पूरी रात लाठी-डंडा लेकर खेतों की रखवाली करते हैं। प्रदेश की योगी सरकार ने छुट्टा पशुओं की देखरेख के लिए कस्बे में कान्हा पशु आश्रय का निर्माण कराया था। अक्तूबर में इसका लोकार्पण भी कर दिया गया, लेकिन इस संस्थान को संचालित करने के लिए बजट ही नहीं मिला। नगर पंचायत के जिम्मेदारों की मानें तो कान्हा पशु आश्रय में पशुओं के लिए चारा-पानी पर प्रति माह करीब एक लाख रुपये व कर्मचारियों के वेतन आदि पर करीब 75 हजार रुपये का खर्च आएगा। बजट के अभाव में न तो भूसा आदि का इंतजाम हो पाया है और न ही देखरेख के लिए कर्मचारी ही तैनात हो पाए हैं। इसके चलते वहां पशुओं को रखना संभव नहीं है। नगर पंचायत की चेयरमैन संगीता वर्मा का कहना है कि कान्हा पशु आश्रय के संचालन के लिए बजट नहीं मिला है। प्रतिमाह पौने दो लाख रुपये का खर्च आएगा जिसकी व्यवस्था के लिए स्थानीय निकाय निदेशालय को पत्र भेजा गया है। बजट उपलब्ध होते ही कस्बे में घूम रहे छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर कान्हा पशु आश्रय भेज दिया जाएगा।
मगहर कस्बा तथा ग्रामीण क्षेत्र के तमाम पशु पालक दुधारू पशुओं को दिन में खुला छोड़ देते हैं। इसके अलावा गाय के बछड़ों को भी लोग उपयोगी नहीं होने के चलते छोड़ देते हैं। ये पशु दिन भर कस्बे की सड़कों पर भटकते रहते हैं। चारा-पानी की तलाश में दुकानों के आगे खड़े रहते हैं। दोपहर में पशुओं का झुंड मुख्य सड़क पर ही बैठ जाता है। इससे राहगीरों का दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में भी लोग छुट्टा पशुओं से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि पशुओं का झुंड खेत में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। गेहूं की खेतों की रखवाली करना पड़ रहा है। झुंड में आने वाले पशुओं को खदेड़ने के लिए लोग पूरी रात लाठी-डंडा लेकर खेतों की रखवाली करते हैं। प्रदेश की योगी सरकार ने छुट्टा पशुओं की देखरेख के लिए कस्बे में कान्हा पशु आश्रय का निर्माण कराया था। अक्तूबर में इसका लोकार्पण भी कर दिया गया, लेकिन इस संस्थान को संचालित करने के लिए बजट ही नहीं मिला। नगर पंचायत के जिम्मेदारों की मानें तो कान्हा पशु आश्रय में पशुओं के लिए चारा-पानी पर प्रति माह करीब एक लाख रुपये व कर्मचारियों के वेतन आदि पर करीब 75 हजार रुपये का खर्च आएगा। बजट के अभाव में न तो भूसा आदि का इंतजाम हो पाया है और न ही देखरेख के लिए कर्मचारी ही तैनात हो पाए हैं। इसके चलते वहां पशुओं को रखना संभव नहीं है। नगर पंचायत की चेयरमैन संगीता वर्मा का कहना है कि कान्हा पशु आश्रय के संचालन के लिए बजट नहीं मिला है। प्रतिमाह पौने दो लाख रुपये का खर्च आएगा जिसकी व्यवस्था के लिए स्थानीय निकाय निदेशालय को पत्र भेजा गया है। बजट उपलब्ध होते ही कस्बे में घूम रहे छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर कान्हा पशु आश्रय भेज दिया जाएगा।
विज्ञापन