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कबीर ने सिर्फ मानव सेवा की बात की: डीएम
santkabirnagar
Updated Sun, 14 Jan 2018 11:10 PM IST
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कबीर की मजार पर श्रद्धासुमन अर्पित करते डीएम और एसपी
- फोटो : amar ujala
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मगहर। सूफी संत कबीर ने सभी धर्मों के लोगों को फटकार लगाई है। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम में व्याप्त कुरीतियों का भी जीवन भर विरोध किया था। कबीर ने समाज में सामाजिक समरसता का माहौल बनाने का प्रयास किया था। यही कारण है कि आज उन्हें देश के महान संत पुरुष के रूप में जाना पहचाना जाता है। यह बातें संत कबीर की निर्वाण स्थली पर खिचड़ी के मेले के दौरान आयोजित संगोष्ठी में डीएम मार्कंडेय शाही ने कहीं।
कहा कि सद्गुरु कबीर ने अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार किया था। समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया था, सामाजिक समरसता का माहौल पैदा कर सत्य के प्रति लोगों को आगाह किया था। कबीर ने लोगों से अपने अंदर की शक्ति को पहचानने की सीख दी थी। एसपी हेमराज मीणा ने कहा कि यहां आने पर मानसिक शांति मिलती हैं और अलग सी अनुभूति होती हैं। कबीर ने समाज में फैली भ्रांतियों तथा मानव की उलझन को दूर करने का पूरा प्रयास किया था। इनकी वाणी सार्वभौमिक है जो जीवन का सार है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कबीर चौरा मठ के महंत विचार दास ने कहा कबीर की वाणी को आत्मसात करने की जरूरत है। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि महेंद्र दूबे, राजेश उर्फ गुड्डू वर्मा, वेद प्रकाश चौबे, त्रिलोकीनाथ वर्मा, सुधीर श्रीवास्तव, मोहम्मद असद, भोलू पासवान, संतोष गुप्ता, राजमणि गुप्ता, महेंद्र निषाद, भोलू सिंह, रवि प्रकाश पांडे, अवधेश सिंह, डॉ हरिशरण शास्त्री, अरविंद दास शास्त्री, केशवदास, उदय नारायण राय समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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कहा कि सद्गुरु कबीर ने अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार किया था। समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया था, सामाजिक समरसता का माहौल पैदा कर सत्य के प्रति लोगों को आगाह किया था। कबीर ने लोगों से अपने अंदर की शक्ति को पहचानने की सीख दी थी। एसपी हेमराज मीणा ने कहा कि यहां आने पर मानसिक शांति मिलती हैं और अलग सी अनुभूति होती हैं। कबीर ने समाज में फैली भ्रांतियों तथा मानव की उलझन को दूर करने का पूरा प्रयास किया था। इनकी वाणी सार्वभौमिक है जो जीवन का सार है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कबीर चौरा मठ के महंत विचार दास ने कहा कबीर की वाणी को आत्मसात करने की जरूरत है। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि महेंद्र दूबे, राजेश उर्फ गुड्डू वर्मा, वेद प्रकाश चौबे, त्रिलोकीनाथ वर्मा, सुधीर श्रीवास्तव, मोहम्मद असद, भोलू पासवान, संतोष गुप्ता, राजमणि गुप्ता, महेंद्र निषाद, भोलू सिंह, रवि प्रकाश पांडे, अवधेश सिंह, डॉ हरिशरण शास्त्री, अरविंद दास शास्त्री, केशवदास, उदय नारायण राय समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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