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चौका आरती और दीक्षा से हुआ कबीर महोत्सव का समापन
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सद्गुरु कबीर के प्रकट दिवस पर समाधि परिसर में आयोजित चौक आरती मौजूद भक्तगण।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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चौका आरती और दीक्षा से हुआ कबीर महोत्सव का समापन
निर्गुण भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल, झूमते रहे श्रद्धालु
महंत विचार दास ने 50 भक्तों को ग्रहण कराई गुरु दीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर/संतकबीरनगर। सद्गुरु कबीर के प्राकट्य दिवस पर बृहस्पतिवार की देर शाम चौका आरती के साथ दीक्षा का कार्यक्रम हुआ। महंत विचार दास ने 50 भक्तों को गुरु दीक्षा दी। इस दौरान निर्गुण भजन का गायन हुआ। इससे माहौल भक्तिमय हो गया।
सद्गुरु कबीर के प्राकट्य दिवस पर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, मध्यप्रदेश आदि जगहों से कबीर पंथी संत महात्मा और श्रद्धालु मगहर कबीर चौरा आए थे। सभी ने कबीर की समाधि और मजार के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही चौका आरती, गुरु पूजा आदि में हिस्सा लिया। चौका आरती व दीक्षा कार्यक्रम के दौरान महंत विचार दास ने कहा कि बिना गुरु दीक्षा के मानव शरीर अधूरा माना गया है। मनुष्य जब गुरु दीक्षा प्राप्त कर लेता है, तो उसे गुरु से अलौकिक ज्ञान प्राप्त होता रहता है। उसके बाद व्यक्ति के जीवन में बदलाव आने लगता है। इसलिए सद्गुरु कबीर ने कहा है कि निराकार ब्रह्म को ही गुरु मान उनके द्वारा दिखाए गए सद्मार्ग का अनुसरण करते हुए जीवन के झंझावतों से छुटकारा पाया जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सही मार्ग पर ले जाने वाला एक मात्र गुरु को ही माना गया है। उन्होंने कबीर के दोहे गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागों पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय सुनाया। कहा कि सद्गुरु ही हमें गोविंद अर्थात परमात्मा का ज्ञान देता है। ऐसे में गुरु का स्थान स्वयं ही बड़ा हो जाता है। गुरु हमेशा अपने भक्तों को सत्य, प्रेम, सौहार्द के रास्ते पर चलने की सीख देता है। इस मौके पर कबीर के अनुयायी भक्तों ने चौका आरती के दौरान कलश स्थापित कर नारियल, फल, पान का पत्ता, धूप, दीप से पूजन आदि करने के बाद महंत विचार दास से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर डॉ. हरिशरण शास्त्री, संतकेशव दास, संत अरविंद दास शास्त्री, पुजारी शांतिदास, सेवानिवृत्त शिक्षक रामशंकर यादव, प्रधानाचार्य डॉ. राकेश सिंह, अवधेश सिंह, विजय तिवारी, विनोद दास, वैद्य रामसरन दास, अभिलाष दास, कमलेश साहेब, नाथ साहेब, संत कलनाथ साहेब, राम निवास साहेब, महादेव साहेब, अजब सिंह, पवन सिंह, धर्मदास साहेब हरियाणा, प्रकाश साहेब जोधपुर, प्रेम दास साहेब मध्यप्रदेश, गोविंद साहेब, राजेंद्र साहेब, लक्ष्मन साहेब, स्वामी जी, दिनेश, विवेक, धर्मराज आदि मौजूद रहे।
आवा चलीं सद्गुरु के द्वार-
मगहर। कबीर समाधि परिसर में कबीर भजन का आयोजन महंत विचारदास के सानिध्य में संपन्न हुआ। इसमें बड़ी संख्या में कबीर भक्त कबीर भजन का लुत्फ उठाते हुए भक्ति रस में झूमते रहे। कार्यक्रम में कबीर भजन की शुरुआत डॉ. हरिशरण शास्त्री ने अपने भजन आवा चली सद्गुरु के द्वार से की। इसके बाद उन्होंने सद्गुरु रीझकर कहा एक प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भक्ति रस का रसपान कराया। उसके बाद उन्होंने सुखिया सब संसार है और भाई रे द्वि जगदीश कहां से आया कह कौन बौराया सुनाकर लोगों को मुग्ध कर दिया।
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निर्गुण भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल, झूमते रहे श्रद्धालु
महंत विचार दास ने 50 भक्तों को ग्रहण कराई गुरु दीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर/संतकबीरनगर। सद्गुरु कबीर के प्राकट्य दिवस पर बृहस्पतिवार की देर शाम चौका आरती के साथ दीक्षा का कार्यक्रम हुआ। महंत विचार दास ने 50 भक्तों को गुरु दीक्षा दी। इस दौरान निर्गुण भजन का गायन हुआ। इससे माहौल भक्तिमय हो गया।
सद्गुरु कबीर के प्राकट्य दिवस पर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, मध्यप्रदेश आदि जगहों से कबीर पंथी संत महात्मा और श्रद्धालु मगहर कबीर चौरा आए थे। सभी ने कबीर की समाधि और मजार के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही चौका आरती, गुरु पूजा आदि में हिस्सा लिया। चौका आरती व दीक्षा कार्यक्रम के दौरान महंत विचार दास ने कहा कि बिना गुरु दीक्षा के मानव शरीर अधूरा माना गया है। मनुष्य जब गुरु दीक्षा प्राप्त कर लेता है, तो उसे गुरु से अलौकिक ज्ञान प्राप्त होता रहता है। उसके बाद व्यक्ति के जीवन में बदलाव आने लगता है। इसलिए सद्गुरु कबीर ने कहा है कि निराकार ब्रह्म को ही गुरु मान उनके द्वारा दिखाए गए सद्मार्ग का अनुसरण करते हुए जीवन के झंझावतों से छुटकारा पाया जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सही मार्ग पर ले जाने वाला एक मात्र गुरु को ही माना गया है। उन्होंने कबीर के दोहे गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागों पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय सुनाया। कहा कि सद्गुरु ही हमें गोविंद अर्थात परमात्मा का ज्ञान देता है। ऐसे में गुरु का स्थान स्वयं ही बड़ा हो जाता है। गुरु हमेशा अपने भक्तों को सत्य, प्रेम, सौहार्द के रास्ते पर चलने की सीख देता है। इस मौके पर कबीर के अनुयायी भक्तों ने चौका आरती के दौरान कलश स्थापित कर नारियल, फल, पान का पत्ता, धूप, दीप से पूजन आदि करने के बाद महंत विचार दास से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर डॉ. हरिशरण शास्त्री, संतकेशव दास, संत अरविंद दास शास्त्री, पुजारी शांतिदास, सेवानिवृत्त शिक्षक रामशंकर यादव, प्रधानाचार्य डॉ. राकेश सिंह, अवधेश सिंह, विजय तिवारी, विनोद दास, वैद्य रामसरन दास, अभिलाष दास, कमलेश साहेब, नाथ साहेब, संत कलनाथ साहेब, राम निवास साहेब, महादेव साहेब, अजब सिंह, पवन सिंह, धर्मदास साहेब हरियाणा, प्रकाश साहेब जोधपुर, प्रेम दास साहेब मध्यप्रदेश, गोविंद साहेब, राजेंद्र साहेब, लक्ष्मन साहेब, स्वामी जी, दिनेश, विवेक, धर्मराज आदि मौजूद रहे।
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आवा चलीं सद्गुरु के द्वार-
मगहर। कबीर समाधि परिसर में कबीर भजन का आयोजन महंत विचारदास के सानिध्य में संपन्न हुआ। इसमें बड़ी संख्या में कबीर भक्त कबीर भजन का लुत्फ उठाते हुए भक्ति रस में झूमते रहे। कार्यक्रम में कबीर भजन की शुरुआत डॉ. हरिशरण शास्त्री ने अपने भजन आवा चली सद्गुरु के द्वार से की। इसके बाद उन्होंने सद्गुरु रीझकर कहा एक प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भक्ति रस का रसपान कराया। उसके बाद उन्होंने सुखिया सब संसार है और भाई रे द्वि जगदीश कहां से आया कह कौन बौराया सुनाकर लोगों को मुग्ध कर दिया।
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