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Sant Kabir Nagar News: कपड़ा छपाई मिल को पुनर्जीवित करने की पहल
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खलीलाबाद में बंद पड़ी कपड़ा छपाई मिल। संवाद
संतकबीरनगर। खलीलाबाद की बंद पड़ी कपड़ा छपाई एवं प्रोसेसिंग मिल को पुनर्जीवित करने की पहल शुरू हो गई है। इसके लिए उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास विभाग सहित कई विभागों को पत्र लिखा है।
इसके बाद अब उद्योग विभाग प्रस्ताव को उद्योग बंधु समिति की बैठक में रखने की तैयारी कर रहा है, जिसमें अधिकारियों संग इस पर चर्चा की जाएगी। इससे न केवल बंद पड़ी औद्योगिक इकाई शुरू होगी बल्कि पूर्वांचल का औद्योगिक विकास होगा। साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार का भी सृजन होगा।
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने कहा कि खलीलाबाद के औद्योगिक स्थान (एग्रो) स्थित बंद पड़ी कपड़ा छपाई एवं प्रोसेसिंग मिल (प्रोसेस हाउस) एक समय में पूर्वांचल के वस्त्र एवं हथकरघा उद्योग की जीवन रेखा थी। 1980 के दशक में स्थापित प्रोसेस हाउस को हथकरघा निगम द्वारा संचालित किया जाता था।
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यहां कपड़ों की ब्लीचिंग, डाईंग, प्रिंटिंग एवं फिनिशिंग की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध थीं। इस इकाई से जनपद के साथ-साथ बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया एवं आसपास के अन्य जिलों के हजारों बुनकर कारीगर एवं वस्त्र उद्यमी प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे।
बाद में प्रतिकूल परिस्थितियों, वित्तीय संकट एवं प्रबंधन समस्याओं के कारण वर्ष 1999 में यह इकाई बंद हो गई। इसके बंद होने से श्रमिकों की आजीविका भी ठप हो गई। बुनकरों को अपने उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर होना पड़ा। इस कारण वस्त्र उद्योग धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया। ऐसे में बंद पड़े प्रोसेस हाउस को दोबारा संचालित करना आवश्यक है।
इसके साथ ही इसे पूर्वांचल टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एवं गारमेंट पार्क के रूप में विकसित किया जाए। कपड़ा छपाई एवं प्रोसेसिंग मिल 2899 वर्ग मीटर भूमि में फैली है। संगठन का मानना है कि इस परियोजना से न केवल प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे, बल्कि जिला एक बार फिर पूर्वांचल के वस्त्र एवं रेडीमेड परिधान उद्योग का प्रमुख केंद्र बन सकेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा। निर्यात में वृद्धि होगी तथा प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
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इसके बाद अब उद्योग विभाग प्रस्ताव को उद्योग बंधु समिति की बैठक में रखने की तैयारी कर रहा है, जिसमें अधिकारियों संग इस पर चर्चा की जाएगी। इससे न केवल बंद पड़ी औद्योगिक इकाई शुरू होगी बल्कि पूर्वांचल का औद्योगिक विकास होगा। साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार का भी सृजन होगा।
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इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने कहा कि खलीलाबाद के औद्योगिक स्थान (एग्रो) स्थित बंद पड़ी कपड़ा छपाई एवं प्रोसेसिंग मिल (प्रोसेस हाउस) एक समय में पूर्वांचल के वस्त्र एवं हथकरघा उद्योग की जीवन रेखा थी। 1980 के दशक में स्थापित प्रोसेस हाउस को हथकरघा निगम द्वारा संचालित किया जाता था।
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यहां कपड़ों की ब्लीचिंग, डाईंग, प्रिंटिंग एवं फिनिशिंग की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध थीं। इस इकाई से जनपद के साथ-साथ बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया एवं आसपास के अन्य जिलों के हजारों बुनकर कारीगर एवं वस्त्र उद्यमी प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे।
बाद में प्रतिकूल परिस्थितियों, वित्तीय संकट एवं प्रबंधन समस्याओं के कारण वर्ष 1999 में यह इकाई बंद हो गई। इसके बंद होने से श्रमिकों की आजीविका भी ठप हो गई। बुनकरों को अपने उत्पादों की प्रोसेसिंग के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर होना पड़ा। इस कारण वस्त्र उद्योग धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया। ऐसे में बंद पड़े प्रोसेस हाउस को दोबारा संचालित करना आवश्यक है।
इसके साथ ही इसे पूर्वांचल टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एवं गारमेंट पार्क के रूप में विकसित किया जाए। कपड़ा छपाई एवं प्रोसेसिंग मिल 2899 वर्ग मीटर भूमि में फैली है। संगठन का मानना है कि इस परियोजना से न केवल प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे, बल्कि जिला एक बार फिर पूर्वांचल के वस्त्र एवं रेडीमेड परिधान उद्योग का प्रमुख केंद्र बन सकेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा। निर्यात में वृद्धि होगी तथा प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।