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2047 तक विश्व में दूसरे नंबर पर लाई जा सकती है भारत की इकोनॉमी : प्रो. दीपक
Sat, 24 Feb 2024 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 24 Feb 2024 11:47 PM IST
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संतकबीरनगर। हीरालाल रामनिवास स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय खलीलाबाद के वाणिज्य विभाग एवं यूवीपीएफ स्टार्ट अप लैब्स के संयुक्त तत्वावधान में इन्नोवेशन एंड स्टार्टअप इकोसिस्टम डेवलपमेंट विषयक पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने अपने अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रो. दीपक मिश्र ने भारत के 1991 के एलपीजी पॉलिसी से आज के विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में पांचवें नंबर तक के सफर की विकास यात्रा तथा किस प्रकार भारत की इकोनॉमी विश्व में दूसरे नंबर पर 2047 तक लाई जा सकती है पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय इकोनॉमी को इंडस्ट्रियल हब में तब्दील करने के अनिवार्य घटकों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को उनकी योग्यता एवं कौशल के अनुसार कार्य करने का अवसर मिले।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. मनीष शर्मा ने वर्तमान परिवेश में तकनीक में हो रहे परस्पर बदलाव को इंगित किया। दिल्ली के यूवीपीएफ स्टार्ट-अप लैब्स के कोऑर्डिनेटर अवधेश कुमार ने विद्यार्थियों को उद्यमिता, नवाचार और स्टार्ट अप के बारे में विस्तार से बताया। आभार ज्ञापन प्राचार्य प्रोफेसर ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने किया। संचालन सहायक आचार्य विद्या भूषण ने किया।
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इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश चंद्र मिश्र, प्रो. विजय कृष्ण ओझा, प्रो. विजय कुमार राय, प्रो. दिनेश कुमार गुप्त, डाॅ. पूर्णेश नारायण सिंह, डॉ. शशिकांत राव, विनय सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यशाला में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्यो व 173 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
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मुख्य अतिथि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रो. दीपक मिश्र ने भारत के 1991 के एलपीजी पॉलिसी से आज के विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में पांचवें नंबर तक के सफर की विकास यात्रा तथा किस प्रकार भारत की इकोनॉमी विश्व में दूसरे नंबर पर 2047 तक लाई जा सकती है पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय इकोनॉमी को इंडस्ट्रियल हब में तब्दील करने के अनिवार्य घटकों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को उनकी योग्यता एवं कौशल के अनुसार कार्य करने का अवसर मिले।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. मनीष शर्मा ने वर्तमान परिवेश में तकनीक में हो रहे परस्पर बदलाव को इंगित किया। दिल्ली के यूवीपीएफ स्टार्ट-अप लैब्स के कोऑर्डिनेटर अवधेश कुमार ने विद्यार्थियों को उद्यमिता, नवाचार और स्टार्ट अप के बारे में विस्तार से बताया। आभार ज्ञापन प्राचार्य प्रोफेसर ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने किया। संचालन सहायक आचार्य विद्या भूषण ने किया।
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इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश चंद्र मिश्र, प्रो. विजय कृष्ण ओझा, प्रो. विजय कुमार राय, प्रो. दिनेश कुमार गुप्त, डाॅ. पूर्णेश नारायण सिंह, डॉ. शशिकांत राव, विनय सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यशाला में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्यो व 173 विद्यार्थियों ने भाग लिया।