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पहले पति फिर पत्नी ने तोड़ दिया दम।
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पति की मौत के आठ घंटे के बाद पत्नी ने भी तोड़ा दम
धनघटा (संतकबीरनगर )। क्षेत्र के मौर गांव में मंगलवार को बीमारी से पति की मौत हो गई। अभी पति के शव के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। उसी बीच सदमे से पत्नी की भी मौत हो गई। आठ घंटे के अंतराल में पति-पत्नी की हुई मौत से गांव में कोहराम मच गया। सरयू के चहोड़ा घाट पर एक ही चिता पर दंपती का शव रखा गया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोग इस तरह की मौत पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे थे।
धनघटा क्षेत्र के मौर गांव निवासी 58 वर्षीय रामवृक्ष बेलदार की तबीयत काफी दिनों से खराब चल रही थी। उनका इलाज घर पर ही परिवार के लोग करवा रहे थे। सोमवार की रात रामवृक्ष की मौत हो गई। उनकी मौत से परिवार के लोग सदमे में थे। पति की मौत के गम को 55 वर्षीय पत्नी प्रभावती देवी बर्दाश्त नहीं कर पाई। ग्राम प्रधान कन्हैया लाल यादव के मुताबिक मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे दाह संस्कार के लिए जब रामवृक्ष की अरथी उठाने की तैयारी चल रही थी। उसी समय पत्नी प्रभावती रोते-रोते अचेत हो गई। अचेत प्रभावती के शरीर को जब हिलाया डुलाया गया तो शरीर से कोई हरकत नहीं हुई। उसके बाद तत्काल डॉक्टर को बुलाया गया और डॉक्टर ने प्रभावती को देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। पति-पत्नी की मौत पर परिवार में कोहराम मच गया। बेटा रणविजय और रणधीर ने मां-बाप की अरथी को कंधा देकर सरयू नदी के चहोड़ा घाट पर पहुंचाए। जहां दंपती का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।
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धनघटा (संतकबीरनगर )। क्षेत्र के मौर गांव में मंगलवार को बीमारी से पति की मौत हो गई। अभी पति के शव के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। उसी बीच सदमे से पत्नी की भी मौत हो गई। आठ घंटे के अंतराल में पति-पत्नी की हुई मौत से गांव में कोहराम मच गया। सरयू के चहोड़ा घाट पर एक ही चिता पर दंपती का शव रखा गया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोग इस तरह की मौत पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे थे।
धनघटा क्षेत्र के मौर गांव निवासी 58 वर्षीय रामवृक्ष बेलदार की तबीयत काफी दिनों से खराब चल रही थी। उनका इलाज घर पर ही परिवार के लोग करवा रहे थे। सोमवार की रात रामवृक्ष की मौत हो गई। उनकी मौत से परिवार के लोग सदमे में थे। पति की मौत के गम को 55 वर्षीय पत्नी प्रभावती देवी बर्दाश्त नहीं कर पाई। ग्राम प्रधान कन्हैया लाल यादव के मुताबिक मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे दाह संस्कार के लिए जब रामवृक्ष की अरथी उठाने की तैयारी चल रही थी। उसी समय पत्नी प्रभावती रोते-रोते अचेत हो गई। अचेत प्रभावती के शरीर को जब हिलाया डुलाया गया तो शरीर से कोई हरकत नहीं हुई। उसके बाद तत्काल डॉक्टर को बुलाया गया और डॉक्टर ने प्रभावती को देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। पति-पत्नी की मौत पर परिवार में कोहराम मच गया। बेटा रणविजय और रणधीर ने मां-बाप की अरथी को कंधा देकर सरयू नदी के चहोड़ा घाट पर पहुंचाए। जहां दंपती का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया।
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