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बेघर बाढ़ पीड़ितों का छलका दर्द, मदद की दरकार
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धनघटा में नदी की कटान को देखते गांव के लोग।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
बेघर बाढ़ पीड़ितों का छलका दर्द, मदद की दरकार
धनघटा(संतकबीरनगर)। घाघरा नदी ने गाय घाट दक्षिणी गांव के पास कटान तेज कर दी है। दो महीने में 25 लोगों के मकान नदी में समा चुके हैं। 27 लोग अपने घरों को खुद तोड़कर ईंट सुरक्षित करने की जद्दोजहद कर रहे हैं। घाघरा नदी की बाढ़ से प्रभावित लोगों को रहने और खाने के लाले पड़ गए हैं। मवेशियों को खिलाने के लिए चारे नहीं हैं। बाढ़ पीड़ितों को मदद की दरकार है।
गाय घाट दक्षिणी गांव से छह किलोमीटर दक्षिण में बह रही घाघरा नदी को देखकर गांव के लोगाें ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि नदी उनके घरों को निशाना बनाएगी। बुधवार को जब हाथ में हथोड़ा और आंखों में आंसू लिए लोगों को आशियाने पर प्रहार करना पड़ रहा है तो उनका कलेजा फट जा रहा था। बाढ़ पीड़ितों के सामने मकान बनवाने की समस्या के साथ बेटी के हाथ पीले करने की चिंता भी है। दो महीने के भीतर अब तक घाघरा नदी कटान करते हुए 25 लोगों के मकान को अपने में समाहित कर चुकी है। जबकि 27 लोग अपना मकान तोड़कर ईंट सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटे हैं।
जोखन कहते हैं कि घर गंगा माई ले लीं। परिवार के लोग गांव में इनके-उनके घर रहकर गुजर कर रहे हैं। मई में बेटी की शादी करनी थी। नागेंद्र का कहना है कि उनकी पतोहू को आए सात माह भी नहीं हुआ और घर नदी में समा गया। पतोहू को उसके मायके भेज दिया, लेकिन वह वहां कब तक रहेगी। ईशदेव का दर्द है कि घर कट जाने के बाद चार दिन से परिवार के लोग गांव में पन्नी के नीचे रह रहे हैं। घर से बचाकर जो लाए थे, उससे परिवार का भोजन चल रहा है। मवेशी को खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है। सोना देवी का कहना है कि भगवान और गंगा माई ने उनके ऊपर विपत्ति का पहाड़ धकेल दिया।
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बुद्धिराम का कहना है कि सपने में भी नहीं सोचा था कि नदी की धारा में घर समा जाएगा। 20 साल पहले नदी यहां से छह किलोमीटर दक्षिण मे बह रही थी। धीरे-धीरे कटान करते हुए पहले किशोरी का पुरवा, उसके बाद जो खंड का पुरवा फिर गामा का पुरवा के अस्तित्व को समाप्त कर दिया। सुंदर का कहना है कि मकान कट जाने के बाद परिवार के चार सदस्य रिश्तेदार के घर रह रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि नदी जिस तरह कटान कर रही है, उससे यही लग रहा है कि 200 घर वाले गाय घाट दक्षिणी गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
पिछले वर्ष भी गाय घाट दक्षिणी गांव के नौ लोगों का मकान घाघरा नदी में विलीन हो गया था, जिन्हें आर्थिक सहायता के साथ बसने के लिए जमीन आवंटित कर दी गई थी। दो से तीन दिन के भीतर गायघाट में फिर घाघरा नदी की कटान से छह लोगों के घर नदी में समा गए हैं। इन लोगों को आर्थिक सहायता के साथ बसने के लिए जमीन का आवंटन किया जाएगा। नदी कटान कर रही है। लोगों को सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए। प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी।
रत्नेश तिवारी, तहसीलदार
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धनघटा(संतकबीरनगर)। घाघरा नदी ने गाय घाट दक्षिणी गांव के पास कटान तेज कर दी है। दो महीने में 25 लोगों के मकान नदी में समा चुके हैं। 27 लोग अपने घरों को खुद तोड़कर ईंट सुरक्षित करने की जद्दोजहद कर रहे हैं। घाघरा नदी की बाढ़ से प्रभावित लोगों को रहने और खाने के लाले पड़ गए हैं। मवेशियों को खिलाने के लिए चारे नहीं हैं। बाढ़ पीड़ितों को मदद की दरकार है।
गाय घाट दक्षिणी गांव से छह किलोमीटर दक्षिण में बह रही घाघरा नदी को देखकर गांव के लोगाें ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि नदी उनके घरों को निशाना बनाएगी। बुधवार को जब हाथ में हथोड़ा और आंखों में आंसू लिए लोगों को आशियाने पर प्रहार करना पड़ रहा है तो उनका कलेजा फट जा रहा था। बाढ़ पीड़ितों के सामने मकान बनवाने की समस्या के साथ बेटी के हाथ पीले करने की चिंता भी है। दो महीने के भीतर अब तक घाघरा नदी कटान करते हुए 25 लोगों के मकान को अपने में समाहित कर चुकी है। जबकि 27 लोग अपना मकान तोड़कर ईंट सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटे हैं।
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जोखन कहते हैं कि घर गंगा माई ले लीं। परिवार के लोग गांव में इनके-उनके घर रहकर गुजर कर रहे हैं। मई में बेटी की शादी करनी थी। नागेंद्र का कहना है कि उनकी पतोहू को आए सात माह भी नहीं हुआ और घर नदी में समा गया। पतोहू को उसके मायके भेज दिया, लेकिन वह वहां कब तक रहेगी। ईशदेव का दर्द है कि घर कट जाने के बाद चार दिन से परिवार के लोग गांव में पन्नी के नीचे रह रहे हैं। घर से बचाकर जो लाए थे, उससे परिवार का भोजन चल रहा है। मवेशी को खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है। सोना देवी का कहना है कि भगवान और गंगा माई ने उनके ऊपर विपत्ति का पहाड़ धकेल दिया।
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बुद्धिराम का कहना है कि सपने में भी नहीं सोचा था कि नदी की धारा में घर समा जाएगा। 20 साल पहले नदी यहां से छह किलोमीटर दक्षिण मे बह रही थी। धीरे-धीरे कटान करते हुए पहले किशोरी का पुरवा, उसके बाद जो खंड का पुरवा फिर गामा का पुरवा के अस्तित्व को समाप्त कर दिया। सुंदर का कहना है कि मकान कट जाने के बाद परिवार के चार सदस्य रिश्तेदार के घर रह रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि नदी जिस तरह कटान कर रही है, उससे यही लग रहा है कि 200 घर वाले गाय घाट दक्षिणी गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
पिछले वर्ष भी गाय घाट दक्षिणी गांव के नौ लोगों का मकान घाघरा नदी में विलीन हो गया था, जिन्हें आर्थिक सहायता के साथ बसने के लिए जमीन आवंटित कर दी गई थी। दो से तीन दिन के भीतर गायघाट में फिर घाघरा नदी की कटान से छह लोगों के घर नदी में समा गए हैं। इन लोगों को आर्थिक सहायता के साथ बसने के लिए जमीन का आवंटन किया जाएगा। नदी कटान कर रही है। लोगों को सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए। प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी।
रत्नेश तिवारी, तहसीलदार