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Sant Kabir Nagar News: फिजीशियन, हड्डी रोग के डॉक्टर की भरमार, हार्ट और न्यूरो के डॉक्टर नहीं
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संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में फिजीशियन, हड्डी रोग और सर्जन डॉक्टरों की भरमार है, लेकिन हार्ट और न्यूरो के डॉक्टर नहीं हैं। इससे इन बीमारी के मरीजों को भटकना पड़ रहा है। वह या तो फिजीशियन से इलाज कराएं या गोरखपुर जाएं।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 33 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 26 पदों पर चिकित्सकों की तैनाती है। चार माह में कुछ डॉक्टरों के स्थानांतरित होने के बाद 12 नए डॉक्टर मिले हैं। इनमें फिजीशियन, हड्डी रोग और सर्जन ही अधिक हैं। इसके साथ ही चर्म रोग, एनटी के चिकित्सक हैं। हार्ट व न्यूरो के चिकित्सक नहीं मिले हैं। इन बीमारी के प्रतिदिन 70 से 80 मरीज जिला अस्पताल इलाज के लिए पहुंचते हैं।
फिजीशियन से उनका इलाज कराना मजबूरी बन जाता है। अगर चिकित्सकों को समझ में आया तो इलाज करते हैं और न समझ में आने पर गोरखपुर दिखाने की सलाह देते हैं। बृहस्पतिवार को इलाज कराने आए महुली निवासी शिव कुमार, कर्री निवासी बैजनाथ ने बताया कि सीने में तीन दिन से अक्सर दर्द बना हुआ है, जिसे दिखाने आए थे। चिकित्सक ने देखा और कहा कि ईसीजी कराएं। इसके बाद ईसीजी कराया तो कुछ दिक्कत आई। इस पर दवा लिखी और गोरखपुर किसी हार्ट रोग विशेषज्ञ से दिखाने की सलाह दिया। यही हाल अन्य मरीजों का रहा।
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सीएमएस डॉ. महेश प्रसाद ने बताया कि हाई व न्यूूूरो के डॉक्टर नहीं हैं। इसके लिए महानिदेशालय को पत्राचार किया गया है। तैनाती वहीं से होनी है। फिर भी जो मरीज आते हैं उनका इलाज किया जाता है।
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 33 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 26 पदों पर चिकित्सकों की तैनाती है। चार माह में कुछ डॉक्टरों के स्थानांतरित होने के बाद 12 नए डॉक्टर मिले हैं। इनमें फिजीशियन, हड्डी रोग और सर्जन ही अधिक हैं। इसके साथ ही चर्म रोग, एनटी के चिकित्सक हैं। हार्ट व न्यूरो के चिकित्सक नहीं मिले हैं। इन बीमारी के प्रतिदिन 70 से 80 मरीज जिला अस्पताल इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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फिजीशियन से उनका इलाज कराना मजबूरी बन जाता है। अगर चिकित्सकों को समझ में आया तो इलाज करते हैं और न समझ में आने पर गोरखपुर दिखाने की सलाह देते हैं। बृहस्पतिवार को इलाज कराने आए महुली निवासी शिव कुमार, कर्री निवासी बैजनाथ ने बताया कि सीने में तीन दिन से अक्सर दर्द बना हुआ है, जिसे दिखाने आए थे। चिकित्सक ने देखा और कहा कि ईसीजी कराएं। इसके बाद ईसीजी कराया तो कुछ दिक्कत आई। इस पर दवा लिखी और गोरखपुर किसी हार्ट रोग विशेषज्ञ से दिखाने की सलाह दिया। यही हाल अन्य मरीजों का रहा।
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सीएमएस डॉ. महेश प्रसाद ने बताया कि हाई व न्यूूूरो के डॉक्टर नहीं हैं। इसके लिए महानिदेशालय को पत्राचार किया गया है। तैनाती वहीं से होनी है। फिर भी जो मरीज आते हैं उनका इलाज किया जाता है।