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हैंडबॉल खिलाड़ी मनीष पिता के सपने को किया पूरा
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हैंडबॉल खिलाड़ी मनीष पिता के सपने को किया पूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। हर पिता बेटे की बेहतरी के लिए सोचता है और सपने संजोता है। ऐसा ही एक सपना देखा था हरिहरपुर निवासी प्राइवेट शिक्षक रघुनंदन त्रिपाठी ने। जिसे बेटे मनीष त्रिपाठी ने संघर्षों की बदौलत पूरा कर दिखाया।
नगर पंचायत हरिहरपुर के रहने वाले रघुनंदन त्रिपाठी और उनकी पत्नी स्नेहलता त्रिपाठी एक प्राइवेट स्कूल में बतौर शिक्षक नौकरी करते थे। कम संसाधन के बावजूद शिक्षक दंपती बड़े बेटे मनीष त्रिपाठी को खिलाड़ी बनाना चाहते थे। उसका दाखिला उन्होंने पहले स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में कराया। यहां से मनीष मध्य प्रदेश चले गए। उन्होंने पिता के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की। दो साल पहले राष्ट्रीय स्तर पर हैंडबाल की अंडर 19 बालक वर्ग की प्रतियोगिताओं में अपने हुनर का लोहा मनवाया। मनीष ने 12 से अधिक देशों में हुई अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में अपनी टीम का प्रतिनिधित्व किया है। वर्तमान में मनीष सीआरपीएफ में एसआई के पद पर दिल्ली में तैनात हैं। मनीष ने बताया कि इस साल कोरोना महामारी ने उनसे उनके पिता का साया छीन लिया, लेकिन पिता की प्रेरणा आज भी उन्हें आत्मबल प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि अब मां की सेवा और छोटे भाई सतीश त्रिपाठी की बेहतर शिक्षा ही उनका मकसद है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। हर पिता बेटे की बेहतरी के लिए सोचता है और सपने संजोता है। ऐसा ही एक सपना देखा था हरिहरपुर निवासी प्राइवेट शिक्षक रघुनंदन त्रिपाठी ने। जिसे बेटे मनीष त्रिपाठी ने संघर्षों की बदौलत पूरा कर दिखाया।
नगर पंचायत हरिहरपुर के रहने वाले रघुनंदन त्रिपाठी और उनकी पत्नी स्नेहलता त्रिपाठी एक प्राइवेट स्कूल में बतौर शिक्षक नौकरी करते थे। कम संसाधन के बावजूद शिक्षक दंपती बड़े बेटे मनीष त्रिपाठी को खिलाड़ी बनाना चाहते थे। उसका दाखिला उन्होंने पहले स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में कराया। यहां से मनीष मध्य प्रदेश चले गए। उन्होंने पिता के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की। दो साल पहले राष्ट्रीय स्तर पर हैंडबाल की अंडर 19 बालक वर्ग की प्रतियोगिताओं में अपने हुनर का लोहा मनवाया। मनीष ने 12 से अधिक देशों में हुई अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में अपनी टीम का प्रतिनिधित्व किया है। वर्तमान में मनीष सीआरपीएफ में एसआई के पद पर दिल्ली में तैनात हैं। मनीष ने बताया कि इस साल कोरोना महामारी ने उनसे उनके पिता का साया छीन लिया, लेकिन पिता की प्रेरणा आज भी उन्हें आत्मबल प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि अब मां की सेवा और छोटे भाई सतीश त्रिपाठी की बेहतर शिक्षा ही उनका मकसद है।
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