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Sant Kabir Nagar News: जीएसटी सेंधमारी मामले की जांच शुरू, व्यापारियों में खलबली
Thu, 11 May 2023 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 11 May 2023 12:44 AM IST
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संतकबीरनगर। जिले में मौजूद ईंट भट्ठा मालिकों की ओर से पिछले पांच वर्षों में कोयले की खरीद के दौरान करीब 25 करोड़ रुपये के जीएसटी में सेंधमारी करने के मामले का मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। इस मामले की जांच शुरू होते ही व्यापारियों में खलबली मच गई है।
जीएसटी विभाग के आंकड़ों के अनुसार 10 से 15 ईंट भट्ठों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर के मालिकों ने जीएसटी जमा करने में बड़ा खेल किया है। इसमें कुछ ऐसे भी भट्ठा मालिक हैं, जिन्होंने लाखों रुपये के कोयले की खरीद के बाद भी जीएसटी जमा ही नहीं किया है।
अमर उजाला ने एक मई के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंडलायुक्त बस्ती को प्रकरण की जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव प्रथमेश कुमार ने दो मई को पत्र जारी कर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कर जमा न करने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई होगी। इससे ईंट भट्ठा मालिकों में खलबली मची है। ज्यादातर भट्ठा मालिक अपने भट्ठों के ई वे बिल से मिलान कर जीएसटी का बकाया जोड़ने में व्यस्त हैं। वहीं, कुछ कानूनी सलाह भी ले रहे हैं। शासन स्तर से शुरू हुई जांच के बाद ईंट के व्यवसाय से जुड़ा हर व्यक्ति हलकान है। लगभग 18 टन कोयले से एक लाख ईंट बनाई जाती है। कोयले का मूल्य 3,000 से लेकर 9,000 रुपये प्रति टन है। इस पर केंद्र सरकार 400 रुपये प्रति टन उपकर वसूलती है। ऐसे में लगभग सात लाख रुपये की ईंट का निर्माण करने के दौरान प्रयोग किए गए कोयले पर करीब 82 हजार रुपये जीएसटी के रूप में जमा करना होता है।
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प्रदेश सरकार ने इस भार को हल्का करने के लिए स्पेशल स्कीम चलाई है, जिसमें कुल कर पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है। बावजूद इसके, अधिकतर भट्ठा मालिकों ने जीएसटी जमा करने में हर संभव कोताही बरती है। कइयों ने तो जीएसटी जमा ही नहीं किया है। टैक्स रिटर्न जमा करते समय ऐसे व्यापारी अपना कुल व्यापार शून्य बताते हैं। जबकि इनका वास्तविक कारोबार करोड़ों रुपये का होता है। इन्हीं तथ्यों का संज्ञान लेते हुए शासन ने मामले की जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीएसटी विभाग कर न जमा करने वाले भट्ठा मालिकों को नोटिस भेज रहा है।
प्रकरण की जांच जिलाधिकारी संतकबीरनगर को सौंप दी गई है। दो दिन में रिपोर्ट मंगाकर विशेष सचिव को भेज दी जाएगी। आगे मिलने वाले निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-योगेश्वर राम मिश्र, मंडलायुक्त बस्ती
ईट भट्ठों पर उत्पादन और विक्रय के अनुपात पर काम होता है। अभी बहुत सारे भट्ठों में ईंट की खेप पड़ी हुई है। ईंट की बिक्री होने पर जीएसटी जमा कर दिया जाएगा।
- रवि उदय पाल, अध्यक्ष ईंट विक्रेता समिति
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जीएसटी विभाग के आंकड़ों के अनुसार 10 से 15 ईंट भट्ठों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर के मालिकों ने जीएसटी जमा करने में बड़ा खेल किया है। इसमें कुछ ऐसे भी भट्ठा मालिक हैं, जिन्होंने लाखों रुपये के कोयले की खरीद के बाद भी जीएसटी जमा ही नहीं किया है।
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अमर उजाला ने एक मई के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंडलायुक्त बस्ती को प्रकरण की जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव प्रथमेश कुमार ने दो मई को पत्र जारी कर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कर जमा न करने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई होगी। इससे ईंट भट्ठा मालिकों में खलबली मची है। ज्यादातर भट्ठा मालिक अपने भट्ठों के ई वे बिल से मिलान कर जीएसटी का बकाया जोड़ने में व्यस्त हैं। वहीं, कुछ कानूनी सलाह भी ले रहे हैं। शासन स्तर से शुरू हुई जांच के बाद ईंट के व्यवसाय से जुड़ा हर व्यक्ति हलकान है। लगभग 18 टन कोयले से एक लाख ईंट बनाई जाती है। कोयले का मूल्य 3,000 से लेकर 9,000 रुपये प्रति टन है। इस पर केंद्र सरकार 400 रुपये प्रति टन उपकर वसूलती है। ऐसे में लगभग सात लाख रुपये की ईंट का निर्माण करने के दौरान प्रयोग किए गए कोयले पर करीब 82 हजार रुपये जीएसटी के रूप में जमा करना होता है।
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प्रदेश सरकार ने इस भार को हल्का करने के लिए स्पेशल स्कीम चलाई है, जिसमें कुल कर पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है। बावजूद इसके, अधिकतर भट्ठा मालिकों ने जीएसटी जमा करने में हर संभव कोताही बरती है। कइयों ने तो जीएसटी जमा ही नहीं किया है। टैक्स रिटर्न जमा करते समय ऐसे व्यापारी अपना कुल व्यापार शून्य बताते हैं। जबकि इनका वास्तविक कारोबार करोड़ों रुपये का होता है। इन्हीं तथ्यों का संज्ञान लेते हुए शासन ने मामले की जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीएसटी विभाग कर न जमा करने वाले भट्ठा मालिकों को नोटिस भेज रहा है।
प्रकरण की जांच जिलाधिकारी संतकबीरनगर को सौंप दी गई है। दो दिन में रिपोर्ट मंगाकर विशेष सचिव को भेज दी जाएगी। आगे मिलने वाले निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-योगेश्वर राम मिश्र, मंडलायुक्त बस्ती
ईट भट्ठों पर उत्पादन और विक्रय के अनुपात पर काम होता है। अभी बहुत सारे भट्ठों में ईंट की खेप पड़ी हुई है। ईंट की बिक्री होने पर जीएसटी जमा कर दिया जाएगा।
- रवि उदय पाल, अध्यक्ष ईंट विक्रेता समिति