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वर्षा और जीवन के लिए तो गोवर्धन पर्वत अधिक महत्वपूर्ण : आचार्य श्रवणजी
Tue, 18 Nov 2025 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:11 AM IST
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अछियां में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचनकर्ता श्रवण महाराज
मेंहदावल। नगर पंचायत मेंहदावल के अछियां गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सोमवार को गोवर्धन पूजा की कथा हुई। चित्रकूट धाम से आए प्रवचनकर्ता आचार्य श्रवण जी महाराज ने गोवर्धन पूजा के महत्व के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि एक समय ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा करते थे। भगवान कृष्ण ने उन्हें बताया कि वर्षा और जीवन के लिए तो गोवर्धन पर्वत अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। ब्रजवासियों के इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन की पूजा करने से देवराज इंद्र बहुत क्रोधित हो गए। उन्होंने बदला लेने के लिए मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। बारिश इतनी भयानक थी। ब्रजवासी डर गए। तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी। कृष्ण ने सात दिनों तक पर्वत को अपनी उंगली पर उठाए रखा। किसी को भी बारिश या नुकसान से नहीं बचाया। जब इंद्र को पता चला कि मुकाबला करने वाले स्वयं कृष्ण हैं। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और बारिश रोक दी। इसके बाद ही श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को हर साल गोवर्धन पर्वत की पूजा करने और 'अन्नकूट' मनाने का आदेश दिया। इसी दिन से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई, जिसमें कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की आराधना की जाती है। इस अवसर पर मुख्य यजमान चंद्रशेखर पांडेय, रामउजागिर मिश्र, राम निहोरा पांडेय, रमेश सिंह, चंद्रप्रकाश पांडेय, डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडेय, डॉ. विश्वमूर्ति मणि त्रिपाठी, विनोद कुमार पांडेय, राघवेन्द्र पांडेय, राम प्रकाश पांडेय , अनूप कुमार सिंह, विकास चंद्र त्रिपाठी, नितिन पांडेय, विनय सिंह, रविंद्र यादव, ज्वाला पाल, कौशलेंद्र राय आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि एक समय ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा करते थे। भगवान कृष्ण ने उन्हें बताया कि वर्षा और जीवन के लिए तो गोवर्धन पर्वत अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। ब्रजवासियों के इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन की पूजा करने से देवराज इंद्र बहुत क्रोधित हो गए। उन्होंने बदला लेने के लिए मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। बारिश इतनी भयानक थी। ब्रजवासी डर गए। तब भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी। कृष्ण ने सात दिनों तक पर्वत को अपनी उंगली पर उठाए रखा। किसी को भी बारिश या नुकसान से नहीं बचाया। जब इंद्र को पता चला कि मुकाबला करने वाले स्वयं कृष्ण हैं। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और बारिश रोक दी। इसके बाद ही श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को हर साल गोवर्धन पर्वत की पूजा करने और 'अन्नकूट' मनाने का आदेश दिया। इसी दिन से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई, जिसमें कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की आराधना की जाती है। इस अवसर पर मुख्य यजमान चंद्रशेखर पांडेय, रामउजागिर मिश्र, राम निहोरा पांडेय, रमेश सिंह, चंद्रप्रकाश पांडेय, डॉ. धीरेंद्र कुमार पांडेय, डॉ. विश्वमूर्ति मणि त्रिपाठी, विनोद कुमार पांडेय, राघवेन्द्र पांडेय, राम प्रकाश पांडेय , अनूप कुमार सिंह, विकास चंद्र त्रिपाठी, नितिन पांडेय, विनय सिंह, रविंद्र यादव, ज्वाला पाल, कौशलेंद्र राय आदि मौजूद रहे।
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