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उफान पर घाघरा नदी, पानी से घिरे 38 गांव

Thu, 19 Aug 2021 10:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 10:54 PM IST
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ghagra river news
गाय घाट दक्षिणी गांव के पास पहुंचा बाढ़ का पानी।संवाद - फोटो : KHALILABAD
उफान पर घाघरा नदी, पानी से घिरे 38 गांव
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- ग्रामीणों को झेलनी पड़ रही समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी की बाढ़ से एमबीडी बांध के बीच बसे 38 गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। जिससे गांव वालों के सामने तमाम तरह की समस्याएं खड़ी हो गई है। नदी बृहस्पतिवार की सुबह खतरे के निशान 79.35 मीटर से 10 सेंटीमीटर ऊपर यानि 79.45 पर बह रही थी। शाम चार बजे जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की कमी आई।

एमबीडी बांध और घाघरा नदी के मध्य बसे गायघाट दक्षिणी, ढोलबजा, गुनवतिया, चकदहा, सुअरहा, दौलतपुर, सियर कला, सरैया समेत 38 गांव बसे हैं। गांव निवासी बालेन्द्र उर्फ पप्पू, रामजीत, देवशरन, कपिलदेव, रामजनम, रमाकांत, सुरेश आदि का कहना है कि इस साल जिस तरह नदी घट बढ़कर कटान व बाढ़ से यहां के लोगों को उजाड़ रही है उस तरह की विभिषिका कभी देखने को नहीं मिला था। डेढ़ माह के अंदर नदी चौथी बार नदी तबाही मचा रही है। कटान और बाढ़ के कारण गायघाट दक्षिणी गांव के 18 परिवार पहले ही घर से पलायन कर चुके हैं। पलायन करने वाले लोग या तो अपने रिश्तेदार के घर शरण लिए हुए हैं या कूरी बाजार में किराए के मकान में रहने को विवश हैं। वैसे तो तहसील प्रशासन तिघरा में स्थित एक इंटर कॉलेज में बाढ़ राहत केंद्र संचालित करने का दावा कर रहा है लेकिन गांव के लोग इसे कहने मात्र को बता रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से अभी तक नाव के अलावा किसी अन्य तरह की कोई सहायता नहीं मिली है। सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारा की है। एमबीडी बांध पर पशुु चारा चरकर किसी तरह जी रहे हैं। कटान के कारण खेती पहले ही नदी में समाहित हो गई है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीष चंद्र का कहना है कि दो दिनों तक नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ते हुए खतरे के निशान को इस सत्र में पहली बार पार कर गया था, लेकिन बृहस्पतिवार की शाम नदी के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर गिरावट हुआ। तहसीलदार रत्नेश तिवारी का कहना है कि गांव के लोगों को आने-जाने के लिए 16 नावें लगाई जा चुकी हैं। बाढ़ राहत केंद्र में आने वालों के खाने-पीने का पूरा व्यवस्था किया गया है। लेखपाल और कानूनगो हमेशा बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों के बीच बने हुए हैं।
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