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Sant Kabir Nagar News: खतरे के निशान से 40 सेमी नीचे घाघरा, बांधों पर दबाव
Fri, 08 Aug 2025 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:17 PM IST
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बिड़हरघाट पुल के पास उफनाई हुई सरयू
महुली/रोसया बाजार। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। अपने उफान पर बह रही सरयू खतरे के निशान से सिर्फ 40 सेंटीमीटर नीचे है। इससे बांधों पर पानी का दबाव बढ़ा है। कई गांव पानी से घिरे हैं। मरिया के पास स्थित खालेपुरवा गांव में नदी का पानी लोगों के घरों तक पहुंच चुका है। वहीं गांवों का बंधे और सड़क से संपर्क टूट गया है। प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट है और बंधों पर पेट्रोलिंग की जा रही है।
सरयू के लगातार बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल व्याप्त है। वहीं बांध व घाघरा नदी के बीच बसे कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। वर्तमान समय में पानी अपना पूरा दबाव बंधों पर बनाए हुए है। लेकिन नदी की मुख्य धारा करीब न होने से बंधे के अंदर पानी रिस रहा है। तुर्कवलिया, भिखारीपुर, गायघाट, खैरगाढ़, खालेपुरवा गांव में जाने के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। इन रास्तों पर घुटनों तक पानी आ गया है। पशुओं के लिए चारा काटने के लिए लोग नाव का सहारा ले रहे हैं।
जलस्तर में लगातार वृद्धि से परडिया गांव के 30 घरों का केवटाही पुरवा, नकहा का 25 घरों की निषाद बस्ती, 200 घरों का नरायनपुर गांव, छपरा मगर्वी गांव का लगभग 80 घरों का कुर्मीयान टोला व कटहा-भिटहा गांव का 150 घरों का मदरहा पुरवा भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। वहीं भोतहा, हरिवंशपुर, नकहा, तेजपुर, माझाखड़गपुर रामपुर, पंडरिया सहित दर्जनभर गांवों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। जिससे लोगों में पशुओं के चारे के भी संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों में सीताराम, योगेंद्र निषाद, रामपियारे इंद्रेश निषाद, रामाज्ञा निषाद, झिनकान, बृजभान, बहादुर, लालमन, रामाशीष सहित तमाम लोगो का कहना है। कि हम लोग बहुत दिनों से इस परेशानी से झेलते चलें आ रहे हैं कई दिनों तक खेतों में बाढ़ का पानी भरने से अरहर, धान, सब्जी की खेती बर्बाद हो जाती है। पशुओं के चारे के संकट बढ़ गया है।
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सरयू के लगातार बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल व्याप्त है। वहीं बांध व घाघरा नदी के बीच बसे कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। वर्तमान समय में पानी अपना पूरा दबाव बंधों पर बनाए हुए है। लेकिन नदी की मुख्य धारा करीब न होने से बंधे के अंदर पानी रिस रहा है। तुर्कवलिया, भिखारीपुर, गायघाट, खैरगाढ़, खालेपुरवा गांव में जाने के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। इन रास्तों पर घुटनों तक पानी आ गया है। पशुओं के लिए चारा काटने के लिए लोग नाव का सहारा ले रहे हैं।
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जलस्तर में लगातार वृद्धि से परडिया गांव के 30 घरों का केवटाही पुरवा, नकहा का 25 घरों की निषाद बस्ती, 200 घरों का नरायनपुर गांव, छपरा मगर्वी गांव का लगभग 80 घरों का कुर्मीयान टोला व कटहा-भिटहा गांव का 150 घरों का मदरहा पुरवा भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। वहीं भोतहा, हरिवंशपुर, नकहा, तेजपुर, माझाखड़गपुर रामपुर, पंडरिया सहित दर्जनभर गांवों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। जिससे लोगों में पशुओं के चारे के भी संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों में सीताराम, योगेंद्र निषाद, रामपियारे इंद्रेश निषाद, रामाज्ञा निषाद, झिनकान, बृजभान, बहादुर, लालमन, रामाशीष सहित तमाम लोगो का कहना है। कि हम लोग बहुत दिनों से इस परेशानी से झेलते चलें आ रहे हैं कई दिनों तक खेतों में बाढ़ का पानी भरने से अरहर, धान, सब्जी की खेती बर्बाद हो जाती है। पशुओं के चारे के संकट बढ़ गया है।
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