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एमबीडी बांध के करीब पहुंची घाघरा
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तुर्कवालिया नायक गांव के पास घाघरा नदी की कटान को रोकने का प्रयास करते मजदूर।
- फोटो : KHALILABAD
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एमबीडी बांध के करीब पहुंची घाघरा
धनघटा(संतकबीरनगर)। घाघरा नदी की कटान से एमबीडी बांध पर खतरा बढ़ता जा रहा है। कटान को काबू करने के लिए सिंचाई विभाग 15 दिनों से उपाय कर रहा है, लेकिन अब तक के सारे प्रयास विफल साबित हुए हैं। घाघरा नदी बृहस्पतिवार की देर शाम बंधे के बिल्कुल करीब पहुंच गई है। इससे समीपवर्ती गांव के लोग भयभीत है।
वर्ष 2013 में नदी ने जिस स्थान पर कटान करके एमबीडी बांध समेत करीब 300 घरों को अपने में समाहित करते हुए इलाके में भारी तबाही मचाई थी, ठीक उसी स्थान पर कटान करते हुए नदी इस वर्ष भी बंधे के करीब पहुंच गई है। गांव वालों का कहना है कि अब तक करीब 500 मीटर खेती योग्य भूमि को अपने में समाहित करते हुए नदी आगे बढ़ रही है। नदी जब बंधे से 60 से 70 मीटर दूरी पर कटान कर रही थी तो सिंचाई विभाग के अधिकारी कटान रोकने के लिए बालू और मिट्टी भरी बोरियां से ठोकर बनाकर कटान रोकने का प्रयास कर रहे थे। सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गए ठोकर को नदी की कटान जमींदोज करके बंधे से मुश्किल से 40 मीटर की दूरी पर तेजी के साथ कटान कर रही है। कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के लोग बोरी का जाल बनाकर नदी में डाल रहे हैं, जिसे नदी अपने में समाहित करते हुए आगे बढ़ती जा रही है।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र का कहना है कि कटान को स्थाई रूप से रोकने के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बंधे से 11 मीटर दूरी तक पत्थर से पिचिंग कार्य कराया गया है। उम्मीद है कि नदी की कटान आकर वही रूक जाएगी। बंधा पूरी तरह से सुरक्षित है और आगे भी इसे सुरक्षित रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर बोल्डर भी लगाए जाएंगे। दूसरी तरफ भाजपा के हैसर मंडल महामंत्री प्रदीप कुमार अग्रहरी ने बताया कि कटान की स्थिति और बंधे के संबंध में संगठन द्वारा जिलाध्यक्ष के माध्यम से शासन को जानकारी जल्द ही दी जाएगी। जिससे कटान के रोकने का उपाय हो सके। वही तुर्कवालिया नायक गांव के प्रधान और सपा के जिला महासचिव वीरेंद्र यादव ने कहा कि कटान को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है। जनता को भुलावा देने के लिए बालू की दीवार खड़ी करके कटान रोकने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है।वीरेंद्र यादव
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धनघटा(संतकबीरनगर)। घाघरा नदी की कटान से एमबीडी बांध पर खतरा बढ़ता जा रहा है। कटान को काबू करने के लिए सिंचाई विभाग 15 दिनों से उपाय कर रहा है, लेकिन अब तक के सारे प्रयास विफल साबित हुए हैं। घाघरा नदी बृहस्पतिवार की देर शाम बंधे के बिल्कुल करीब पहुंच गई है। इससे समीपवर्ती गांव के लोग भयभीत है।
वर्ष 2013 में नदी ने जिस स्थान पर कटान करके एमबीडी बांध समेत करीब 300 घरों को अपने में समाहित करते हुए इलाके में भारी तबाही मचाई थी, ठीक उसी स्थान पर कटान करते हुए नदी इस वर्ष भी बंधे के करीब पहुंच गई है। गांव वालों का कहना है कि अब तक करीब 500 मीटर खेती योग्य भूमि को अपने में समाहित करते हुए नदी आगे बढ़ रही है। नदी जब बंधे से 60 से 70 मीटर दूरी पर कटान कर रही थी तो सिंचाई विभाग के अधिकारी कटान रोकने के लिए बालू और मिट्टी भरी बोरियां से ठोकर बनाकर कटान रोकने का प्रयास कर रहे थे। सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गए ठोकर को नदी की कटान जमींदोज करके बंधे से मुश्किल से 40 मीटर की दूरी पर तेजी के साथ कटान कर रही है। कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के लोग बोरी का जाल बनाकर नदी में डाल रहे हैं, जिसे नदी अपने में समाहित करते हुए आगे बढ़ती जा रही है।
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सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र का कहना है कि कटान को स्थाई रूप से रोकने के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बंधे से 11 मीटर दूरी तक पत्थर से पिचिंग कार्य कराया गया है। उम्मीद है कि नदी की कटान आकर वही रूक जाएगी। बंधा पूरी तरह से सुरक्षित है और आगे भी इसे सुरक्षित रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर बोल्डर भी लगाए जाएंगे। दूसरी तरफ भाजपा के हैसर मंडल महामंत्री प्रदीप कुमार अग्रहरी ने बताया कि कटान की स्थिति और बंधे के संबंध में संगठन द्वारा जिलाध्यक्ष के माध्यम से शासन को जानकारी जल्द ही दी जाएगी। जिससे कटान के रोकने का उपाय हो सके। वही तुर्कवालिया नायक गांव के प्रधान और सपा के जिला महासचिव वीरेंद्र यादव ने कहा कि कटान को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है। जनता को भुलावा देने के लिए बालू की दीवार खड़ी करके कटान रोकने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है।वीरेंद्र यादव
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