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खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही घाघरा
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खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही घाघरा
बाढ़ प्रभावित गांवों में समस्या है बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। शनिवार की सुबह से शाम तक घाघरा नदी का जल स्तर खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर स्थिर है। बाढ़ से प्रभावित गांव के लोगों की समस्या भी लगातार बरकरार है।
घाघरा नदी इस सत्र में दो माह के अंदर पांचवीं बार उफान पर आकर एमबीडी बांध और नदी के बीच बसे 38 गांवों में तबाही मचाई हुई है। बाढ़ से चारों तरफ घिरे गांवों के अधिकतर लोग अपने-अपने घरों पर रह रहे हैं। नदी की कटान से मकान कट जाने के कारण सात परिवार के लोग रिश्तेदारी में शरण लेने को विवश हैं। बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी समस्या उजाले की है। गांववालों का कहना है कि जब से नदी बढ़कर गांव के समीप आई तभी से विद्युत निगम इधर की सप्लाई बाधित कर दी। दिन डूबने के बाद अंधेरा होने के कारण भय लगने लगता है। प्रशासन न तो मिट्टी का तेल मुहैया करा रहा है और न ही मोमबत्ती का वितरण किया है। टॉर्च के सहारे खाना पकाना व खाना मजबूरी हो गई है। शुक्रवार की शाम से घाघरा नदी का जल स्तर खतरे के निशान 79.35 मीटर से बढ़कर 79.45 मीटर पर जाकर स्थिर है। शनिवार को भी नदी का जलस्तर पूरी तरह से स्थिर रहा। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में जरूरत के अनुसार नावें लगा दी गई हैं। बाढ़ राहत केंद्र तिघरा पर घर से पलायन करके आने वालों के रहने व खाने की व्यवस्था की गई है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में समस्या है बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। शनिवार की सुबह से शाम तक घाघरा नदी का जल स्तर खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर स्थिर है। बाढ़ से प्रभावित गांव के लोगों की समस्या भी लगातार बरकरार है।
घाघरा नदी इस सत्र में दो माह के अंदर पांचवीं बार उफान पर आकर एमबीडी बांध और नदी के बीच बसे 38 गांवों में तबाही मचाई हुई है। बाढ़ से चारों तरफ घिरे गांवों के अधिकतर लोग अपने-अपने घरों पर रह रहे हैं। नदी की कटान से मकान कट जाने के कारण सात परिवार के लोग रिश्तेदारी में शरण लेने को विवश हैं। बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी समस्या उजाले की है। गांववालों का कहना है कि जब से नदी बढ़कर गांव के समीप आई तभी से विद्युत निगम इधर की सप्लाई बाधित कर दी। दिन डूबने के बाद अंधेरा होने के कारण भय लगने लगता है। प्रशासन न तो मिट्टी का तेल मुहैया करा रहा है और न ही मोमबत्ती का वितरण किया है। टॉर्च के सहारे खाना पकाना व खाना मजबूरी हो गई है। शुक्रवार की शाम से घाघरा नदी का जल स्तर खतरे के निशान 79.35 मीटर से बढ़कर 79.45 मीटर पर जाकर स्थिर है। शनिवार को भी नदी का जलस्तर पूरी तरह से स्थिर रहा। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में जरूरत के अनुसार नावें लगा दी गई हैं। बाढ़ राहत केंद्र तिघरा पर घर से पलायन करके आने वालों के रहने व खाने की व्यवस्था की गई है।
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