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घाघरा नदी का पानी बढ़ने से बाढ़ पीड़ितों की बढ़ी परेशानी
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मेंहदावल तहसील क्षेत्र में बढ़ रहा राप्ती नदी का जलस्तर।
- फोटो : KHALILABAD
घाघरा नदी का पानी बढ़ने से बाढ़ पीड़ितों की बढ़ी परेशानी
- रहने, खाने और पशुओं को चारा खिलाने की सांसत झेल रहे लोग
- बिजली की सुविधा बंद, मोमबत्ती और टार्च के सहारे कर दूर कर रहे अंधेरा
- प्रशासनिक सहायता नहीं मिल पाने से व्यवस्था को कोस रहे
धनघटा। घाघरा नदी का पानी जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही है। अंधेरे में रहकर जीवन जीने का उपाय करना उनकी मजबूरी हो गई है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को घर से निकलने के लिए प्रशासन ने भले ही 33 नाव लगाए जाने का दावा कर रहा हो, लेकिन पीड़ितों की अन्य समस्याओं का समाधान करने में असफल है। प्रशासनिक विफलता बाढ़ पीड़ितों को भारी पड़ रही है।
घाघरा नदी और एमबीडी बांध के बीच धनघटा तहसील क्षेत्र के 22 गांव की करीब 11,000 की आबादी निवास करती है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद इन गांवों में वर्षों से तबाही मचती चली आ रही है। इस वर्ष अक्तूबर में घाघरा रौद्र रूप धारण कर जब खतरे के निशान के करीब पहुंच गई तो गायघाट दक्षिणी, गुनावतिया, चकदहा, ढोल बजा समेत 14 गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए। जिन लोगों का मकान गांव के किनारे था, उनके मकान में भी बाढ़ का पानी घुस गया। बाढ़ से प्रभावित गांव के लोगों को रहने खाने के लिए तिघरा स्थित एक इंटर कॉलेज में बाढ़ राहत केंद्र संचालित करने का काम तो प्रशासन कर रहा है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बार-बार अपील के बाद भी बाढ़ से प्रभावित गांव के लोग गांव को छोड़कर बाढ़ राहत शिविर पर नहीं पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ बाढ़ पीड़ित ईश्वर, सुभाष, सागर, राम कोमल, राम बुझ आदि का कहना है कि प्रशासन के लोग बार-बार बाढ़ राहत शिविर में जाने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन वहां पर व्यवस्था नाम की कोई चीज दिखाई नहीं दे रही है।
सबसे बड़ी समस्या पशुओं को खिलाने के लिए चारे की है। प्रशासन के लोग चारे की भी व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। नदी का पानी बढ़ने से विद्युत निगम ने बिजली सप्लाई बंद कर दिया है। लोग घरों पर मोमबत्ती और टॉर्च के सहारे उजाला कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन के लोग अभी तक मोमबत्ती और माचिस तक उपलब्ध नहीं करा पाए। गांव वालों का कहना है कि जब से कम्हरिया घाट पर फोरलेन सड़क बनी है, तभी से बाढ़ की समस्या यहां के लोगों के लिए और अधिक विकराल हो गई है। फोरलेन पर इधर से जल निकासी के लिए पुलिया निर्माण कराए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर जाकर देखने के बाद पुलिया बनवाए जाने की बात तो करते हैं, लेकिन पुलिया का निर्माण कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांव में 33 नावें लगाई जा चुकी हैं। अनाज और मोमबत्ती समेत अन्य सामान बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों में वितरित करने के लिए मांग की गई है। अनाज मिलने के बाद बाढ़ पीड़ितों में वितरित कर दी जाएगी।
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विधायक और डीएम ने बाढ़ पीड़ितों की सुनी समस्या, समाधान का दिया भरोसा
मंगलवार को डीएम प्रेम रंजन सिंह और एसपी सोनम कुमार गायघाट दक्षिणी, कुर्मियांन टोला, तुरकौलिया नायक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे तो लोगों ने उन्हें समस्याओं से अवगत कराया। अफसरों के साथ विधायक गणेश चंद चौहान भी मौजूद थे। विधायक और डीएम ने बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों की समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया। बाढ़ प्रभावित गांव के लोग नाव से चलकर तिघरा, कुरी बाजार आदि जगहों पर पहुंचकर रोजमर्रा का सामान खरीदते हैं। उसके बाद घरों को लौट जाते हैं। छपरा मगरबी के पास स्थित रिंग बांध को तोड़कर बाढ़ का पानी कुर्मियांन टोला में घुस गया। जिससे यह गांव भी बाढ़ के चपेट में आ गया है। बाढ़ पीड़ितों को ग्राम प्रधान डीपी यादव ने तात्कालिक सहायता राशि मुहैया कराई है। मंगलवार को घाघरा नदी बिड़हर घाट पर 79.500 मीटर पर पहुंच गई। 35 सेंटीमीटर नदी और बढ़ी तो खतरे के निशान को पार कर जाएगी।
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- रहने, खाने और पशुओं को चारा खिलाने की सांसत झेल रहे लोग
- बिजली की सुविधा बंद, मोमबत्ती और टार्च के सहारे कर दूर कर रहे अंधेरा
- प्रशासनिक सहायता नहीं मिल पाने से व्यवस्था को कोस रहे
धनघटा। घाघरा नदी का पानी जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही है। अंधेरे में रहकर जीवन जीने का उपाय करना उनकी मजबूरी हो गई है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को घर से निकलने के लिए प्रशासन ने भले ही 33 नाव लगाए जाने का दावा कर रहा हो, लेकिन पीड़ितों की अन्य समस्याओं का समाधान करने में असफल है। प्रशासनिक विफलता बाढ़ पीड़ितों को भारी पड़ रही है।
घाघरा नदी और एमबीडी बांध के बीच धनघटा तहसील क्षेत्र के 22 गांव की करीब 11,000 की आबादी निवास करती है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद इन गांवों में वर्षों से तबाही मचती चली आ रही है। इस वर्ष अक्तूबर में घाघरा रौद्र रूप धारण कर जब खतरे के निशान के करीब पहुंच गई तो गायघाट दक्षिणी, गुनावतिया, चकदहा, ढोल बजा समेत 14 गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गए। जिन लोगों का मकान गांव के किनारे था, उनके मकान में भी बाढ़ का पानी घुस गया। बाढ़ से प्रभावित गांव के लोगों को रहने खाने के लिए तिघरा स्थित एक इंटर कॉलेज में बाढ़ राहत केंद्र संचालित करने का काम तो प्रशासन कर रहा है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बार-बार अपील के बाद भी बाढ़ से प्रभावित गांव के लोग गांव को छोड़कर बाढ़ राहत शिविर पर नहीं पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ बाढ़ पीड़ित ईश्वर, सुभाष, सागर, राम कोमल, राम बुझ आदि का कहना है कि प्रशासन के लोग बार-बार बाढ़ राहत शिविर में जाने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन वहां पर व्यवस्था नाम की कोई चीज दिखाई नहीं दे रही है।
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सबसे बड़ी समस्या पशुओं को खिलाने के लिए चारे की है। प्रशासन के लोग चारे की भी व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। नदी का पानी बढ़ने से विद्युत निगम ने बिजली सप्लाई बंद कर दिया है। लोग घरों पर मोमबत्ती और टॉर्च के सहारे उजाला कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन के लोग अभी तक मोमबत्ती और माचिस तक उपलब्ध नहीं करा पाए। गांव वालों का कहना है कि जब से कम्हरिया घाट पर फोरलेन सड़क बनी है, तभी से बाढ़ की समस्या यहां के लोगों के लिए और अधिक विकराल हो गई है। फोरलेन पर इधर से जल निकासी के लिए पुलिया निर्माण कराए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर जाकर देखने के बाद पुलिया बनवाए जाने की बात तो करते हैं, लेकिन पुलिया का निर्माण कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांव में 33 नावें लगाई जा चुकी हैं। अनाज और मोमबत्ती समेत अन्य सामान बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों में वितरित करने के लिए मांग की गई है। अनाज मिलने के बाद बाढ़ पीड़ितों में वितरित कर दी जाएगी।
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विधायक और डीएम ने बाढ़ पीड़ितों की सुनी समस्या, समाधान का दिया भरोसा
मंगलवार को डीएम प्रेम रंजन सिंह और एसपी सोनम कुमार गायघाट दक्षिणी, कुर्मियांन टोला, तुरकौलिया नायक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे तो लोगों ने उन्हें समस्याओं से अवगत कराया। अफसरों के साथ विधायक गणेश चंद चौहान भी मौजूद थे। विधायक और डीएम ने बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों की समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया। बाढ़ प्रभावित गांव के लोग नाव से चलकर तिघरा, कुरी बाजार आदि जगहों पर पहुंचकर रोजमर्रा का सामान खरीदते हैं। उसके बाद घरों को लौट जाते हैं। छपरा मगरबी के पास स्थित रिंग बांध को तोड़कर बाढ़ का पानी कुर्मियांन टोला में घुस गया। जिससे यह गांव भी बाढ़ के चपेट में आ गया है। बाढ़ पीड़ितों को ग्राम प्रधान डीपी यादव ने तात्कालिक सहायता राशि मुहैया कराई है। मंगलवार को घाघरा नदी बिड़हर घाट पर 79.500 मीटर पर पहुंच गई। 35 सेंटीमीटर नदी और बढ़ी तो खतरे के निशान को पार कर जाएगी।