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आग कैसे बुझेगी जब अग्निशमन यंत्र ही खराब
पुनीत कुमार मिश्र/Sant Kabir Nagar
Updated Fri, 13 Jan 2017 11:19 PM IST
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अग्निशमन यंत्र
- फोटो : अमर उजाला
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यदि किसी परिषदीय स्कूल में किसी कारण से आग लग गई तो उसे बुझाना आसान नहीं होगा। कारण कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद वर्ष 2011 में जिले के 1518 परिषदीय स्कूलों में अग्निशमन यंत्र तो लगा दिए गए, पर उसके बाद से रिफिल ही नहीं कराए गए। जबकि अग्निशमन यंत्र की वैधता एक वर्ष होती है अर्थात इसे प्रतिवर्ष रिफिल कराना जरूरी है। वहीं कुछ स्कूलों में तो अग्निशमन यत्र स्टोर में फेंके जा चुके हैं।
वर्ष 2011 में कोर्ट ने सख्ती दिखाई तो मुख्य सचिव के आदेश के बाद सभी परिषदीय विद्यालयों में विद्यालय विकास अनुदान की राशि से अग्निशमन यंत्र लगा दिया गया। प्रत्येक यंत्र में पांच हजार रुपये खर्च हुए। लेकिन इसके लगने के बाद इसकी ओर देखा ही नहीं गया। हालत यह है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय खलीलाबाद, प्राथमिक विद्यालय गोला रगड़गंज, प्राथमिक विद्यालय बूधाबांध, उच्च प्राथमिक विद्यालय पटखौली समेत जिले के अधिकांश स्कूलों में लगे अग्निशमन यंत्र बदहाल हैं। वहीं प्रधानाध्यापक भी पेशोपेश में है कि किस मद से अग्निशमन यंत्रों की रिफिल कराई जाए।
इसके लिए विभाग से भी कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी त्रिवेणी प्रसाद पांडेय ने बताया कि अग्निशमन यंत्र की वैधता एक वर्ष तक होती है। उसको हर वर्ष रिफिल कराना पड़ता है। जिस स्थान पर यंत्र लगा है उसकी वैधता समाप्त हो गई हो तो उसकी सूचना दें। अग्निशमन यंत्र लगाने वाले कंपनी को सूचित कर उसे रिफिल करा दिया जाएगा।
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वहीं जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि विद्यालय विकास अनुदान से सभी विद्यालयों में वर्ष 2011 में अग्निशमन यंत्र लगा था। उसकी रिफिल नहीं हुई है। इसके लिए सभी प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर विद्यालय विकास अनुदान से उसकी रिफिल कराने को कहा जाएगा। रिफिल के बाद उसका अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा। अगर कोई विद्यालय अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं करता है तो उसके विद्यालय कार्रवाई की जाएगी।
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वर्ष 2011 में कोर्ट ने सख्ती दिखाई तो मुख्य सचिव के आदेश के बाद सभी परिषदीय विद्यालयों में विद्यालय विकास अनुदान की राशि से अग्निशमन यंत्र लगा दिया गया। प्रत्येक यंत्र में पांच हजार रुपये खर्च हुए। लेकिन इसके लगने के बाद इसकी ओर देखा ही नहीं गया। हालत यह है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय खलीलाबाद, प्राथमिक विद्यालय गोला रगड़गंज, प्राथमिक विद्यालय बूधाबांध, उच्च प्राथमिक विद्यालय पटखौली समेत जिले के अधिकांश स्कूलों में लगे अग्निशमन यंत्र बदहाल हैं। वहीं प्रधानाध्यापक भी पेशोपेश में है कि किस मद से अग्निशमन यंत्रों की रिफिल कराई जाए।
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इसके लिए विभाग से भी कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी त्रिवेणी प्रसाद पांडेय ने बताया कि अग्निशमन यंत्र की वैधता एक वर्ष तक होती है। उसको हर वर्ष रिफिल कराना पड़ता है। जिस स्थान पर यंत्र लगा है उसकी वैधता समाप्त हो गई हो तो उसकी सूचना दें। अग्निशमन यंत्र लगाने वाले कंपनी को सूचित कर उसे रिफिल करा दिया जाएगा।
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वहीं जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि विद्यालय विकास अनुदान से सभी विद्यालयों में वर्ष 2011 में अग्निशमन यंत्र लगा था। उसकी रिफिल नहीं हुई है। इसके लिए सभी प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर विद्यालय विकास अनुदान से उसकी रिफिल कराने को कहा जाएगा। रिफिल के बाद उसका अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा। अगर कोई विद्यालय अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं करता है तो उसके विद्यालय कार्रवाई की जाएगी।