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प्रतिष्ठा बनी सामूहिक विवाह योजना की सफलता में बाधक
संतकबीरनगर
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:05 AM IST
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प्रतिष्ठा बनी सामूहिक विवाह योजना की सफलता में बाधक
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। मेंहदावल क्षेत्र के सुनील की शादी तय है, लेकिन घरवाले इसे सामूहिक विवाह समारोह की बजाय अपने तय कार्यक्रम के हिसाब से करना चाहते हैं। बेलहर क्षेत्र की सुनंदा की शादी भी फरवरी में है, घरवाले चाहते हैं कि सरकारी योजना के तहत कम खर्च में शादी हो जाए, लेकिन वर पक्ष तैयार नहीं है। लिहाजा शादी अपने-अपने घर से ही होगी। ऐसे ही कई अन्य परिवार भी हैं, जो सामूहिक विवाह योजना में सिर्फ सामाजिक प्रतिष्ठा घटने के डर से शामिल नहीं हो रहे। इससे यह महत्वाकांक्षी योजना शुरुआत में ही फीकी हो गई है।
लोग अब भी बारात के शाही खर्च को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ रहे हैं। बारातियों के स्वागत से विवाह की अन्य रस्में पूरी कराने के लिए भले ही खेत और घर तक बेचना पड़ जाए, लेकिन खर्च में कोई कटौती मंजूर नहीं है। इसका असर यह है कि समाज कल्याण विभाग की तरफ से चलाई जा रही सामूहिक विवाह योजना के लिए आवेदक ही नहीं आ रहे। जिले में इस वर्ष 31 मार्च तक 1500 शादियां कराने का लक्ष्य है। अब तक 48 शादियां हो पाई हैं। नवंबर में खलीलाबाद में 125 जोड़ों की शादी करानी थी जिसके लिए मात्र 90 आवेदक आए हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो कई ऐसे केस भी आए हैं जिनमें कन्या पक्ष की तरफ से आवेदन किया गया, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी वर पक्ष को मिली तो उन्होंने आवेदन वापस लेने के लिए कह दिया। रिश्ता बनने से पहले ही टूटने की नौबत आने लगी तो आवेदन ही वापस कर दिया गया। इतना ही नहीं, शुभ मुहूर्त भी इस योजना में आड़े आ रही है। जो परिवार इस समारोह में शामिल के लिए तैयार भी हो रहे हैं तो वे इस बात की पुष्टि कर लेना चाहते हैं कि उस दिन शुभ मुहूर्त है कि नहीं। आवेदकों की कम संख्या से परेशान समाज कल्याण विभाग ने अब लक्ष्य पूरा करने के लिए नया उपाय खोजा है। विभाग प्रत्येक ग्राम पंचायत को कम से कम दो शादी कराने का लक्ष्य तय करेगा। इसके लिए शुक्रवार को विकास भवन सभागार में ग्राम पंचायत सचिवों की बैठक बुलाई गई है।
लोग अब भी बारात के शाही खर्च को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ रहे हैं। बारातियों के स्वागत से विवाह की अन्य रस्में पूरी कराने के लिए भले ही खेत और घर तक बेचना पड़ जाए, लेकिन खर्च में कोई कटौती मंजूर नहीं है। इसका असर यह है कि समाज कल्याण विभाग की तरफ से चलाई जा रही सामूहिक विवाह योजना के लिए आवेदक ही नहीं आ रहे। जिले में इस वर्ष 31 मार्च तक 1500 शादियां कराने का लक्ष्य है। अब तक 48 शादियां हो पाई हैं। नवंबर में खलीलाबाद में 125 जोड़ों की शादी करानी थी जिसके लिए मात्र 90 आवेदक आए हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो कई ऐसे केस भी आए हैं जिनमें कन्या पक्ष की तरफ से आवेदन किया गया, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी वर पक्ष को मिली तो उन्होंने आवेदन वापस लेने के लिए कह दिया। रिश्ता बनने से पहले ही टूटने की नौबत आने लगी तो आवेदन ही वापस कर दिया गया। इतना ही नहीं, शुभ मुहूर्त भी इस योजना में आड़े आ रही है। जो परिवार इस समारोह में शामिल के लिए तैयार भी हो रहे हैं तो वे इस बात की पुष्टि कर लेना चाहते हैं कि उस दिन शुभ मुहूर्त है कि नहीं। आवेदकों की कम संख्या से परेशान समाज कल्याण विभाग ने अब लक्ष्य पूरा करने के लिए नया उपाय खोजा है। विभाग प्रत्येक ग्राम पंचायत को कम से कम दो शादी कराने का लक्ष्य तय करेगा। इसके लिए शुक्रवार को विकास भवन सभागार में ग्राम पंचायत सचिवों की बैठक बुलाई गई है।
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