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डीएम ने चार घंटे तक खंगाली बीएसए कार्यालय की फाइलें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Mar 2018 12:01 AM IST
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बेसिक शिक्षा कार्यालय में अभिलेखों की जांच करते डीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। बीएसए कार्यालय में वसूली की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीएम मार्कंडेय शाही ने शुक्रवार को चार घंटे तक जांच पड़ताल की। बीएसए कार्यालय में अचानक पहुंचे डीएम को देखकर अधिकारी और कर्मचारी सकते में आ गए। जांच में ही विभिन्न मदों का 3,56,92725 रुपये का भुगतान लंबित पाया गया।
डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डायट प्राचार्य और डीआईओएस को जांच अधिकारी नामित कर एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने को कहा है। ऐसे में भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। बीएसए को लंबित भुगतान की कार्रवाई यथाशीघ्र पूरा करने का भी निर्देश दिया।
डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि अभिलेखों की जांच में पता चला कि बीएसए कार्यालय में नि:शुल्क जूता- मोजा मद का 2,32,17805 रुपये, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर, डेस्क, बेंच का 5453500 रुपये, कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक मद का 3074722 रुपये, छह से आठ तक की पाठ्य पुस्तकों का 3223798 रुपये, गैरवेतन अनुरक्षण मद का 7,00,400 रुपये और निरीक्षण मानक मद का 22500 रुपये का भुगतान अभी लंबित है। इसके अलावा मान्यता की पत्रावलियां काफी अधिक संख्या में लंबित है।
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दो रिसोर्स टीचर को फरवरी के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। 15 इंटीनरेंट टीचरों का फरवरी का मानदेय भुगतान नहीं हुआ है। 16 इंटीनरेंट टीचरों का मार्च से अगस्त 2017 तक मानदेय भुगतान लंबित है। फिजियोथेरेपिस्ट टीचर के फरवरी का मानदेय तथा मार्च से अगस्त 2017 का एरियर भी रुका है। करीब दो वर्षों का टीए बिल का भुगतान भी लंबित पाया गया। कस्तूरबा विद्यालयों में अनाज, दूध, फल, सब्जी आदि का भुगतान जो प्रत्येक महीने किया जाना है, काफी समय से लंबित चला आ रहा है।
शिक्षिकाओें को दिया जाना वाला प्रसूता अवकाश और बाल्यकाल देखभाल अवकाश के प्रकरण काफी अधिक संख्या में लंबित पाए गए। प्रधानाध्यापकों, सहायक अध्यापकों के वेतन भुगतान भी काफी समय से लंबित पाए गए। कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में डीसी बालिका एवं सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी का वेतन काफी समय से बाधित है। इन दोनों अधिकारियों से बीएसए के स्तर से स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए निर्णय ले लिया जाना चाहिए, लेकिन बीएसए ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
कस्तूरबा बालिका विद्यालय हैंसर बाजार, नाथनगर, सांथा बघौली, मेहदावल के कर्मचारियों का जनवरी व फरवरी 2018 का मानदेय अभी तक नहीं दिया गया है। जबकि सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी के जरिए 17 मार्च 2018 को बीएसए के समक्ष हस्ताक्षर के लिए पत्रावली पेश की गई थी।
प्रसूता अवकाश स्वीकृत करने में, विद्यालयों को मान्यता देने में और लंबित मदों का भुगतान न करने में हीलाहवाली की जा रही है। कुछ कर्मचारियों के जरिए धन उगाही की शिकायतें भी मिल रही हैं। इस मामले की जांच डायट प्राचार्य प्रताप सिंह बघेल और डीआईओएस शिव कुमार ओझा को सौंपी गई है। एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट जांच कर रिपोर्ट मांगी गई कि बिलंब के लिए कौन -कौन अधिकारी व कर्मचारी दोषी है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डायट प्राचार्य और डीआईओएस को जांच अधिकारी नामित कर एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने को कहा है। ऐसे में भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। बीएसए को लंबित भुगतान की कार्रवाई यथाशीघ्र पूरा करने का भी निर्देश दिया।
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डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि अभिलेखों की जांच में पता चला कि बीएसए कार्यालय में नि:शुल्क जूता- मोजा मद का 2,32,17805 रुपये, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर, डेस्क, बेंच का 5453500 रुपये, कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक मद का 3074722 रुपये, छह से आठ तक की पाठ्य पुस्तकों का 3223798 रुपये, गैरवेतन अनुरक्षण मद का 7,00,400 रुपये और निरीक्षण मानक मद का 22500 रुपये का भुगतान अभी लंबित है। इसके अलावा मान्यता की पत्रावलियां काफी अधिक संख्या में लंबित है।
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दो रिसोर्स टीचर को फरवरी के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। 15 इंटीनरेंट टीचरों का फरवरी का मानदेय भुगतान नहीं हुआ है। 16 इंटीनरेंट टीचरों का मार्च से अगस्त 2017 तक मानदेय भुगतान लंबित है। फिजियोथेरेपिस्ट टीचर के फरवरी का मानदेय तथा मार्च से अगस्त 2017 का एरियर भी रुका है। करीब दो वर्षों का टीए बिल का भुगतान भी लंबित पाया गया। कस्तूरबा विद्यालयों में अनाज, दूध, फल, सब्जी आदि का भुगतान जो प्रत्येक महीने किया जाना है, काफी समय से लंबित चला आ रहा है।
शिक्षिकाओें को दिया जाना वाला प्रसूता अवकाश और बाल्यकाल देखभाल अवकाश के प्रकरण काफी अधिक संख्या में लंबित पाए गए। प्रधानाध्यापकों, सहायक अध्यापकों के वेतन भुगतान भी काफी समय से लंबित पाए गए। कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में डीसी बालिका एवं सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी का वेतन काफी समय से बाधित है। इन दोनों अधिकारियों से बीएसए के स्तर से स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए निर्णय ले लिया जाना चाहिए, लेकिन बीएसए ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
कस्तूरबा बालिका विद्यालय हैंसर बाजार, नाथनगर, सांथा बघौली, मेहदावल के कर्मचारियों का जनवरी व फरवरी 2018 का मानदेय अभी तक नहीं दिया गया है। जबकि सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी के जरिए 17 मार्च 2018 को बीएसए के समक्ष हस्ताक्षर के लिए पत्रावली पेश की गई थी।
प्रसूता अवकाश स्वीकृत करने में, विद्यालयों को मान्यता देने में और लंबित मदों का भुगतान न करने में हीलाहवाली की जा रही है। कुछ कर्मचारियों के जरिए धन उगाही की शिकायतें भी मिल रही हैं। इस मामले की जांच डायट प्राचार्य प्रताप सिंह बघेल और डीआईओएस शिव कुमार ओझा को सौंपी गई है। एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट जांच कर रिपोर्ट मांगी गई कि बिलंब के लिए कौन -कौन अधिकारी व कर्मचारी दोषी है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।