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डीएम ने घोटाले की फाइल तलब की
संतकबीरनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 31 May 2017 11:26 PM IST
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सांथा ब्लॉक में दो बार हुई जांच में 32 लाख के उजागर हुए घपले के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इधर डीएम ने मामले का फिर संज्ञान लिया और घोटाले की फाइल तलब की है। इसको लेकर डीआरडीए से ब्लॉक मुख्यालय तक हड़कंप मच गया है।
दरअसल, पूर्व सांसद भालचंद यादव ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख सांथा शेहरुन्निशा के मांग पत्र की जांच कराए जाने के लिए शासन में पत्र दिया था। शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीएम डॉक्टर इंद्रवीर सिंह यादव ने 33 परियोजनाओं की जांच पांच सदस्यीय टीम गठित करके कराया था। जांच टीम फरवरी 2014 में रिपोर्ट डीएम को प्रेषित कर दी थी। जांच में 32 लाख का घोटाला उजागर हुआ था। टीम ने घपले के दोषियों पर एफआईआर और रिवकरी कराए जाने की संस्तुति की थी। इसके लपेटे में कई पूर्व बीडीओ समेत लगभग दर्जन भर कर्मचारी आ रहे थे। इधर घपले के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी कि पूर्व जांच टीम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए दुबारा जांच कराने की शिकायत पहुंची। जिस पर चार सितंबर 2014 को डीएम ने ड्रेनेज खंड के एक्सईएन, प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन और उप निदेशक कृषि प्रसार की कमेटी बना कर परियोजनाओं का स्थलीय सत्यापन एवं अभिलेखों का परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी। जांच टीम ने 22 और 23 जनवरी 2015 को स्थलीय सत्यापन एवं अभिलेखों का परीक्षण किया। टीम ने पहले की गई जांच को सही ठहराया। इस मामले में वसूली एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए बीडीओ को निर्देशित किया गया था। जबकि पूर्व सीडीओ के स्तर सात फरवरी 2015 और 23 जून 2015 को आयुक्त ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर निर्देश निर्देश मांगा गया था। इसके बावजूद शासन से न तो कोई निर्देश पत्र प्राप्त हुआ और न ही कोई कार्रवाई हो पाई। डीएम मारकंडेय शाही ने बता या कि 33 परियोजनाओं की दुबारा हुई जांच में भी 32 लाख के घोटाले की शिकायत सामने आई है। मामले की पत्रावली मंगा कर अवलोकन करेंगे। इस मामले में जो भी दोषी होगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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दरअसल, पूर्व सांसद भालचंद यादव ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख सांथा शेहरुन्निशा के मांग पत्र की जांच कराए जाने के लिए शासन में पत्र दिया था। शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीएम डॉक्टर इंद्रवीर सिंह यादव ने 33 परियोजनाओं की जांच पांच सदस्यीय टीम गठित करके कराया था। जांच टीम फरवरी 2014 में रिपोर्ट डीएम को प्रेषित कर दी थी। जांच में 32 लाख का घोटाला उजागर हुआ था। टीम ने घपले के दोषियों पर एफआईआर और रिवकरी कराए जाने की संस्तुति की थी। इसके लपेटे में कई पूर्व बीडीओ समेत लगभग दर्जन भर कर्मचारी आ रहे थे। इधर घपले के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी कि पूर्व जांच टीम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए दुबारा जांच कराने की शिकायत पहुंची। जिस पर चार सितंबर 2014 को डीएम ने ड्रेनेज खंड के एक्सईएन, प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन और उप निदेशक कृषि प्रसार की कमेटी बना कर परियोजनाओं का स्थलीय सत्यापन एवं अभिलेखों का परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी। जांच टीम ने 22 और 23 जनवरी 2015 को स्थलीय सत्यापन एवं अभिलेखों का परीक्षण किया। टीम ने पहले की गई जांच को सही ठहराया। इस मामले में वसूली एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए बीडीओ को निर्देशित किया गया था। जबकि पूर्व सीडीओ के स्तर सात फरवरी 2015 और 23 जून 2015 को आयुक्त ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर निर्देश निर्देश मांगा गया था। इसके बावजूद शासन से न तो कोई निर्देश पत्र प्राप्त हुआ और न ही कोई कार्रवाई हो पाई। डीएम मारकंडेय शाही ने बता या कि 33 परियोजनाओं की दुबारा हुई जांच में भी 32 लाख के घोटाले की शिकायत सामने आई है। मामले की पत्रावली मंगा कर अवलोकन करेंगे। इस मामले में जो भी दोषी होगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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