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घाघरा, कुआनो में डुबकी लगाई
अमर उजाला/संतकबीरनगर
Updated Sat, 16 Jan 2016 12:43 AM IST
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हैंसर। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर घाघरा नदी के बिड़हर, मयंदी, रामबाग
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और चहोड़ा घाटों पर श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को डुबकी लगाई।
शुक्रवार को भोर से ही घाघरा और कुआनों नदी के विभिन्न घाटों पर मकर संक्रांति के मौके पर स्नान करने वाले की कतार लग गई थी। कुआनों के मुखलिसपुर, महेश्वरपुर, पीडिय़ा, कटार मिश्र आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान पुण्य कर पूजा की।
इसके अलावा घाघरा के बिड़हर, चहोड़ा, मयंदी, रामबाग, चाड़ीपुर आदि घाटों पर सुबह होते ही श्रद्धालु पहुंच गए थे। ठंड से बेपरवाह होकर पवित्र नदी में जय- जय गंगे के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान करना शुरू कर दिया। सरयू नदी के बिड़हर घाट पर मेला भी लगा और महिलाएं बच्चे मेले में खरीदारी किए।
लोगों ने स्नान के बाद दान भी किया। मकर संक्रांति पर स्नान और दान देने की बहुत ही महत्ता पुराणों में बताई गई है। मान्यता है कि सूर्य जब दक्षिणायण से उत्तरायण होते हैं तो शादी विवाह के साथ- साथ शुभ मुहूर्त शुरू हो जाता है और लोग सभी शुभ कार्य करना शुरू कर देते हैं।
पंडित रामकृपाल पांडेय का कहना है कि धनु राशि से मकर राशि पर सूर्य प्रवेश करते हैं तो इस बदलाव को मकर संक्रांति कहते है। ऐसे समय में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। लोग पास के नदी तालाब और धार्मिक मंदिरों में उपासना कर लोक मंगल की भी कामना करते हैं।
शुक्रवार को भोर से ही घाघरा और कुआनों नदी के विभिन्न घाटों पर मकर संक्रांति के मौके पर स्नान करने वाले की कतार लग गई थी। कुआनों के मुखलिसपुर, महेश्वरपुर, पीडिय़ा, कटार मिश्र आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान पुण्य कर पूजा की।
इसके अलावा घाघरा के बिड़हर, चहोड़ा, मयंदी, रामबाग, चाड़ीपुर आदि घाटों पर सुबह होते ही श्रद्धालु पहुंच गए थे। ठंड से बेपरवाह होकर पवित्र नदी में जय- जय गंगे के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने स्नान करना शुरू कर दिया। सरयू नदी के बिड़हर घाट पर मेला भी लगा और महिलाएं बच्चे मेले में खरीदारी किए।
लोगों ने स्नान के बाद दान भी किया। मकर संक्रांति पर स्नान और दान देने की बहुत ही महत्ता पुराणों में बताई गई है। मान्यता है कि सूर्य जब दक्षिणायण से उत्तरायण होते हैं तो शादी विवाह के साथ- साथ शुभ मुहूर्त शुरू हो जाता है और लोग सभी शुभ कार्य करना शुरू कर देते हैं।
पंडित रामकृपाल पांडेय का कहना है कि धनु राशि से मकर राशि पर सूर्य प्रवेश करते हैं तो इस बदलाव को मकर संक्रांति कहते है। ऐसे समय में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। लोग पास के नदी तालाब और धार्मिक मंदिरों में उपासना कर लोक मंगल की भी कामना करते हैं।