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डिजिटल हस्ताक्षर ने फंसाया भुगतान
sant kabir nagar
Updated Tue, 12 Jul 2016 11:55 PM IST
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बीडीओ और ब्लॉक अकाउंटेंट के डिजिटल हस्ताक्षर न होने से ब्लॉक के मनरेगा मजदूरों को समय से मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है। काम होने के बाद मजदूरी न मिलने पर मजदूर प्रधानों के घरों के चक्कर लगा रहे हैं। मजदूरों की मजदूरी दिलाने के लिए प्रधान ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
मंगलवार को मेंहदावल ब्लॉक मुख्यालय पर घूरापाली के अनिल निषाद, थरौली के प्रधान दीपचंद शर्मा, कुसौनां कला के अनिल तिवारी, बेलौली के प्रधान बसंत तिवारी, मुड़िली के रमावती देवी, करमैनी के प्रधान अनूप सिंह पहुंचे हुए थे। प्रधानों ने बताया कि इस समय खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई के साथ लगन का महीना होने के कारण सभी को रकम की जरूरतें रहती हैं। ऐसे में मनरेगा मजदूर को भी जरूरतें रहती हैं। मनरेगा काम प्रधान कराते- रहते हैं, इस लिए मनरेगा मजदूर प्रधानों के घरों पर अक्सर अपनी मजदूरी की पूछताछ के लिए दौड़ लगाते हैं। इससे प्रधानों को मजबूर होकर ब्लॉक मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
प्रधानों ने कहा कि पिछले 20 जूून के पहले का मनरेगा कामों का प्रस्ताव पूरा करके ब्लॉक के मनरेगा प्रोजेक्ट कर्मी के पास पहुंचा दिया है। इसके बाद भी 20 जून के बाद किसी भी मनरेगा प्रोजेक्ट वर्क के प्रस्ताव पर भुगतान नहीं हुआ है। ब्लॉक पर प्रधानों से संबंधित ब्लॉक कर्मी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर नहीं होने के कारण ही मनरेगा कामों में मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाना बताया जाता है।
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वहीं डीसी मनरेगा विनय श्रीवास्तव ने बताया पिछले तीन महीने के भीतर मेंहदावल ब्लॉक के बीडीओ के बार-बार बदल जाने के कारण डिजिटल हस्ताक्षर नहीं तैयार हो पा रहा है। मनरेगा मजदूरी का भुगतान बीडीओ व ब्लॉक अकाउंटेंट के संयुक्त डिजिटल हस्ताक्षर से ही हो पाएगा। एक हफ्ते में संबंधित खंड विकास अधिकारी का डिजिटल हस्ताक्षर बनकर आ जाएगा। इसके बाद मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान शुरू हो जाएगा।
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मंगलवार को मेंहदावल ब्लॉक मुख्यालय पर घूरापाली के अनिल निषाद, थरौली के प्रधान दीपचंद शर्मा, कुसौनां कला के अनिल तिवारी, बेलौली के प्रधान बसंत तिवारी, मुड़िली के रमावती देवी, करमैनी के प्रधान अनूप सिंह पहुंचे हुए थे। प्रधानों ने बताया कि इस समय खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई के साथ लगन का महीना होने के कारण सभी को रकम की जरूरतें रहती हैं। ऐसे में मनरेगा मजदूर को भी जरूरतें रहती हैं। मनरेगा काम प्रधान कराते- रहते हैं, इस लिए मनरेगा मजदूर प्रधानों के घरों पर अक्सर अपनी मजदूरी की पूछताछ के लिए दौड़ लगाते हैं। इससे प्रधानों को मजबूर होकर ब्लॉक मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
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प्रधानों ने कहा कि पिछले 20 जूून के पहले का मनरेगा कामों का प्रस्ताव पूरा करके ब्लॉक के मनरेगा प्रोजेक्ट कर्मी के पास पहुंचा दिया है। इसके बाद भी 20 जून के बाद किसी भी मनरेगा प्रोजेक्ट वर्क के प्रस्ताव पर भुगतान नहीं हुआ है। ब्लॉक पर प्रधानों से संबंधित ब्लॉक कर्मी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर नहीं होने के कारण ही मनरेगा कामों में मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाना बताया जाता है।
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वहीं डीसी मनरेगा विनय श्रीवास्तव ने बताया पिछले तीन महीने के भीतर मेंहदावल ब्लॉक के बीडीओ के बार-बार बदल जाने के कारण डिजिटल हस्ताक्षर नहीं तैयार हो पा रहा है। मनरेगा मजदूरी का भुगतान बीडीओ व ब्लॉक अकाउंटेंट के संयुक्त डिजिटल हस्ताक्षर से ही हो पाएगा। एक हफ्ते में संबंधित खंड विकास अधिकारी का डिजिटल हस्ताक्षर बनकर आ जाएगा। इसके बाद मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान शुरू हो जाएगा।