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हौसलों से बेटियों ने उड़ान भरकर बनाई पहचान

Sun, 23 Jan 2022 10:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jan 2022 10:42 PM IST
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daughter was notorias of hard work
हौसलों से बेटियों ने उड़ान भरकर बनाई पहचान
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- बेटियां बोलीं, शिक्षा और प्रोत्साहन से मिलती है कामयाबी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जो बोल कभी घुटते थे, हौसले की आवाज मिलने पर गीत बन गए। अक्षरों का सहारा मिला तो गुमनाम गलियों में सिमटी नन्ही परियों की उम्मीदें आसमान छूने लगीं। गुरबत में भी आंखों में कभी आंसू नहीं, समाज के बंधनों के आगे वे नहीं झुकी। मुस्कराते हुए बस आगे बढ़ती रही, हार नहीं मानी और इरादों को पिघला दिया। कुछ ऐसी ही कहानी संगीता चौधरी और रजनी साव की है, जो अक्षरों का दीप जलाकर अपनी जिंदगी को रोशन कर ही रही हैं, दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन कर उभरी हैं।
संगीता ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनकर दिलाई पहचान
संतकबीरनगर। महुली क्षेत्र के रामपुर गांव की रहने वाली संगीता चौधरी पोल वॉल्ट की अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। खेल की बदौलत ही संगीता को वर्ष 2008 में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में कांस्टेबल पद पर नौकरी मिली थी। बाद में हवलदार बन गईं। अभी उनकी दिल्ली में तैनाती है।
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संगीता बताती हैं कि वह पांच भाई और दो बहने हैं। जिसमें वह तीसरे नंबर की हैं। बचपन से ही उनकी खेल में रुचि है। वह बताती हैं कि वर्ष 2017 में भुवनेश्वर में हुए एशियाड में प्रतिभाग की थी। वर्ष 2019 में चीन में हुए खेल में गोल्ड मेडल जीती थी। वह बताती है कि अब तक वह 22 से अधिक खेलों में प्रतिभाग कर चुकी हैं। जिसमें सात से अधिक गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। उनका कहना है कि बेटे और बेटियों में कोई फर्क नहीं है। बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी शिक्षा और उत्साहवर्धन की जरूरत है। संगीता के पिता लाल बिहारी और मां चंद्रकला बताती हैं कि उसे बेटी पर गर्व है। बेटी ने अपनी मेहनत से सफलता हासिल कर समाज में परिवार का नाम रोशन किया है।
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अफ्रीका के किलिमंजारों पर्वत को फतह कर बढ़ाया मान
संतकबीरनगर। धनघटा क्षेत्र के करमा गांव की रहने वाली 26 वर्षीय रजनी साव अफ्रीका के अफ्रीका का 19,341 फीट ऊंचा किलिमंजारों पर्वत को फतह करके देश का नाम रोशन की है। रजनी साव स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर बेलहर ब्लॉक में कार्यरत है।

रजनी साव बताती है कि वर्ष 2012-12 में पर्वतारोही बछेंद्री पाल और अरुणिमा सिन्हा का वीडियो देखा तो उनका हौसला बढ़ा। उसके बाद वह पर्वतारोही बनने की ठान ली। वर्ष 2016 में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्ट्रीच्यूट हिमांचल से 28 दिन का बेसिक माउंटेेनियरिंग कोर्स की। 15 अक्तूबर 2016 को पहली बार उन्होंने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धौलाधार रेंज के हनुमान टिब्बा पर्वत पर 15,700 फीट ऊंचाई को फतह किया था। वर्ष 2017 में जोहार इंस्ट्रीच्यूट पहलग्राम जम्मू कश्मीर में 28 दिन का फिर प्रशिक्षण ली थी। उसी दौरान सूरत के टेबलटॉप पर्वत पर 14 हजार फीट की ऊंचाई को फतह किया था। वर्ष 2017 में ही सीतीधार पर्वत पर 16, 0380 फीट की ऊंचाई को फतह किया था। सात जनवरी 2022 को अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारों को फतह कर तिरंगा फहराया। रजनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों के साथ ही डीएम, एसपी, सीडीओ को दिया। जिन्होंने उसे प्रोत्साहित किया। उनका है कि बेटियां हर क्षेत्र में मुकाम हासिल कर रही हैं। बेटियों को अच्छी तालीम देने की जरूरत है।
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