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Sant Kabir Nagar News: अकीदत के साथ अदा की गई रमजान माह के चौथे जुमे की नमाज
Sat, 15 Apr 2023 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 15 Apr 2023 12:00 AM IST
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सेमरियावां मदनी मस्जिद में जुमा की नमाज अदा करते रोजेदार।संवाद
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- जामा मस्जिदों में रोजेदारों की रही जबरदस्त भीड़
फोटो है
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। पवित्र माह ए रमजान के चौथे जुमे की नमाज क्षेत्र की जामा मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। जामा मस्जिदों में रोजदारों की जबरदस्त भीड़ रही। वृद्ध, नौजवान, बच्चों ने नमाज ए जुमा अदा की। इस दौरान मुल्क में अमन चैन न खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं।
रमजान माह के दौरान पड़ने वाले जुमे की नमाज काफी अहम मानी जाती है। रमजान माह के चौथे जुमे की नमाज की तैयारी के लिए सुबह से लोग लग गए। घरों व मस्जिदों में विशेष साफ सफाई की गई। 12: 30 बजे जुमा की अजान होते ही रोजेदार जामा मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए एकत्र होने लगे।
मस्जिदों में भीड़ को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए। जामा मस्जिद सेमरियावां, मदनी मस्जिद सेमरियावां, खलिलिया मस्जिद सेमरियावां सहित बाघनगर, दुधारा, उशरा शहीद, लोहरौली, करही, सालेहपुर, अगया, दरियाबाद, तिलजा, तिनहरी माफी, दानोकुइयां, बिगरा मीर, चिउटना, नौवा गांव, महादेव, उंचहरा कला आदि गांवों की जामा मस्जिदों में रोजादारों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर निर्धारित समयानुसार नमाज ए जुमा अदा की।
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मदनी मस्जिद में इमाम कारी नसीरुद्दीन, जामा मस्जिद में मौलाना कारी मो अरशद कदमी ने नमाज पढ़ाई। नमाज जुमा के मौके पर इमाम कारी नसीरुद्दीन ने माह ए रमजान की विशेषता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही रमजान के आखिरी अशरा जहन्नुम से निजात में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने पर जोर डाला। उन्होंने कहा कि रोजा आदमी के लिए ढाल है। रोजा हिफाजत करता है अल्लाह के अजाब से। माहे रमजान नेकी कमाने का दिन है।
शिक्षक जफीर अली करखी ने माह ए रमजान की आखिरी दस दिन की विशेषता के बारे में बताया कि रमजानुल मुबारक के आखिरी अशरा के ताक रातों में से एक रात शब ए कद्र कहलाती है। कुरान पाक में इस रात को हजार महीनों से अफजल बताया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। पवित्र माह ए रमजान के चौथे जुमे की नमाज क्षेत्र की जामा मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। जामा मस्जिदों में रोजदारों की जबरदस्त भीड़ रही। वृद्ध, नौजवान, बच्चों ने नमाज ए जुमा अदा की। इस दौरान मुल्क में अमन चैन न खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं।
रमजान माह के दौरान पड़ने वाले जुमे की नमाज काफी अहम मानी जाती है। रमजान माह के चौथे जुमे की नमाज की तैयारी के लिए सुबह से लोग लग गए। घरों व मस्जिदों में विशेष साफ सफाई की गई। 12: 30 बजे जुमा की अजान होते ही रोजेदार जामा मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए एकत्र होने लगे।
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मस्जिदों में भीड़ को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए। जामा मस्जिद सेमरियावां, मदनी मस्जिद सेमरियावां, खलिलिया मस्जिद सेमरियावां सहित बाघनगर, दुधारा, उशरा शहीद, लोहरौली, करही, सालेहपुर, अगया, दरियाबाद, तिलजा, तिनहरी माफी, दानोकुइयां, बिगरा मीर, चिउटना, नौवा गांव, महादेव, उंचहरा कला आदि गांवों की जामा मस्जिदों में रोजादारों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर निर्धारित समयानुसार नमाज ए जुमा अदा की।
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मदनी मस्जिद में इमाम कारी नसीरुद्दीन, जामा मस्जिद में मौलाना कारी मो अरशद कदमी ने नमाज पढ़ाई। नमाज जुमा के मौके पर इमाम कारी नसीरुद्दीन ने माह ए रमजान की विशेषता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही रमजान के आखिरी अशरा जहन्नुम से निजात में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने पर जोर डाला। उन्होंने कहा कि रोजा आदमी के लिए ढाल है। रोजा हिफाजत करता है अल्लाह के अजाब से। माहे रमजान नेकी कमाने का दिन है।
शिक्षक जफीर अली करखी ने माह ए रमजान की आखिरी दस दिन की विशेषता के बारे में बताया कि रमजानुल मुबारक के आखिरी अशरा के ताक रातों में से एक रात शब ए कद्र कहलाती है। कुरान पाक में इस रात को हजार महीनों से अफजल बताया गया है।