{"_id":"611d48018ebc3e7a02576312","slug":"crop-suger-cane-khalilabad-news-gkp4059784105","type":"story","status":"publish","title_hn":"सह फसली खेती से सिराज बढ़ा रहे आय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सह फसली खेती से सिराज बढ़ा रहे आय
विज्ञापन
कटहा उर्फ भिटहा गांव निवासी किसान सिराज के खेत में लहलहा रही गन्ना व बैaगन की फसल।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सह फसली खेती से सिराज बढ़ा रहे आय
गन्ने के साथ पहले भरूआ मिर्च की फसल ली और अब बैंगन बेच रहे
इंद्रेश यादव
धनघटा। पौली ब्लॉक के कटहा उर्फ भिटहा गांव निवासी किसान मोहम्मद सिराज सह फसली खेती अपनी आय बढ़ा रहे हैं। उन्होंने एक एकड़ में गन्ने के साथ पहले भरुआ मिर्च बोई। मिर्च कटने के बाद बैंगन लगा दिया। अब बैंगन की फसल ले रहे हैं। सहफसली खेती से ये क्षेत्र के किसानों के प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
मोहम्मद सिराज बताते है कि एक समय क्षेत्र मूंगफली, शकरकंद के अलावा कोई दूसरी फसल उगाना हथेली में बाल उगाने के समान था। बगही में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती की सीख देनी शुरू की। वैज्ञानिकों की सलाह पर पहले कम खेत में सब्जी की खेती की। पैदावार अच्छी हुई तो उत्साह बढ़ा। नतीजतन जिस खेत में सावां, टागुन भी अच्छी तरह से नही उग पाता था, ,आज उसी खेत में हर तरह की फसल उगाना आसान हो गया। उन्होंने बताया कि इस समय एक एकड़ खेत में गन्ना लगाया है। गन्ने की बुआई कतारबद्ध तरीके से नौ फीट की दूरी की है। गन्ने की विकसित प्रजाति सी ओ 238 बोने के बाद भरूआं मिर्च लगा दी। जिससे एक लाख 75 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। मिर्च की कटाई के बाद उसी खेत में मई में बैगन लगा दिया। अब तक वे करीब एक लाख रुपये का बैंगन बेच चुके हैं। बैगन और भरूआं मिर्च से लाभ लेने के बाद गन्ने की पैदावार पर भी कोई फर्क नहीं पड़ा। सामान्य गन्ने की फसल से अधिक पैदावार होने की संभावना है। सिराज के अनुसार, एक एकड़ खेत में कम से कम पांच सौ क्विंटल गन्ना पैदा होने की उम्मीद है। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर वीवी सिंह ने बताया कि किसान यदि वैज्ञानिक ढंग से खेती करें तो उनका मुनाफा दोगुना होने में अधिक समय नहीं लगेगा। कृषि विज्ञान केंद्र का प्रयास है कि जिले का हर किसान सिराज की तरह सह फसली खेती करके कई फसलों की उपज एक ही खेत से लें। जिससे उनकी आय बढ़े और वह आत्म निर्भर हो सकें।
विज्ञापन
गन्ने के साथ पहले भरूआ मिर्च की फसल ली और अब बैंगन बेच रहे
इंद्रेश यादव
धनघटा। पौली ब्लॉक के कटहा उर्फ भिटहा गांव निवासी किसान मोहम्मद सिराज सह फसली खेती अपनी आय बढ़ा रहे हैं। उन्होंने एक एकड़ में गन्ने के साथ पहले भरुआ मिर्च बोई। मिर्च कटने के बाद बैंगन लगा दिया। अब बैंगन की फसल ले रहे हैं। सहफसली खेती से ये क्षेत्र के किसानों के प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
मोहम्मद सिराज बताते है कि एक समय क्षेत्र मूंगफली, शकरकंद के अलावा कोई दूसरी फसल उगाना हथेली में बाल उगाने के समान था। बगही में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती की सीख देनी शुरू की। वैज्ञानिकों की सलाह पर पहले कम खेत में सब्जी की खेती की। पैदावार अच्छी हुई तो उत्साह बढ़ा। नतीजतन जिस खेत में सावां, टागुन भी अच्छी तरह से नही उग पाता था, ,आज उसी खेत में हर तरह की फसल उगाना आसान हो गया। उन्होंने बताया कि इस समय एक एकड़ खेत में गन्ना लगाया है। गन्ने की बुआई कतारबद्ध तरीके से नौ फीट की दूरी की है। गन्ने की विकसित प्रजाति सी ओ 238 बोने के बाद भरूआं मिर्च लगा दी। जिससे एक लाख 75 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। मिर्च की कटाई के बाद उसी खेत में मई में बैगन लगा दिया। अब तक वे करीब एक लाख रुपये का बैंगन बेच चुके हैं। बैगन और भरूआं मिर्च से लाभ लेने के बाद गन्ने की पैदावार पर भी कोई फर्क नहीं पड़ा। सामान्य गन्ने की फसल से अधिक पैदावार होने की संभावना है। सिराज के अनुसार, एक एकड़ खेत में कम से कम पांच सौ क्विंटल गन्ना पैदा होने की उम्मीद है। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर वीवी सिंह ने बताया कि किसान यदि वैज्ञानिक ढंग से खेती करें तो उनका मुनाफा दोगुना होने में अधिक समय नहीं लगेगा। कृषि विज्ञान केंद्र का प्रयास है कि जिले का हर किसान सिराज की तरह सह फसली खेती करके कई फसलों की उपज एक ही खेत से लें। जिससे उनकी आय बढ़े और वह आत्म निर्भर हो सकें।
विज्ञापन