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धान की फसल की कटाई पर संकट
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धान की फसल की कटाई पर संकट
किसान बोले, नालों की सफाई न होने से अब भी खेतों में भरा है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। अतिवृष्टि के चलते खेतों में अभी भी जलभराव है। इससे कई स्थानों पर धान की फसल नष्ट हो गई है। जो बची है उसकी कटाई नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि नालों की सफाई न होने से अब भी पानी खेतों में भरा है। इस कारण धान की फसल की कटाई आसान नहीं है। पैदावार भी प्रभावित होने की संभावना है।
विकास खंड हैंसर बाजार और पौली घाघरा और कुआनो नदी के मध्य बसे हुए हैं। इस कारण यहां की खेती समतल न नहीं है। तेज बारिश होने के बाद उसमें पानी भर जाता है और वह नालों के रास्ते नदियों में जाता है। इस वर्ष हुई बारिश ने नालों की सफाई का पोल खोल कर रख दी है। पौली ब्लॉक के निहैला गांव से लेकर विकासखंड हैसर बाजार के गाई बसंतपुर गांव तक करीब 10 किलोमीटर लंबाई में स्थित खेतों में पानी भरा हुई है। जिससे सलाहाबाद, रूटीन, सेमरडाडी, मुंडेरा, बैकुंठपुर, पोखरा, माधोपुर, डेफरा, करनपुर, मंझरिया, भाटपार, अहरा, छपिया, डुहिया खुर्द, बरपरवा, कौलही, बैलौरा, पटखौली आदि गांवों के किसानों कि धान की फसल पानी में डूबी हुई है। किसान लक्ष्मी नारायण दुबे, राजकुमार, देव मन, श्याम बिहारी लाल श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र श्रीवास्तव, पवन पांडेय, जयशंकर प्रसाद, जवाहरलाल, रामकवल आदि का कहना है कि इन गांवों के खेतों का पानी केवनैया नाला के रास्ते कुआनो नदी में जाकर गिरता था। जिससे खेत खाली हो जाते थे और धान की कटाई और गेहूं की बुवाई समय से हो जाया करती थी, लेकिन 15 साल से अधिक का समय व्यतीत हो गया, केवनैया नाला की सफाई नहीं की गई। जिससे समय से नाले के रास्ते नदी में पानी नहीं जा पा रहा है। इतना ही नहीं रूपिन से कटार मिश्र तथा निरंजनपुर होकर कुआनो नदी तक जाने वाले नाले की भी सफाई नहीं किया गई, जिससे नदी में पानी नहीं जा पा रहा है। किसानों का कहना है कि धान की कटाई पर संकट के बादल मंडरा ही रहे हैं साथ ही साथ गेहूं की बुआई भी जलभराव के कारण समय से नहीं हो पाएगी। बीडीओ हैंसर अमरेश सिंह चौहान ने कहा कि समस्या का संज्ञान है। पानी सूखने पर मनरेगा के बजट से नाले की सफाई कराई जाएगी।
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किसान बोले, नालों की सफाई न होने से अब भी खेतों में भरा है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। अतिवृष्टि के चलते खेतों में अभी भी जलभराव है। इससे कई स्थानों पर धान की फसल नष्ट हो गई है। जो बची है उसकी कटाई नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि नालों की सफाई न होने से अब भी पानी खेतों में भरा है। इस कारण धान की फसल की कटाई आसान नहीं है। पैदावार भी प्रभावित होने की संभावना है।
विकास खंड हैंसर बाजार और पौली घाघरा और कुआनो नदी के मध्य बसे हुए हैं। इस कारण यहां की खेती समतल न नहीं है। तेज बारिश होने के बाद उसमें पानी भर जाता है और वह नालों के रास्ते नदियों में जाता है। इस वर्ष हुई बारिश ने नालों की सफाई का पोल खोल कर रख दी है। पौली ब्लॉक के निहैला गांव से लेकर विकासखंड हैसर बाजार के गाई बसंतपुर गांव तक करीब 10 किलोमीटर लंबाई में स्थित खेतों में पानी भरा हुई है। जिससे सलाहाबाद, रूटीन, सेमरडाडी, मुंडेरा, बैकुंठपुर, पोखरा, माधोपुर, डेफरा, करनपुर, मंझरिया, भाटपार, अहरा, छपिया, डुहिया खुर्द, बरपरवा, कौलही, बैलौरा, पटखौली आदि गांवों के किसानों कि धान की फसल पानी में डूबी हुई है। किसान लक्ष्मी नारायण दुबे, राजकुमार, देव मन, श्याम बिहारी लाल श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र श्रीवास्तव, पवन पांडेय, जयशंकर प्रसाद, जवाहरलाल, रामकवल आदि का कहना है कि इन गांवों के खेतों का पानी केवनैया नाला के रास्ते कुआनो नदी में जाकर गिरता था। जिससे खेत खाली हो जाते थे और धान की कटाई और गेहूं की बुवाई समय से हो जाया करती थी, लेकिन 15 साल से अधिक का समय व्यतीत हो गया, केवनैया नाला की सफाई नहीं की गई। जिससे समय से नाले के रास्ते नदी में पानी नहीं जा पा रहा है। इतना ही नहीं रूपिन से कटार मिश्र तथा निरंजनपुर होकर कुआनो नदी तक जाने वाले नाले की भी सफाई नहीं किया गई, जिससे नदी में पानी नहीं जा पा रहा है। किसानों का कहना है कि धान की कटाई पर संकट के बादल मंडरा ही रहे हैं साथ ही साथ गेहूं की बुआई भी जलभराव के कारण समय से नहीं हो पाएगी। बीडीओ हैंसर अमरेश सिंह चौहान ने कहा कि समस्या का संज्ञान है। पानी सूखने पर मनरेगा के बजट से नाले की सफाई कराई जाएगी।
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