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क्रिमिनल जस्टिस : ताकि फिर किसी बेगुनाह को न जाना पड़े जेल
Wed, 05 Jul 2023 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 05 Jul 2023 11:18 PM IST
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एसपी सत्यजीत गुप्ता।
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संतकबीरनगर। वर्ष 2012 में दुधारा क्षेत्र में एक ईंट-भट्ठा व्यवसायी की हुई हत्या के आरोप में बालेपार के गिरीश चंद्र यादव और कचेहरा के टिंकू चौधरी घिर गए। ईंट-भट्ठा व्यवसायी के भाई ने हत्या का आरोप इन्हीं लोगों पर मढ़ते हुए केस दर्ज कराया। आनन-फानन में पुलिस ने दोनों लोगों को जेल भेज दिया। यह लोग 83 दिन तक जेल में रहे। बाद में पुलिस ने विवेचना से असली कातिलों को ढूंढ कर पकड़ा और रिपोर्ट देकर इन्हें जेल से रिहा कराया। छह अप्रैल 2022 को कोर्ट से तीनों आरोपी बेगुनाह साबित हो गए,लेकिन इसके पहले की टिंकू चौधरी की मौत हो गई थी।
बालेपार के रहने वाले गिरीश चंद्र यादव बताते है कि पिपरा प्रथम के रहने 40 वर्षीय गजेंद्र सिंह पुत्र उग्रसेन सिंह बालेपार में ईंट-भट्ठा संचालित करते थे। 12/13 सितंबर 2012 की रात भट्ठे पर सोते दौरान सब्बल से प्रहार गजेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। पीड़ित भाई पवन कुमार सिंह ने इस मामले में गिरीश चंद्र यादव और कचेहरा निवासी टिंकू चौधरी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। 20 सितंबर 2012 को पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 83 दिन तक दोनों जेल में बंद रहे। उसके बाद तत्कालीन एसओ दुधारा अनूप कुमार शुक्ला ने घटना में शामिल गोंडा जिले के परसपुर क्षेत्र के डलईपुरवा टोला बंसपुर निवासी लाल बाबू शर्मा उर्फ अजय और उसकी प्रेमिका सीमा उर्फ सोनी निवासी उसईपुरवा बसंतपुर, परसपुर गोंडा को पकड़कर हत्या के आरोप में जेल भेजा था। पुलिस की रिपोर्ट पर गिरीशचंद्र और टिंकू चौधरी जेल से रिहा हुए।
गिरीशचंद्र बताते है कि बाद में 319 में कोर्ट ने गिरीशचंद्र, टिंकू चौधरी, अमर यादव को तलब किया। उसके बाद तीनों को जेल भेज दिए गए। करीब तीन महीने तक तीनों लोग जेल में बंद रहे। हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर तीनों लोग जेल से छूटे। छह अप्रैल 2022 को कोर्ट ने तीनोंं आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। उन्होंने बताया कि इसी दौरान टिंकू चौधरी की मौत हो गई। इस घटना में काफी परेशानी उठानी पड़ी। करीब एक बीघे जमीन भी बेच देनी पडी। घर, गृहस्थी चौपट हो गई थी। बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी बाधित हो गई थी। इस घटना की वजह से दस साल तक तबाह रहे।
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यह घटना महज बानगी भर है पुलिस की कार्य प्रणाली की। आज से कुछ वर्षो पहले तक पुलिस तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लेती थी, फिर आरोपी को बिना जांच पूरी किए ही जेल भेज दिया जाता था। इस चक्कर में कई ऐसे लोग है, जिन्हें इंसाफ पाने में कई साल और रुपये खर्च करने पड़ते है। हालांकि अब पुलिस ने केस दर्ज करने में देरी छोड़कर जांच में समय देने के फार्मूले पर काम शुरु किया है, जो इसका फायदा बेगुनाहों को मिलने लगा है। जब भी किसी को साजिशन फंसाने की कोशिश हुई है, पुलिस ने हत्या, हमला करने जैसे गंभीर धाराओं में केस तो दर्ज किया है,लेकिन जांच में प्रर्याप्त समय दिया है। इसका फायदा उन बेगुनाहों को मिला,जो फंसाए गए थे। उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। वहीं कई ऐसे मामले भी है, जिसमें पुलिस ने दबाव में आरोपी को जेल तो भेज दिया, लेकिन बाद में जांंच में निर्दोष पाए जाने पर रिपोर्ट भेजकर जेल से रिहा भी कराया।
इंसेट
बेगुनाह भी थी, दस दिन मां-बेटी ने काटा जेल
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की युवती के दरवाजे पर 12 जनवरी 2022 को बेलहर क्षेत्र के रहने वाले युवक ने कुछ खा लिया था। जिसकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। मृतक की मां ने युवती और उसकी मां, भाई और बहन के खिलाफ कोर्ट में आवेदन देकर बेटे की हत्या का आरोप मढ़ा। कोर्ट के आदेश पर मां-बेटी समेत चारों पर हत्या का केस दर्ज हुआ। इस बीच आरोपी बनाई गई मां-बेटी कोर्ट में हाजिर हुई और जेल भेज दी गई। कोतवाल सर्वेश राय बताते है कि विवेचना में पाया गया कि मृतक और युवती के बीच बातचीत होती थी। युवक एकतरफा प्यार करने लगा और शादी का दबाव बनाने लगा। युवती ने इन्कार किया तो आरोपी उसके दरवाजे पर पहुंच कर जहरीला पदार्थ खा कर जान दे दिया। विवेचना से मां-बेटी निर्दोष मिली तो रिपोर्ट देकर दोनों को जेल से रिहा कराया गया। इस केस को विवेचना से खारिज करके रिपोर्ट कोर्ट में भेज दिया। मां-बेटी बताती है कि पुलिस की निष्पक्ष जांच से ही दोनों की बेगुनाही साबित हुई। दस दिन जेल में कैसे कटा, यह शब्दों में बयां नहीं कर सकती।
इंसेट
पुलिस की रिपोर्ट पर रिहा हुए थे धर्मेद्र दुधारा
क्षेत्र के छितरापार में 22 दिसंबर 2022 को रास्ते के विवाद को लेकर मारपीट हुई थी। जिसमें 60 वर्षीय कपिलदेव पुत्र मनराज की अस्पताल ले जाते दौरान मौत हो गई थी। इसमें मामले में पीड़ित बेटे संतोष कुमार ने प्रमेश, राकेश, हरिकेश, जसराजी देवी, लक्ष्मीना, बीपत और धर्मेंद्र के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने घटना के दिन ही आरोपी बनाए गए प्रमेश, हरिकेश, राकेश और धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस के मुताबिक विवेचना से जसराजी, लक्ष्मीना, बीप की नामजदगी गलत गई। जबकि जेल भेजे गए धर्मेंद्र को रिपोर्ट से रिहा कराया।
इंसेट
पुलिस केस तहरीर के आधार पर दर्ज करती है, लेकिन कार्रवाई जांच के आधार व साक्ष्योंं के आधार पर ही की जाती है। पुलिस गंभीर मामलों में जांच कर कार्रवाई कर रही है। दोषी को सख्त सजा मिल सकें, इसके लिए साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल करती है और बेगुनाह फंसाए गए लोगों का नाम भी केस से बाहर किया जाता है। रंजिश में कोई किसी को फंसा सकता है, लेकिन पुलिस जांच कर वहीं कार्रवाई करती है, जिससे कोई निर्दोष न फंसने पाए।
- सत्यजीत गुप्ता,एसपी
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बालेपार के रहने वाले गिरीश चंद्र यादव बताते है कि पिपरा प्रथम के रहने 40 वर्षीय गजेंद्र सिंह पुत्र उग्रसेन सिंह बालेपार में ईंट-भट्ठा संचालित करते थे। 12/13 सितंबर 2012 की रात भट्ठे पर सोते दौरान सब्बल से प्रहार गजेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। पीड़ित भाई पवन कुमार सिंह ने इस मामले में गिरीश चंद्र यादव और कचेहरा निवासी टिंकू चौधरी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। 20 सितंबर 2012 को पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 83 दिन तक दोनों जेल में बंद रहे। उसके बाद तत्कालीन एसओ दुधारा अनूप कुमार शुक्ला ने घटना में शामिल गोंडा जिले के परसपुर क्षेत्र के डलईपुरवा टोला बंसपुर निवासी लाल बाबू शर्मा उर्फ अजय और उसकी प्रेमिका सीमा उर्फ सोनी निवासी उसईपुरवा बसंतपुर, परसपुर गोंडा को पकड़कर हत्या के आरोप में जेल भेजा था। पुलिस की रिपोर्ट पर गिरीशचंद्र और टिंकू चौधरी जेल से रिहा हुए।
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गिरीशचंद्र बताते है कि बाद में 319 में कोर्ट ने गिरीशचंद्र, टिंकू चौधरी, अमर यादव को तलब किया। उसके बाद तीनों को जेल भेज दिए गए। करीब तीन महीने तक तीनों लोग जेल में बंद रहे। हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर तीनों लोग जेल से छूटे। छह अप्रैल 2022 को कोर्ट ने तीनोंं आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। उन्होंने बताया कि इसी दौरान टिंकू चौधरी की मौत हो गई। इस घटना में काफी परेशानी उठानी पड़ी। करीब एक बीघे जमीन भी बेच देनी पडी। घर, गृहस्थी चौपट हो गई थी। बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी बाधित हो गई थी। इस घटना की वजह से दस साल तक तबाह रहे।
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यह घटना महज बानगी भर है पुलिस की कार्य प्रणाली की। आज से कुछ वर्षो पहले तक पुलिस तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लेती थी, फिर आरोपी को बिना जांच पूरी किए ही जेल भेज दिया जाता था। इस चक्कर में कई ऐसे लोग है, जिन्हें इंसाफ पाने में कई साल और रुपये खर्च करने पड़ते है। हालांकि अब पुलिस ने केस दर्ज करने में देरी छोड़कर जांच में समय देने के फार्मूले पर काम शुरु किया है, जो इसका फायदा बेगुनाहों को मिलने लगा है। जब भी किसी को साजिशन फंसाने की कोशिश हुई है, पुलिस ने हत्या, हमला करने जैसे गंभीर धाराओं में केस तो दर्ज किया है,लेकिन जांच में प्रर्याप्त समय दिया है। इसका फायदा उन बेगुनाहों को मिला,जो फंसाए गए थे। उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। वहीं कई ऐसे मामले भी है, जिसमें पुलिस ने दबाव में आरोपी को जेल तो भेज दिया, लेकिन बाद में जांंच में निर्दोष पाए जाने पर रिपोर्ट भेजकर जेल से रिहा भी कराया।
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बेगुनाह भी थी, दस दिन मां-बेटी ने काटा जेल
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की युवती के दरवाजे पर 12 जनवरी 2022 को बेलहर क्षेत्र के रहने वाले युवक ने कुछ खा लिया था। जिसकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। मृतक की मां ने युवती और उसकी मां, भाई और बहन के खिलाफ कोर्ट में आवेदन देकर बेटे की हत्या का आरोप मढ़ा। कोर्ट के आदेश पर मां-बेटी समेत चारों पर हत्या का केस दर्ज हुआ। इस बीच आरोपी बनाई गई मां-बेटी कोर्ट में हाजिर हुई और जेल भेज दी गई। कोतवाल सर्वेश राय बताते है कि विवेचना में पाया गया कि मृतक और युवती के बीच बातचीत होती थी। युवक एकतरफा प्यार करने लगा और शादी का दबाव बनाने लगा। युवती ने इन्कार किया तो आरोपी उसके दरवाजे पर पहुंच कर जहरीला पदार्थ खा कर जान दे दिया। विवेचना से मां-बेटी निर्दोष मिली तो रिपोर्ट देकर दोनों को जेल से रिहा कराया गया। इस केस को विवेचना से खारिज करके रिपोर्ट कोर्ट में भेज दिया। मां-बेटी बताती है कि पुलिस की निष्पक्ष जांच से ही दोनों की बेगुनाही साबित हुई। दस दिन जेल में कैसे कटा, यह शब्दों में बयां नहीं कर सकती।
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पुलिस की रिपोर्ट पर रिहा हुए थे धर्मेद्र दुधारा
क्षेत्र के छितरापार में 22 दिसंबर 2022 को रास्ते के विवाद को लेकर मारपीट हुई थी। जिसमें 60 वर्षीय कपिलदेव पुत्र मनराज की अस्पताल ले जाते दौरान मौत हो गई थी। इसमें मामले में पीड़ित बेटे संतोष कुमार ने प्रमेश, राकेश, हरिकेश, जसराजी देवी, लक्ष्मीना, बीपत और धर्मेंद्र के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने घटना के दिन ही आरोपी बनाए गए प्रमेश, हरिकेश, राकेश और धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस के मुताबिक विवेचना से जसराजी, लक्ष्मीना, बीप की नामजदगी गलत गई। जबकि जेल भेजे गए धर्मेंद्र को रिपोर्ट से रिहा कराया।
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पुलिस केस तहरीर के आधार पर दर्ज करती है, लेकिन कार्रवाई जांच के आधार व साक्ष्योंं के आधार पर ही की जाती है। पुलिस गंभीर मामलों में जांच कर कार्रवाई कर रही है। दोषी को सख्त सजा मिल सकें, इसके लिए साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल करती है और बेगुनाह फंसाए गए लोगों का नाम भी केस से बाहर किया जाता है। रंजिश में कोई किसी को फंसा सकता है, लेकिन पुलिस जांच कर वहीं कार्रवाई करती है, जिससे कोई निर्दोष न फंसने पाए।
- सत्यजीत गुप्ता,एसपी